देहरादून मर्डर मिस्ट्री: जिम में रेकी, नोएडा में साजिश और देहरादून में कत्ल; विक्रम शर्मा हत्याकांड की पूरी इनसाइड स्टोरी

देहरादून | 23 फरवरी, 2026 : उत्तराखंड की शांत वादियों में बसे देहरादून का डालनवाला क्षेत्र उस समय गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठा, जब सिल्वर सिटी मॉल के बाहर झारखंड के कुख्यात अपराधी विक्रम शर्मा की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। यह महज एक अचानक हुई वारदात नहीं थी, बल्कि इसके पीछे तीन राज्यों—झारखंड, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड—तक फैला एक ऐसा मकड़जाल था, जिसे भेदने में पुलिस को अपनी पूरी ताकत झोंकनी पड़ी। देहरादून पुलिस और एसटीएफ के संयुक्त प्रयासों से अब इस सनसनीखेज हत्याकांड की ऐसी परतें खुली हैं, जो किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं हैं। 

विक्रम शर्मा हत्याकांड की पूरी इनसाइड स्टोरी

वर्चस्व की जंग और पुरानी रंजिश का खूनी अंजाम

मृतक विक्रम शर्मा, जो मूल रूप से झारखंड का निवासी था, कोई साधारण व्यक्ति नहीं था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वह एक कुख्यात अपराधी था जिस पर हत्या, रंगदारी और जानलेवा हमले जैसे दर्जनों संगीन मामले दर्ज थे। अपराध की दुनिया में अपना नाम बनाने की चाहत रखने वाले आशुतोष सिंह और जेल में हुए अपमान का बदला लेने के लिए बेताब विशाल सिंह ने मिलकर विक्रम को रास्ते से हटाने की कसम खाई थी।

विशाल सिंह जब जेल में बंद था, तब उसका विवाद विक्रम शर्मा के किसी करीबी से हो गया था। आरोप है कि विक्रम ने जेल के भीतर अपने गुर्गों के जरिए विशाल को काफी प्रताड़ित करवाया था। इसी अपमान की आग ने इस हत्या की पटकथा लिखी। आशुतोष, जो अपराध जगत में अपनी धाक जमाना चाहता था, उसे पता था कि विक्रम जैसे 'बड़े खिलाड़ी' को खत्म करके वह रातों-रात चर्चा में आ जाएगा।

 

महीनों की रेकी और हत्या का 'ब्लूप्रिंट'

इस हत्याकांड की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हत्यारों ने विक्रम शर्मा को मारने के लिए महीनों तक उसका पीछा किया। योजना के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • विफल प्रयास और स्थान का चुनाव: अभियुक्तों ने सबसे पहले विक्रम को उसके गृह जनपद जमशेदपुर में मारने की कोशिश की, लेकिन वहां वह हमेशा समर्थकों की भारी भीड़ से घिरा रहता था। इसके बाद शूटरों ने नोएडा को अपना केंद्र बनाया, वहां एक फ्लैट भी किराए पर लिया, लेकिन वहां भी मौका नहीं मिल सका।
  • जिम में 'गुप्त' एंट्री: जब उन्हें पता चला कि विक्रम देहरादून में रह रहा है, तो साजिश में शामिल अंकित वर्मा ने उसी जिम को ज्वाइन कर लिया जहां विक्रम कसरत के लिए जाता था। लगभग 3 महीने तक अंकित ने विक्रम की हर छोटी-बड़ी गतिविधि, उसके आने-जाने के समय और सुरक्षा की रेकी की।
  • हत्या का दिन: घटना के दिन अंकित जिम के भीतर मौजूद था। जैसे ही उसने देखा कि विक्रम जाने के लिए तैयार है, उसने तुरंत बाहर खड़े शूटरों (आशुतोष और विशाल) को सिग्नल दिया। जिम से बाहर निकलते ही विक्रम पर गोलियों की बौछार कर दी गई।

फरारी का रास्ता: रेंट की स्कूटी से स्कार्पियो तक

हत्याकांड को अंजाम देने के बाद शूटरों ने भागने के लिए बहुत ही शातिर तरीका अपनाया। उन्होंने पुलिस को चकमा देने के लिए अपनी गाड़ियों का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि हरिद्वार से फर्जी आईडी पर रेंट पर ली गई स्कूटी और बाइक का सहारा लिया।

  • वाहन बदलना: शूटर देहरादून से भागकर सहस्त्रधारा रोड पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी बाइक खड़ी की और पहले से वहां मौजूद दूसरी रेंटेड स्कूटी और बाइक से हरिद्वार की ओर निकल गए।
  • स्कार्पियो और नोएडा कनेक्शन: हरिद्वार में उन्होंने रेंटेड गाड़ियां वापस कीं और वहां पहले से पार्क की गई काली स्कार्पियो (JH-05-DZ-5517) लेकर ग्रेटर नोएडा फरार हो गए। यह गाड़ी जमशेदपुर के व्यवसायी यशराज की थी, जो खुद विक्रम शर्मा की रंगदारी से परेशान था और इस साजिश में शामिल था।
  • पनाहगार: नोएडा में इन हत्यारों को बीबीए छात्र मोहित उर्फ अक्षत ठाकुर ने अपने फ्लैट पर पनाह दी। उसने न केवल गाड़ी छिपाने में मदद की, बल्कि शूटरों के खाने-पीने और रुकने का पूरा इंतजाम भी किया।

पुलिस की कार्रवाई और अब तक की गिरफ्तारियां

एसएसपी देहरादून प्रमेन्द्र सिंह डोभाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कई टीमें गठित की थीं। सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल सर्विलांस के माध्यम से पुलिस के हाथ स्कार्पियो और रेंटेड स्कूटी के सुराग लगे, जिसके बाद कड़ियां जुड़ती चली गईं।

गिरफ्तार अभियुक्त:

  1. राजकुमार: (जमशेदपुर से गिरफ्तार) - इसने साजिश में वाहन और अन्य संसाधन उपलब्ध कराए।
  2. अक्षत ठाकुर: (ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार) - हत्यारों को शरण दी और स्कार्पियो बरामद करवाई।

वांछित अपराधी (25-25 हजार का इनाम घोषित): पुलिस ने मुख्य शूटरों आशुतोष सिंह, विशाल सिंह, रेकी करने वाले अंकित वर्मा, आकाश कुमार, यशराज और जितेंद्र साहु पर इनाम घोषित कर दिया है। पुलिस की टीमें झारखंड और दिल्ली-एनसीआर में लगातार छापेमारी कर रही हैं।

विक्रम शर्मा हत्याकांड ने यह साफ कर दिया है कि अपराधी अब भौगोलिक सीमाओं को पार कर किसी भी राज्य में जाकर वारदात को अंजाम दे रहे हैं। हालांकि, देहरादून पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश भी दिया है कि कानून के हाथ बहुत लंबे हैं। उत्तराखंड पुलिस ने जिस तरह से झारखंड से लेकर नोएडा तक के तार जोड़कर इस केस का खुलासा किया है, वह काबिले तारीफ है। अब नजरें मुख्य शूटरों की गिरफ्तारी पर टिकी हैं, जिससे इस गैंग के अन्य राज भी सामने आ सकेंगे।

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