हेमकुंड साहिब यात्रा: अश्व वंशीय पशुओं के संरक्षण को प्रशासन गंभीर; जिलाधिकारी ने पशु क्रूरता नियमों के सख्ती से पालन के दिए निर्देश

गोपेश्वर/रुद्रप्रयाग, 14 अप्रैल 2026: पवित्र हेमकुंड साहिब की यात्रा के दौरान मार्ग पर तीर्थयात्रियों और सामान ढोने के काम में लगे अश्व वंशीय (घोड़े-खच्चर) पशुओं की सुरक्षा और उनके उचित रख-रखाव के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। सोमवार को जिला सभागार में जिलाधिकारी गौरव कुमार की अध्यक्षता में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया।

अश्व वंशीय पशुओं के संरक्षण को प्रशासन गंभीर

कार्यशाला के मुख्य बिंदु

विवरणप्रमुख जानकारी
आयोजन स्थलजिला सभागार
अध्यक्षताजिलाधिकारी गौरव कुमार
मुख्य उद्देश्यहेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर अश्व वंशीय पशुओं का संरक्षण
प्रमुख निर्देशपशु क्रूरता के नियमों का प्रभावी अनुपालन
योजनाउच्च न्यायालय के आदेश और गढ़वाल आयुक्त के निर्देशों के क्रम में तैयार

क्यों आवश्यक है यह संरक्षण योजना?

उच्च न्यायालय के आदेशों और गढ़वाल आयुक्त के निर्देशों के क्रम में प्रशासन ने अश्व वंशीय पशुओं के लिए एक व्यवस्थित योजना तैयार की है। जिलाधिकारी गौरव कुमार ने स्पष्ट किया कि यात्रा के दौरान इन पशुओं के साथ होने वाली क्रूरता को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अश्व वंशीय पशुओं के लिए क्या बदलाव होंगे?

  1. अस्तबल की व्यवस्था: पशुओं के लिए उचित आश्रय और अस्तबल की व्यवस्था को चाक-चौबंद किया जा रहा है।
  2. पेयजल की उपलब्धता: मार्ग पर पशुओं के लिए स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
  3. चिकित्सा सुविधा: किसी भी आपात स्थिति या स्वास्थ्य समस्या के लिए पशु चिकित्सा की तत्परता।
  4. नियमों का अनुपालन: पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के प्रावधानों को यात्रा मार्ग पर लागू करने के लिए हितधारकों को प्रशिक्षित किया गया है।

प्रशासन की दो टूक चेतावनी

जिलाधिकारी गौरव कुमार ने संबंधित विभागों के अधिकारियों और यात्रा में शामिल सभी हितधारकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे पशु क्रूरता नियमों का कड़ाई से पालन करें। उन्होंने कहा कि इन पशुओं का संरक्षण न केवल कानूनी अनिवार्यता है, बल्कि यह यात्रा की संवेदनशीलता का भी हिस्सा है। प्रशासन अब यात्रा मार्ग पर पशुओं की स्थिति की नियमित मॉनिटरिंग करेगा।

मानवीय संवेदना और धार्मिक यात्रा का संतुलन

हेमकुंड साहिब यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था का मार्ग भी है। इस मार्ग पर पशुओं के साथ क्रूरता रोकना प्रशासन की एक सराहनीय पहल है। इस कार्यशाला का आयोजन यात्रा के दौरान न केवल पशुओं को राहत देगा, बल्कि यात्रा के अनुभव को भी अधिक नैतिक और मानवीय बनाएगा।
आशा है कि प्रशासन के ये निर्देश धरातल पर पूरी तरह प्रभावी साबित होंगे।

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