ऋषिकेश, 27 मार्च 2026: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश में राजभाषा हिंदी के उत्तरोत्तर विकास और राजकीय कार्यों में इसके अधिकाधिक उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक भव्य एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। गृह मंत्रालय, भारत सरकार के राजभाषा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन में आयोजित इस कार्यशाला में संस्थान के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने जोर दिया कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि हमारे कार्यालयी कार्यों को सरल और सुगम बनाने का एक सशक्त माध्यम है।
एम्स हिंदी कार्यशाला 2026: एक झलक
| मुख्य विवरण | जानकारी (Event Details) |
| आयोजक संस्थान | एम्स (AIIMS), ऋषिकेश |
| मुख्य अतिथि | प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह, निदेशक एम्स ऋषिकेश |
| अतिथि वक्ता | डॉ. नरेन्द्र कुमार जगूड़ी एवं श्री वीरेंद्र सिंह राणा |
| आयोजन का उद्देश्य | राजकीय कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना |
| विशेष आकर्षण | हिंदी क्विज प्रतियोगिता और पुरस्कार वितरण |
कार्यालयी कार्यों में हिंदी की स्वीकार्यता और चुनौतियां
- भव्य शुभारंभ: कार्यशाला का उद्घाटन संस्थान की निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह, प्रभारी अधिकारी (राजभाषा) मुकेश पाल और अतिथि वक्ताओं ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। निदेशक ने अपने संबोधन में हिंदी को भारतीय संस्कृति का आधार बताते हुए इसे कार्यप्रणाली में ढालने की अपील की।
- संस्कृति से जुड़ाव: मुख्य वक्ता डॉ. नरेन्द्र कुमार जगूड़ी (सहायक समन्वयक, उत्तराखण्ड मुक्त विद्यालय) ने प्रतिभागियों को बताया कि हिंदी हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है। उन्होंने कार्यालयी फाइलों और पत्राचार में आने वाली भाषायी चुनौतियों के समाधान के व्यावहारिक तरीके साझा किए।
- व्यवहार में हिंदी: अतिथि वक्ता श्री वीरेन्द्र सिंह राणा (सेवानिवृत्त हिंदी अधिकारी, FCI) ने हिंदी की स्वीकार्यता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब हम मानसिक रूप से हिंदी को अपनाएंगे, तभी इसके प्रयोग में निरंतरता आएगी।
- मातृभाषा की श्रीवृद्धि: उप निदेशक (प्रशासन) ले. कर्नल गोपाल मेहरा ने कहा कि हिंदी का विकास केवल औपचारिक आयोजनों से नहीं, बल्कि इसे रोजमर्रा के आचार-व्यवहार और सरकारी कार्यों में शामिल करने से होगा। उन्होंने भाषायी सर्वांगीण विकास के लिए सतत प्रयास की आवश्यकता बताई।
- टीम की सराहनीय भूमिका: आयोजन को सफल बनाने में हिंदी सेल के वरिष्ठ अनुवाद अधिकारी शशि यादव, कनिष्ठ अनुवाद अधिकारी नीरज कुमार वर्मा, सुश्री स्वाति कैंतुरा और मंजीत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- क्विज और पुरस्कार: कार्यशाला के अंतिम सत्र में राजभाषा पर आधारित एक क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई। विजेताओं को सम्मानित अतिथियों द्वारा पुरस्कृत किया गया, जिससे कर्मचारियों में हिंदी के प्रति रुचि और उत्साह का संचार हुआ।
राजभाषा के प्रति नई चेतना
एम्स ऋषिकेश में आयोजित इस कार्यशाला ने कार्मिकों के बीच न केवल हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़ाई, बल्कि तकनीकी और प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग को लेकर झिझक को भी दूर किया। संस्थान का यह कदम 'डिजिटल इंडिया' के युग में अपनी भाषा के गौरव को पुनर्स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर है।
