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देहरादून, 11 मई, 2026: उत्तराखंड की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटे 'अंतिम गांवों' को अब देश के 'पहले गांवों' के रूप में विकसित करने की मुहिम तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप, राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' (Vibrant Village Program) के विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
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| अनुराधा पाल अपर सचिव/आयुक्त ग्रामीण विकास |
ग्रामीण विकास विभाग की अपर सचिव और आयुक्त अनुराधा पाल ने सचिवालय में मीडिया को संबोधित करते हुए जानकारी दी कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को एक औपचारिक प्रस्ताव और ज्ञापन भेजा है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य वर्तमान में चयनित गांवों के विकास लक्ष्य (Saturation) को प्राप्त करने के बाद, शेष सीमांत गांवों को भी इस योजना के दायरे में लाना है। यह कदम न केवल सीमावर्ती क्षेत्रों से हो रहे पलायन को रोकने में मददगार साबित होगा, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी भारत की सीमाओं को और अधिक सशक्त बनाएगा।
वाइब्रेंट विलेज योजना: अब तक की प्रगति और विस्तार की जरूरत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई 'वाइब्रेंट विलेज' योजना का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और वहां पर्यटन व स्वरोजगार के अवसर पैदा करना है। उत्तराखंड के चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जैसे जिलों के कई गांव इस योजना के पहले चरण में शामिल हैं।
विस्तार का प्रस्ताव क्यों?
अपर सचिव अनुराधा पाल ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में जिन गांवों का चयन किया गया है, वहां विकास कार्य तेजी से पूर्णता की ओर हैं। राज्य सरकार चाहती है कि इस विकास की लहर केवल कुछ चुनिंदा गांवों तक सीमित न रहे।
- संतृप्तीकरण (Saturation): जब पहले चरण के गांवों में सड़क, बिजली, पानी और इंटरनेट जैसी सुविधाएं 100% उपलब्ध हो जाएंगी, तब उसी अनुभव और मॉडल को अन्य सीमांत गांवों पर लागू किया जाएगा।
- ज्ञापन की मुख्य मांग: केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया है कि उत्तराखंड के उन दूरस्थ गांवों को भी सूची में जोड़ा जाए जो अंतरराष्ट्रीय सीमा से बेहद करीब हैं और जहां अभी भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
MBADP और BADP: विकास का दोहरा इंजन
अनुराधा पाल ने बैठक के दौरान राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे अन्य कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार केवल वाइब्रेंट विलेज योजना पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि MBADP (मल्टी-सेक्टरल बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम) के माध्यम से भी उन ब्लॉकों में काम कर रही है जो पहले BADP (बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम) के दायरे में नहीं आ पा रहे थे।
कार्यक्रमों का तुलनात्मक विवरण
| योजना का नाम | मुख्य उद्देश्य | लक्षित क्षेत्र |
| वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम | बुनियादी ढांचा, पर्यटन और स्वरोजगार | चयनित सीमांत 'प्रथम' गांव |
| BADP | सीमावर्ती क्षेत्रों का समग्र विकास | सीमा से लगे ब्लॉक |
| MBADP | छूटे हुए ब्लॉकों में मल्टी-सेक्टरल विकास | वे क्षेत्र जो अन्य योजनाओं से वंचित थे |
| प्रस्तावित विस्तार | योजना का दायरा बढ़ाना | शेष सभी दूरस्थ सीमांत गांव |
सीमांत क्षेत्रों में विकास के प्राथमिकता वाले क्षेत्र
राज्य सरकार के प्रस्ताव में निम्नलिखित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने की बात कही गई है:
- कनेक्टिविटी (Road & Digital): सीमांत गांवों तक बारहमासी सड़कों का निर्माण और हाई-स्पीड इंटरनेट (5G) की सुविधा पहुँचाना।
- होमस्टे और पर्यटन: गांवों को पर्यटन हब के रूप में विकसित करना ताकि स्थानीय युवाओं को अपने ही घर में रोजगार मिल सके।
- पेयजल और बिजली: 'हर घर जल' अभियान के तहत शत-प्रतिशत संतृप्तीकरण और सौर ऊर्जा के माध्यम से निर्बाध बिजली आपूर्ति।
- स्वास्थ्य और शिक्षा: सीमावर्ती क्षेत्रों में आधुनिक स्वास्थ्य उप-केंद्रों और स्कूलों का सुदृढ़ीकरण।
सामरिक महत्व: पलायन रोकना है सबसे बड़ी चुनौती
उत्तराखंड की सीमाएं चीन और नेपाल से लगती हैं। इन क्षेत्रों से पलायन न केवल एक सामाजिक मुद्दा है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय है। खाली होते गांव 'घोस्ट विलेज' (Ghost Villages) बन रहे हैं।
अनुराधा पाल ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार राज्य के इस प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करेगी। यदि अधिक गांवों को वाइब्रेंट विलेज योजना में शामिल किया जाता है, तो लोग वापस अपने गांवों की ओर रुख करेंगे, जिससे सीमाओं पर 'मानवीय चौकसी' (Human Surveillance) मजबूत होगी।
प्रमुख अधिकारियों के बयान और भविष्य की रूपरेखा
- अनुराधा पाल (अपर सचिव): "हमारा लक्ष्य है कि सीमा का हर गांव आत्मनिर्भर बने। केंद्र को भेजा गया प्रस्ताव उत्तराखंड के सीमांत जनपदों की तस्वीर बदल देगा।"
- आगामी कदम: प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद, जिला प्रशासन के साथ मिलकर नए गांवों का सर्वे किया जाएगा और उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं के आधार पर 'विलेज एक्शन प्लान' तैयार किया जाएगा।
'प्रथम गांवों' की नई इबारत
'वाइब्रेंट विलेज' योजना के विस्तार का प्रस्ताव उत्तराखंड सरकार की दूरगामी सोच का परिचायक है। यह योजना केवल ईंट-पत्थर का निर्माण नहीं है, बल्कि यह सीमांत निवासियों के स्वाभिमान और सुरक्षा का प्रतीक है। यदि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को हरी झंडी देती है, तो उत्तराखंड के उन सैकड़ों गांवों में फिर से रौनक लौटेगी जो वर्षों से उपेक्षा के शिकार थे। नीतिगत सक्रियता और केंद्र-राज्य के बीच का यह तालमेल निश्चित रूप से उत्तराखंड को 'अग्रणी राज्य' बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
