सितारगंज (ऊधमसिंह नगर), 10 अप्रैल 2026: उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और सितारगंज पुलिस ने एक संयुक्त और हाई-वोल्टेज ऑपरेशन के दौरान हथियारों के एक बड़े जखीरे के साथ दो शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ऊधमसिंह नगर गणेश गणपति ने सितारगंज में आयोजित प्रेसवार्ता में इस सनसनीखेज मामले का खुलासा किया।
एसटीएफ की इस कार्यवाही को ‘ऑपरेशन आर्म्स ब्रेक’ का नाम दिया गया है। पुलिस को संदेह है कि बरामद हथियारों का इस्तेमाल किसी बड़ी आपराधिक वारदात या टारगेट किलिंग के लिए किया जाना था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस मामले के तार जम्मू-कश्मीर के आतंकी संगठनों से जुड़े होने की भी आशंका जताई जा रही है।
'ऑपरेशन आर्म्स ब्रेक' की बड़ी बरामदगी और विवरण
| विवरण | जब्त सामान एवं जानकारी (Items Seized & Details) |
| गिरफ्तार आरोपी | 1. हरेन्द्र सिंह उर्फ हनी, 2. निखिल उर्फ रानू |
| बरामद हथियार | 2 पोनिया (12 बोर रायफल), 1 रिवाल्वर (32 बोर), 2 तमंचे |
| कारतूसों का भंडार | सैकड़ों की संख्या में जिंदा कारतूस और खोखा कारतूस |
| वाहन | बिना नंबर प्लेट की सफेद स्विफ्ट कार (कब्जे में) |
| अन्य बरामदगी | मोबाइल फोन, नकदी और संदिग्ध दस्तावेज |
| संभावित कनेक्शन | जम्मू-कश्मीर के आतंकी संगठनों से जुड़े होने की जांच जारी |
घेराबंदी के दौरान भागने की कोशिश, कीचड़ में फंसी कार
एसएसपी गणेश गणपति ने बताया कि मुखबिर की सटीक सूचना पर एसटीएफ और पुलिस की संयुक्त टीम ने सिडकुल क्षेत्र के लेबर चौक से आगे कच्चे रास्ते पर घेराबंदी की थी। इसी दौरान एक बिना नंबर प्लेट की सफेद स्विफ्ट कार आती दिखी। पुलिस ने जब उसे रुकने का इशारा किया, तो कार सवार बदमाशों ने भागने का प्रयास किया।
चूंकि क्षेत्र में बारिश के कारण कच्चा रास्ता कीचड़ से भरा था, इसलिए बदमाशों की गाड़ी वहीं फंस गई। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए घेराबंदी की और कार सवार दोनों आरोपियों—हरेन्द्र सिंह उर्फ हनी और निखिल उर्फ रानू—को मौके पर ही दबोच लिया।
जंगल में हथियारों को ठिकाने लगाने की थी योजना
पुलिस द्वारा कार और बदमाशों के पास मौजूद बैगों की तलाशी ली गई, तो अधिकारियों के भी होश उड़ गए। कार के भीतर से दो 12 बोर की पोनिया राइफलें, एक 32 बोर की रिवाल्वर, दो तमंचे और सैकड़ों की संख्या में कारतूस बरामद हुए।
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्हें पुलिस की दबिश का डर था, इसलिए वे इस हथियारों के जखीरे को चोरगलिया के जंगल में छिपाने जा रहे थे। आरोपियों के पास इन हथियारों का कोई वैध लाइसेंस नहीं था। पुलिस ने तत्काल आर्म्स एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।
आतंकी संगठनों से तार जुड़े होने की आशंका: हाई-लेवल जांच जारी
इस खुलासे का सबसे गंभीर पहलू हथियारों के स्रोत और उनके गंतव्य से जुड़ा है। एसएसपी ने बताया कि शुरुआती जांच में कुछ ऐसे सुराग मिले हैं जो संकेत देते हैं कि इस नेटवर्क के तार जम्मू-कश्मीर के किसी आतंकी संगठन से जुड़े हो सकते हैं।
इस इनपुट के मिलते ही पुलिस की विभिन्न जांच एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के पीछे छिपे मास्टरमाइंड को खंगाल रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हथियारों की यह बड़ी खेप कहां से आई थी और इसे किसे सप्लाई किया जाना था। आशंका जताई जा रही है कि यदि समय रहते यह ऑपरेशन न होता, तो उत्तराखंड या पड़ोसी राज्यों में कोई बड़ी अनहोनी घट सकती थी।
पुलिस टीम की सराहना और भविष्य की कार्यवाही
एसटीएफ की इस बड़ी कार्रवाई के बाद पूरे ऊधमसिंह नगर जिले में हड़कंप मच गया है। इस सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम में सीओ सितारगंज भूपेंद्र सिंह धौनी, कोतवाल सुंदरम शर्मा, एसओजी प्रभारी उमेश कुमार और चौकी प्रभारी सिडकुल जगत सिंह शाही सहित कई जांबाज पुलिसकर्मी शामिल रहे।
एसएसपी गणेश गणपति ने कहा कि पुलिस इस नेटवर्क के अन्य संभावित साथियों की तलाश में जुटी है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे हो सकते हैं। आरोपियों के मोबाइल डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स को भी खंगाला जा रहा है ताकि उनके संपर्कों की पूरी चैन का पता लगाया जा सके।
'ऑपरेशन आर्म्स ब्रेक' के माध्यम से उत्तराखंड पुलिस ने अपराधियों और उनके आकाओं को कड़ा संदेश दिया है। हथियारों के इस जखीरे की बरामदगी और संभावित आतंकी लिंक की जांच सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि है। पुलिस की मुस्तैदी ने निश्चित रूप से एक बड़े रक्तपात को टाल दिया है।
