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रामपुर तिराहा (मुजफ्फरनगर/देहरादून), 02 अक्टूबर, 2026: पृथक राज्य आंदोलन के काले अध्याय यानी 'रामपुर तिराहा कांड' की बरसी पर शुक्रवार, 2 अक्टूबर, 2026 को उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के कार्यकर्ताओं और शीर्ष नेतृत्व का बड़ा जत्था रामपुर तिराहा स्मारक पहुँचा।
दल के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेन्द्र कुकरेती और पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष व पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी के नेतृत्व में उक्रांद पदाधिकारियों ने अमर शहीदों के स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके अमर बलिदान को नमन किया। इस दौरान उक्रांद नेताओं ने राज्य सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य केवल औपचारिक श्रद्धांजलि कार्यक्रमों तक सीमित रह गया है, जबकि शहीदों की मूल भावनाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उक्रांद अध्यक्ष सुरेन्द्र कुकरेती व पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी के कड़े बोल
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय नेताओं ने राज्य की स्थिति पर चिंता व्यक्त की:
- सुरेन्द्र कुकरेती (केंद्रीय अध्यक्ष): उन्होंने कहा कि रामपुर तिराहा के अमर शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी दी जा सकती है, जब उत्तराखण्ड में मूल निवास (1950), सख्त भू-कानून, रोजगार सृजन, पलायन पर रोक और प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय नागरिकों के अधिकारों को संवैधानिक रूप से सुरक्षित किया जाएगा। उन्होंने युवाओं से उक्रांद के साथ लामबंद होकर राज्य के हितों की लड़ाई लड़ने की अपील की।
- पुष्पेश त्रिपाठी (पूर्व विधायक): उन्होंने 2 अक्टूबर को राज्य के इतिहास का काला दिन करार देते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान सरकारें शराब और खनन माफिया के हितों में समय बिता रही हैं, जबकि युवाओं के भविष्य और रोजगार की उपेक्षा हो रही है। उन्होंने राज्य की अर्थव्यवस्था को माफिया तंत्र से मुक्त कराने की मांग उठाई।
रामपुर तिराहा शहीद श्रद्धांजलि 2026: नीतिगत व राजनीतिक विवरण
2 अक्टूबर, 2026 को रामपुर तिराहा पर आयोजित कार्यक्रम का संकलित ब्योरा:
| राजनीतिक व नीतिगत घटक | उक्रांद नेताओं द्वारा उठाई गई मांगें व संदेश | नोडल वक्ता व दल | प्रादेशिक व राज्य आंदोलन प्रभाव |
| आयोजन का नाम | रामपुर तिराहा कांड शहीद स्मृति दिवस | उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) | राज्य आंदोलन के मूल सपनों की पुनर्स्थापना। |
| मुख्य नेतृत्व | सुरेन्द्र कुकरेती (केंद्रीय अध्यक्ष), पुष्पेश त्रिपाठी (पूर्व विधायक) | स्थान: रामपुर तिराहा (2 अक्टूबर 2026) | युवाओं को क्षेत्रीय राजनीति में लामबंद करने का आह्वान। |
| प्रादेशिक मांगें | • मूल निवास एवं सख्त भू-कानून लागू करना • प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय अधिकार | उक्रांद केंद्रीय कार्यकारिणी | माफिया तंत्र पर अंकुश और रोजगार सृजन की मांग। |
| नीतिगत आलोचना | केवल 'औपचारिक श्रद्धांजलि' तक सीमित रहने का आरोप | पुष्पेश त्रिपाठी व गणेश काला | राज्य की वित्तीय व विकास नीतियों में बदलाव की पैरवी। |
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित प्रमुख पदाधिकारी
इस अवसर पर केंद्रीय महामंत्री संगठन गणेश काला, केंद्रीय उपाध्यक्ष बहादुर सिंह रावत, मोहन असवाल, कर्नल सुनील कोटनाला, कार्यालय प्रभारी देव चंद उत्तराखंडी, महामंत्री कुंवर प्रताप सिंह, राजेंद्र बिष्ट, कर्नल कैलाश देवरानी, रमा चौहान, राजेश्वरी रावत, सैनिक प्रकोष्ठ अध्यक्ष महिपाल सिंह पुंडीर, सह मीडिया प्रभारी विजेंद्र रावत व प्रकाश भट्ट, पछवादून जिलाध्यक्ष आनंद सिंह राणा, उत्तरकाशी जिलाध्यक्ष बिहारी लाल जगूड़ी, रुड़की जिलाध्यक्ष दीपक लखवान, महर सिंह सैनी, ऋतु कंडियाल, जुयाल आनंद राज, दिनेश दिमान, शिव कुमार सैनी, नितिन सैनी, हरिद्वार जिलाध्यक्ष गोकुल रावत सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
शहीदों के सपनों के उत्तराखंड हेतु उक्रांद के 4 मुख्य बिंदु
उक्रांद द्वारा रेखांकित राज्य निर्माण के मुख्य नीतिगत आयाम:
- मूल निवास व सख्त भू-कानून: हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर राज्य की जमीनों की सुरक्षा हेतु सख्त कानून और मूल निवासियों के अधिकार सुनिश्चित करना।
- पलायन रोधी रोजगार नीति: पहाड़ों से युवाओं के रिवर्स-माइग्रेशन हेतु रोजगार और स्वरोजगार के स्थायी अवसर।
- संसाधनों पर स्थानीय अधिकार: जल, जंगल और जमीन पर राज्य आंदोलनकारियों और स्थानीय निवासियों की प्राथमिकता।
- पारदर्शी व माफिया-मुक्त सुशासन: खनन और आबकारी नीतियों में पारदर्शिता लाकर युवाओं के हितों को प्राथमिकता देना।
शहीदों की विरासत और राज्य के भविष्य की लड़ाई
2 अक्टूबर, 2026 को रामपुर तिराहा पर उक्रांद का यह जमावड़ा केवल एक श्रद्धांजलि सभा नहीं, बल्कि राज्य के मूल मुद्दों—भू-कानून, मूल निवास और युवा रोजगार पर सरकार को घेरने का एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश है। दल ने संकल्प दोहराया है कि वे शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे।