भारत में पत्रकारिता और स्वतंत्र भावना


भारत में पत्रकारिता और स्वतंत्र भावना

भारत में पत्रकारिता और स्वतंत्र भावना


समाचार पत्रों ने भारत की प्रगति और समृद्धि में बाधक तत्वों का विरोध करना शुरू किया विचारकों और चिंतकों की कलम ने ज्ञान का नया प्रकाश जनसाधारण में फैलाने की चीज ताकि नई सामाजिक राजनीतिक चेतना के इस दौर में जब स्वर्णिम अतीत के आलोक में पीड़ित एवं दमित वर्तमान को जनता ने महसूस किया तो वह दर्द और दुख से करा उठी.

इस दौरान ईसाई मिशनरियों ने साप्ताहिक, मासिक आदि पत्रों का प्रकाशन प्रारंभ कर दिया था. मिशनरी पत्रकारिता ने हालांकि प्रत्यक्ष रूप से भारतीय जनता को विशेष प्रभावित नहीं किया परंतु फिर भी सार्वजनिक जागरण की दिशा में इनकी भूमिका को नकारा नहीं जा सकता एंग्लो इंडियन पत्रकारिता भारतीय महत्वाकांक्षाओं का प्रतिबिंब नहीं बन सकती थी तत्कालीन भारत के कुछ प्रगतिशील चिंतकों ने भारतीय जनता को नेतृत्व प्रदान कर सही मार्ग का प्रशस्त करने का प्रयास किया एंग्लो इंडियन पत्रकारिता भारत में पत्रकारिता के उद्भव के दिए आवश्यक उत्तरदाई रही है तथा जिस संघर्ष का साहस इस समय के पत्रकारों ने दिखाया वह स्तुत्य है किंतु फिर भी भारतीय पत्रकारिता अपनी परिस्थितियों के अनुरूप अपनी धरती से जुड़कर भारतीय प्रवेश को आत्मसात करती हुई आगे बढ़ी तथा जन जन की आशाओं व आस्थाओं का केंद्र बने यह राजा राममोहन राय का ही सामर्थ था कि जब इसाई मिशनरियों ने भारतीय संस्कृति वैभव तथा विशिष्टता पर प्रहार करने शुरू किए तो उनकी इस सांप्रदायिकता का विरोध ब्रह्मा निकल मैगजीन मैगजीन के माध्यम से कर अपनी मौलिकता वह विशिष्टता को सुरक्षित रखने का प्रयास किया.

भूमिगत प्रकाश 9 का प्रारंभ कैसे हुआ


भारतीय पत्र और पत्रकारों ने जब जनता की वाणी को उनकी आकांक्षाओं और दर्द को अभिव्यक्ति देना प्रारंभ किया तो ब्रिटिश अधिकारी उसे सहन नहीं कर सके प्रेस की शक्ति एवं महत्व से परिचित इन अधिकारियों ने स्वतंत्र प्रेस की धारणाओं को स्वीकार नहीं किया प्रेस पर लागू किए गए इन नियंत्रण का कारण समाचार पत्र प्रकाशन में अधिक तेजी ना आ सके वेलेज अली को जब यह महसूस होने लगा कि कुछ समाचार पत्र अपने पूर्व समय पर जांच के लिए नहीं भेजते तो उसने 22 मई सन 18 सो 1 में नए आदेश के तहत इसकी अनिवार्यता बताएं समाचार पत्रों में जब सैनिक गतिविधियों के बारे में तथा अन्य प्रतिबिंब संदर्भों के समाचार छपने लगे तो प्रेस पर कठोर नियंत्रण भी लागू किए जाने लगे इसक स्वाभाविक परिणाम हुआ भूमिगत प्रेस का उदय.
टेंपलेट आदि का प्रकाशन कर सरकार का विरोध किया जाने लगा वह टेस्ट मिशनरियों ने ऐसे टेंपलीटों के द्वारा हिंदू और मुसलमानों की धार्मिक मारे क्यों तथा आस्थाओं पर भी प्रहार किया.

Lord Minto और press


इन परिस्थितियों में सन 1807 में लॉर्ड मिंटो नए गवर्नर जनरल का पद संभाला वह पृष्ठ मिशनरियों की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए विशेष प्रयास किसने की मिंटो ने इन्हें आदेश दिया कि वे अपने प्रिंटिंग प्रेस कोलकाता में स्थानांतरित करें किंतु वित्तीय हानि को देखते हुए वह टेस्ट मिशनरियों ने पूर्ण सेंसरशिप का वादा कर लिया मिंटो ने vele zali के सन 1799 के आदेशों का कायम रखा तथा पत्र संपादकों को उनकी अनुपालना करने के सख्त आदेश दिए.

Lord Hastings का उदारवादी रुख।


सन 18 सो 13 में गवर्नर जनरल के रूप है lord Hastings की नियुक्ति हुई हेस्टिंग्स अपने पूर्ववर्ती गवर्नर जनरल की अपेक्षा प्रेस के प्रति अधिक उदार था वह भारत में साहित्यिक विकास करने का भी इच्छुक था उसने प्रशासन में समाचार पत्रों की उपयोगिता को स्पष्ट महसूस कर दिया था वह समाचार पत्रों को स्वतंत्रता देकर जनमत को प्रशासन के समर्थन में तैयार करना चाहता था कोलकाता जनरल के संपादक डॉक्टर जेम्स bryce ने प्रेस सेंसरशिप का कड़ा विरोध किया डॉक्टर ब्राइस ने प्रयासों की ही कारण सन 1818 में सेंसरशिप हटा दी गई किंतु इंग्लैंड में निदेशकों को नए आदेश जारी करने पड़े.
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