भगत सिंह जयंती पर फाड़े हाथ से बने पोस्टर DSW ने कहा अराजकता के लिए होगी कार्यवाही




शहीद-ए आज़म भगत सिंह की जयंती पर राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ सामाजिक एवं आर्थिक स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ते हुए स्वतंत्रता संग्राम में अपना अमूल्य बलिदान देने वाले भगत सिंह को जहाँ आज पूरा देश नमन कर रहा है 

वहीं दूसरी तरफ विश्वविद्यालय में लगे भगत सिंह के पोस्टरों को हार दिया गया जिसमें स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया ने अपना विरोध जताया उन्होंने कहा यह गलत है जहां हमने पोस्टर चस्पा किए हैं वहां अन्य छात्र संगठनों ने भी  पोस्टर्स लगाए हुए हैं उनके पोस्टर्स कभी फाड़े नहीं गए और हमारे ही क्यों क्या विश्वविद्यालय भगत सिंह को सम्मान नहीं देते।

Sfi ने कहा विश्वविद्यालय के बिड़ला परिसर में भगत सिंह को याद करते हुए SFI छात्र संगठन द्वारा लगाए गए पोस्टर्स विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा फाड़ दिए गए। 
 जब SFI छात्र संघठन के कार्यकर्ता विश्वविद्यालय प्रशासन में पोस्टर्स चिपका रहे थे जिनमें भगत सिंह जी के विचार लिखे गए थे । लेकिन विश्वविद्यालय के एक कर्मचारी को यह सब पसन्द नहीं आया और बेहद बदतमीजी से पेश आते हुवे जैसा कि यहां के अधिकांश कर्मचारी होते ही हैं 

पोस्टर्स हटवाने को कहा गया लेकिन जब जवाबी कार्यवाही में SFI के कार्यकर्ताओ ने कहा कि किस आधार पर हमें पोस्टर्स लगाने से मना किया जा रहा है तो परीक्षा ड्यूटी में तैनात इस कर्मचारी की बोलती बंद हो गयी लेकिन दुख की बात यह रही जिस भगत सिंह ने देश की आजादी के लिए मात्र 23 साल की उम्र में फांसी के फंदे को गले लगा दिया उनके विचारों से इस कर्मचारी को इतनी नफरत क्यों हो गयी ?? या इस कर्मचारी को संघठन से ही समस्या है 

वो इसलिए कि SFI लगातार छात्र हितों को देखते हुवे यहां के कर्मचारियों के काले कारनामो को उजागर करती रहती है । मामला सिर्फ यहां जा कर खत्म नहीं हुआ  आगे जाकर बहस कर रहे कर्मचारी ने धमकी देते हुवे ये कहा कि अभी हटवाता हूँ इन सारे पोस्टर्स को लेकिन  अहम बात यह है कि जब कोई गाइडलाइन जारी ही नहीं हुवी है पोस्टर्स से सम्बंधित तो किस प्रकरण के चलते हमारे पोस्टर्स हटवाए गए और सिर्फ SFI या भगत सिंह जी के पोस्टर्स ही क्यों ? 

अन्य छात्र संघटनो ने तो विश्वविद्यालय परिसर के अंदर तक अपने पोस्टर्स चस्पा किये हैं उससे क्यों समस्या नहीं हुवी वहीं दूसरी ओर RSS का एक पोस्टर्स चस्पा हुवा है उसपर कार्यवाही क्यो नहीं कि गयी  आखिरकार विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को इतना खोफ किस बात का है ?? 

इस प्रकरण को लेकर SFI के छात्र DSW से वार्तालाप के लिए गए तो DSW ने कहा कि पोस्टर फाड़ना गलत है लोकतंत्र में सभी को अपने विचार अभिव्यक्त करने की आज़ादी है। उन्होंने इस कृत्य पर प्रशासन की गलती स्वीकार की औऱ इसमें सुधार हेतु नियम जारी करने के निर्देश जारी किए।

वहीं इस प्रकरण पर SFI इकाई सचिव कमलेश नेगी ने बताया कि भगत सिंह के पोस्टर्स एक साजिश साजिश के तहत फाड़े गए हैं। विवि प्रशासन नहीं चाहता विवि परिसर में भगत सिंह के विचारों का प्रसार हो। विवि प्रशासन राजनीतिक प्रभाव से ओतप्रोत है जिसके तहत किसी संगठन औऱ विचारधारा विशेष के साथ भेदभाव किया जाता है। 

विश्वविद्यालय में जहाँ हमने पोस्टर्स लगाए थे वहाँ पहले से भी कई संघठन अपने पोस्टर्स लगाते आये हैं ऐसे में हमारे साथ ही ऐसा भेदभाव क्यों। हमारी मांग है कि जिस किसी असमाजिक तत्व ने ये कृत्य किया है उसकी पहचान कर तुरंत कार्यवाही की जाए।

Student federation of India के कार्यकर्ताओं ने इंसाफ के लिए मांग की और उन्होंने कहा भगत सिंह के लिए आपकी मत दिल में देशभक्ति क्यों नहीं है।