डिजिटल हेल्थ क्रांति: स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन को बताया भविष्य; प्रदेशवासियों से ABHA ID बनाने की अपील


Aapki Media AI


देहरादून, 10 अप्रैल 2026: उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने 'आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन' (ABDM) को राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में मील का पत्थर बताया है। देहरादून में आयोजित ABDM-Uttarakhand कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन "नए भारत की नई उड़ान" के तहत यह मिशन देश में डिजिटल स्वास्थ्य क्रांति का आधार बन चुका है।

स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन को बताया भविष्य

स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम न केवल पारदर्शिता लाएगा, बल्कि दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंच को भी सुलभ बनाएगा। उन्होंने राज्य के प्रत्येक नागरिक से अपनी ABHA ID (Ayushman Bharat Health Account) बनाने का आह्वान किया।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM): एक नजर में

विवरणमहत्वपूर्ण आंकड़े एवं तथ्य (Key Data & Facts)
राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति50 करोड़ से अधिक ABHA ID अब तक बनाई जा चुकी हैं।
अग्रणी राज्यकर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात।
मुख्य लाभस्वास्थ्य रिकॉर्ड का डिजिटल संग्रहण, टेलीमेडिसिन और ऑनलाइन परामर्श।
उत्तराखंड की स्थितिलाखों नागरिकों की ABHA ID तैयार; सरकारी एवं निजी अस्पताल डिजिटल प्लेटफॉर्म से संबद्ध।
पर्वतीय क्षेत्रों हेतु लाभदूरी और संसाधनों की कमी को खत्म कर घर बैठे विशेषज्ञ परामर्श।

स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और सुलभता

कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि डिजिटल हेल्थ मिशन स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बना रहा है। अब मरीजों को अपने पुराने पर्चे, एक्सरे या रिपोर्ट को भौतिक रूप से साथ ले जाने की जरूरत नहीं होगी। ABHA ID के माध्यम से सारा डेटा डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा, जिसे मरीज की सहमति से देशभर के किसी भी अस्पताल या डॉक्टर द्वारा देखा जा सकेगा।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड जैसे विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य के लिए टेलीमेडिसिन वरदान साबित हो रही है। डिजिटल माध्यम से अब दूरी और संसाधनों की सीमाएं बाधा नहीं बन रही हैं। दुर्गम गांवों में बैठा व्यक्ति भी आधुनिक तकनीक के जरिए बड़े शहरों के विशेषज्ञों से जुड़ रहा है।

क्या है ABHA ID और यह क्यों जरूरी है?

स्वास्थ्य मंत्री ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि वे इस डिजिटल क्रांति का हिस्सा बनें। ABHA ID बनाने के कई महत्वपूर्ण लाभ हैं:

  1. सुरक्षित मेडिकल हिस्ट्री: आपकी पूरी स्वास्थ्य जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रहती है।
  2. कहीं भी, कभी भी पहुंच: देशभर के अस्पतालों और लैब से जुड़ने की सुविधा।
  3. पेपरलेस उपचार: बार-बार पुरानी फाइलें ढोने के झंझट से मुक्ति।
  4. ऑनलाइन परामर्श: विशेषज्ञ डॉक्टरों से वीडियो कॉल या डिजिटल माध्यम से सलाह लेने में आसानी।

उत्तराखंड में डिजिटल मिशन की रफ्तार

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के डैशबोर्ड का हवाला देते हुए मंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में लाखों की संख्या में ABHA ID बनाई जा चुकी हैं। राज्य सरकार अब निजी अस्पतालों को भी इस नेटवर्क से तेजी से जोड़ रही है। उन्होंने कहा कि यह मिशन "विकसित भारत" और "विकसित उत्तराखंड" के संकल्प को नई गति प्रदान कर रहा है।

कार्यशाला के दौरान विभाग के आला अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे ग्राम स्तर तक जागरूकता अभियान चलाएं ताकि प्रत्येक परिवार इस डिजिटल आईडी का लाभ उठा सके। विशेष रूप से आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य मित्रों को इस कार्य में और गति लाने को कहा गया है।

स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल का संदेश

कार्यशाला के अंत में मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा:

"डिजिटल हेल्थ मिशन केवल तकनीक नहीं, बल्कि जन-सेवा का एक सशक्त माध्यम है। हम उत्तराखंड को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक आधुनिक राज्य बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। मेरा प्रदेश की जनता से अनुरोध है कि वे आज ही अपनी ABHA ID बनवाएं। यह आपकी और आपके परिवार की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।"

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत उत्तराखंड सरकार की यह सक्रियता आने वाले समय में राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को पूरी तरह बदल देगी। यदि आपने अभी तक अपनी ABHA ID नहीं बनाई है, तो नजदीकी सरकारी अस्पताल या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से इसे तुरंत बनवाएं और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाएं।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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