देहरादून: राजधानी देहरादून में जिला प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच ठन गई है। देहरादून बार एसोसिएशन ने जिलाधिकारी (DM) के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए न्यायालयों के बहिष्कार का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। वकीलों के इस कड़े रुख से राजस्व न्यायालयों और तहसीलों में कामकाज पूरी तरह ठप होने के आसार हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता पर टिप्पणी और भ्रष्टाचार बना मुख्य मुद्दा
विधि भवन में आयोजित बार एसोसिएशन की आम सभा में अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। विरोध के मुख्य रूप से दो कारण सामने आए हैं:
अधिवक्ता का अपमान: एक समाचार पत्र में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेमचंद शर्मा के खिलाफ प्रकाशित टिप्पणी को लेकर वकीलों ने जिलाधिकारी के प्रति भारी नाराजगी जताई।
तहसीलों में भ्रष्टाचार: अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि जिलाधिकारी के अधीन आने वाले राजस्व न्यायालयों और तहसीलों में भ्रष्टाचार चरम पर है। दाखिल-खारिज और विरासत जैसे महत्वपूर्ण मामलों की फाइलें महीनों से धूल फांक रही हैं।
'ट्रांसफर तक जारी रहेगा बहिष्कार'
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने एकजुट होकर निर्णय लिया है कि जब तक वर्तमान जिलाधिकारी का स्थानांतरण (Transfer) नहीं हो जाता, तब तक जिलाधिकारी न्यायालय का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।
विरोध की रूपरेखा:
- मंगलवार तक का अल्टीमेटम: मंगलवार तक जिले के सभी राजस्व न्यायालयों और रजिस्ट्रार कार्यालयों का पूर्ण बहिष्कार रहेगा।
- लंबित फाइलें: वकीलों का कहना है कि सुनवाई के लिए समय निर्धारित न होने से वादकारियों को भारी परेशानी हो रही है, जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की है।
आम जनता पर पड़ेगा सीधा असर
वकीलों के इस कार्य बहिष्कार से आम जनता के रजिस्ट्री, जमीन के दाखिल-खारिज और अन्य राजस्व संबंधी कार्य बुरी तरह प्रभावित होंगे। बार एसोसिएशन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने सम्मान और जनता के हितों के लिए इस लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाएंगे
