देहरादून, 23 फरवरी 2026 : उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में इन दिनों प्रशासनिक कार्यप्रणाली में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में जिला प्रशासन न केवल कार्यालयों तक सीमित है, बल्कि सीधे जनता के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान कर रहा है। सोमवार का दिन देहरादून के नागरिकों के लिए विशेष रहा, जहाँ एक ओर कलेक्ट्रेट के ऋषिपर्णा सभागार में 'जनता दर्शन' के माध्यम से सैकड़ों चेहरों पर मुस्कान लौटी, वहीं दूसरी ओर कोरोनेशन अस्पताल के निरीक्षण ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया। मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप 'सरलीकरण, समाधान और निस्तारण' के मंत्र को धरातल पर उतारते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्ट कर दिया है कि जनहित के कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जनता दर्शन में उमड़ा जनसैलाब और न्याय की तत्काल गारंटी
ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में सोमवार को फरियादियों की भारी भीड़ देखी गई। जिले के दूर-दराज के क्षेत्रों से कुल 191 फरियादी अपनी समस्याओं की पोटली लेकर जिलाधिकारी के पास पहुंचे। इस दौरान भूमि विवाद, अवैध कब्जे, आर्थिक सहायता और शिक्षा से जुड़े गंभीर मामले सामने आए। जिलाधिकारी ने प्रत्येक शिकायतकर्ता की बात को न केवल सुना, बल्कि मौके पर उपस्थित अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए फाइलों को आगे बढ़ाने के बजाय समाधान पर जोर दिया। इस मंच ने एक बार फिर साबित किया कि जब प्रशासन संवेदनशील हो, तो आम आदमी का सरकारी तंत्र पर विश्वास और अधिक मजबूत होता है।
नंदिता की शिक्षा और विधवा महिलाओं के लिए संबल बना प्रशासन
जनता दर्शन के दौरान मानवीय संवेदनाओं के कई उदाहरण देखने को मिले। धर्मपुर निवासी विधवा पिंकी सैनी जब अपनी बेटी नंदिता की पढ़ाई छूटने के डर से भावुक हुईं, तो जिलाधिकारी ने तत्काल जिला कार्यक्रम अधिकारी को 'प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा' के तहत सहायता राशि स्वीकृत करने के निर्देश दिए। इसी तरह, नालापानी चौक की बुजुर्ग विधवा सुनीता शर्मा, जो अपनों की ही प्रताड़ना झेल रही थीं, उनके मामले में डीएम ने एसडीएम को भरण-पोषण अधिनियम के तहत तत्काल वाद दर्ज करने का आदेश दिया। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश दिया कि असहाय और निर्बल वर्ग के लिए सरकार और प्रशासन एक मजबूत ढाल की तरह खड़ा है।
शिक्षा के अधिकार पर कड़ा प्रहार और स्कूलों को सख्त हिदायत
शिक्षा के क्षेत्र में आ रही बाधाओं को लेकर भी जिलाधिकारी का रुख अत्यंत सख्त रहा। चन्द्रबनी की बविता सिंह और विन्दाल की अलीशा खत्री के मामलों ने निजी स्कूलों की मनमानी को उजागर किया। जब डीएम को पता चला कि फीस जमा न होने के कारण बच्चों की टीसी रोकी जा रही है या उन्हें परीक्षा में बैठने से वंचित किया जा रहा है, तो उन्होंने मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) को तत्काल हस्तक्षेप करने के निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि आर्थिक तंगी किसी भी बच्चे के भविष्य के आड़े नहीं आनी चाहिए और ऐसे बच्चों का प्रवेश निकटवर्ती राजकीय विद्यालयों में सुनिश्चित किया जाए।
कोरोनेशन अस्पताल में डीएम का छापा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े निर्णय
जनता दर्शन के पश्चात जिलाधिकारी सविन बंसल सीधे जिला चिकित्सालय कोरोनेशन पहुंचे, जहाँ उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं का बारीकी से जायजा लिया। अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में मरीजों की लंबी कतार देख उन्होंने तत्काल लैब का समय एक घंटा बढ़ाने का निर्णय लिया। इसके साथ ही अनुबंध के अनुसार कार्य न करने वाली चंदन लैब के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए पिछले तीन महीने की रिपोर्ट तलब की और भुगतान रोकने की चेतावनी दी। अस्पताल की मरम्मत और मूलभूत सुविधाओं के लिए उन्होंने मौके पर ही 10 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की, ताकि किचन, ओपीडी और गायनी वार्ड की स्थिति में सुधार किया जा सके।
बाल वार्ड को मोबाइल मुक्त बनाने की अभिनव पहल
अस्पताल निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक सरोकार भी निभाया। बाल चिकित्सा वार्ड में बच्चों को मोबाइल फोन में व्यस्त देख उन्होंने चिंता व्यक्त की और अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए कि वार्ड में छोटी लाइब्रेरी और ड्राइंग-कलर्स की व्यवस्था की जाए। उन्होंने अभिभावकों से भी संवाद किया और बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने की अपील की। इसके अतिरिक्त, निर्माणाधीन ब्लड बैंक को 15 मार्च तक पूर्ण करने और जीवन रक्षक दवाओं का स्टॉक अनिवार्य रूप से बनाए रखने के निर्देश दिए गए, ताकि मरीजों को बाहर की दवाओं पर निर्भर न रहना पड़े।
विकास कार्यों की समीक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर जोर
केवल तात्कालिक समस्याओं तक ही सीमित न रहते हुए जिलाधिकारी ने जिले के विकास कार्यों की भी समीक्षा की। क्यारा-धनोल्टी मोटर मार्ग निर्माण में हो रही देरी को लेकर उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। 15 गांवों की कनेक्टिविटी से जुड़े इस प्रोजेक्ट को लेकर प्रशासन अब गंभीर है। इसके साथ ही बुजुर्गों की भूमि पैमाइश और अतिक्रमण की शिकायतों पर तहसीलदारों को मौके पर जाकर जांच करने के आदेश दिए गए। जिलाधिकारी की इस 'एक्शन मोड' वाली कार्यशैली ने देहरादून में सुशासन की एक नई इबारत लिख दी है, जिससे जनमानस में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ है।
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