क्या है भारतीय समाचार पत्र अधिनियम ( संकटकालीन अधिकार )


क्या है भारतीय समाचार पत्र अधिनियम

( संकटकालीन अधिकार )

What is the Indian Newspapers Act (Crisis Rights)

संकटकालीन अधिकार


April,1931  को lord willingdon भारत के नए वॉइस राय बने विलिंगडन भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के विरोधी थे उन्होंने गांधीजी को लंदन से आते ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया तथा कांग्रेस के अवैध घोषित कर दिया सितंबर 1931 मैं लॉर्ड विलिंगडन ने भारतीय समाचार पत्र संकटकालीन अधिकार अधिनियम ( Indian press emergency power) act. पारित किया गत वर्षो में पारित प्रेस अधिनियम ओं की तरह ही इस अधिनियम ने स्थानीय प्रशासन को प्रेस को नियंत्रित करने के लिए असीमित अधिकार प्रदान किए सरकार को प्रकाशक तथा मुद्रा से ₹1000 तक की जमानत लेने के अधिकार मिल गए इसके तहत राष्ट्रीय आंदोलन के प्रमुख नेताओं के नाम हुआ चित्रों के प्रकाशन पत्रों प्रतिबंध लगा दिया गया साथ ही कांग्रेस दाल का अन्य किसी राजनीतिक घटना की सूचना अथवा विज्ञापन देने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया इस अधिनियम की एक धारा के अनुसार स्थानीय प्रशासन अथवा मजिस्ट्रेट के द्वारा मांगे गए सुरक्षा धन के जमा कराए बिना मुद्रणालय जमानत न करता और अपना कार्य करता रहता तो उस अवस्था में सम्राट के पक्ष में जप्त किया जा सकता था तो मुद्रक का घोषणा पत्र रद्द किया जा सकता था कोई मजिस्ट्रेट किसी भी व्यक्ति को समय-समय पर समाचार विज्ञप्ति विज्ञप्ति प्रकाशित करने का अधिकार प्रदान कर सकता था प्रांतीय सरकार के द्वारा इस कार्य के लिए अधिकृत कोई भी पुलिस अधिकारी ऐसा अनधिकृत समाचार विज्ञप्ति अथवा समाचार पत्र जहां कहीं भी वह वह उपलब्ध हो अधिकार कर सकता था अनाधिकृत समाचार विज्ञप्ति तथा समाचार पत्रों को प्रकाशित करने वाले मुद्रणालय समाचार विज्ञप्ति ओ तथा समाचार पत्रों को बेचने की अपराध के लिए जुर्माने रहित अथवा सहित छह माह का कारावास दिया जा सकता था प्रांतीय सरकार को अधिकार दिया गया कि वह कुछ प्रकाशनों के सम्राट के पक्ष में जप्त किए जाने उसके लिए वारंट जारी करने की भी आज्ञा दे सकती थी चुंगी कार्यालयों को अधिकार दिया गया कि वे कुछ निश्चित प्रकाशनों वाले ऐसे पैकेट को उस समय रोक सके जब ब्रिटिश भारत में उनका आयात किया जा रहा किसी अनधिकृत समाचार विज्ञप्ति अथवा समाचार पत्र के डाक के द्वारा नहीं भेजने से रोक ले इस प्रकार की व्यवस्था की गई की जब्ती की आज्ञा को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट को प्रार्थना पत्र भेजा गया जैसे प्रार्थना पत्र सुनने का अधिकार हाई कोर्ट की विशेष को ही किया गया जिसमें 3 न्यायाधीशों की व्यवस्था की गई थी इस अधिनियम का सहारा लेकर सरकार ने तत्कालीन प्रमुख समाचार पत्रों के खिलाफ कार्यवाही की आनंद बाजार पत्रिका, अमृत बाजार पत्रिका , फ्री प्रेस जनरल आदि कुछ प्रमुख पत्रों से सुरक्षा मांगी गई थी.
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