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उत्तराखंड, जिसे हम 'देवभूमि' के नाम से जानते हैं, अब अपनी पारंपरिक खेती को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगा चुका है। सोमवार, 04 मई को देहरादून स्थित कैंप कार्यालय में एक ऐसा ऐतिहासिक कदम उठाया गया, जो राज्य के कृषि इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। सुबे के कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी ने नाबार्ड पॉलीहाउस योजना के अंतर्गत डिजिटल भुगतान प्रणाली (CBDC - Central Bank Digital Currency) के माध्यम से अनुदान वितरण प्रक्रिया का विधिवत शुभारंभ किया।
यह पहल केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'डिजिटल इंडिया' और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के 'विकसित उत्तराखंड' के संकल्प को धरातल पर उतारने का एक सशक्त माध्यम है। कृषि मंत्री ने इस दौरान किसानों के खातों में प्रतीकात्मक रूप से डिजिटल भुगतान कर इस अत्याधुनिक प्रणाली की शुरुआत की।
CBDC क्या है और यह किसानों के लिए क्यों जरूरी है?
सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी एक डिजिटल टोकन है। यह भौतिक नकदी का डिजिटल रूप है। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने स्पष्ट किया कि उद्यान विभाग ने एक अभिनव पहल करते हुए नाबार्ड की आरआईडीएफ (RIDF) योजना के तहत क्लस्टर आधारित छोटे पॉलीहाउस स्थापना योजना में शत-प्रतिशत पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इसे लागू किया है।
अक्सर देखा जाता है कि सरकारी योजनाओं में बिचौलियों या विलंब के कारण किसानों तक लाभ पहुँचने में कठिनाई होती है। CBDC वाउचर प्रणाली इस समस्या का जड़ से समाधान करती है।
पॉलीहाउस योजना: छोटी जोत वाले किसानों के लिए वरदान
उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहाँ बड़े खेत कम और छोटी जोत वाले किसान अधिक हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए नाबार्ड की आरआईडीएफ योजना के तहत 50 से 100 वर्गमीटर आकार के छोटे पॉलीहाउस के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
योजना की मुख्य विशेषताएं:
- बजट आवंटन: इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए सरकार को 304.43 करोड़ रुपये की भारी-भरकम स्वीकृति प्राप्त हुई है।
- अनुदान की राशि: सरकार किसानों को लागत का 80 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है।
- लक्ष्य: राज्य के हजारों किसानों को क्लस्टर आधारित खेती से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करना।
आवेदन से भुगतान तक: 'अपुणि सरकार' पोर्टल की भूमिका
मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि इस प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस और पारदर्शी बनाया गया है। इच्छुक किसान “अपुणि सरकार” पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करेंगे। इसके बाद की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से नीचे दी गई है:
- ऑनलाइन आवेदन: किसान को पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा।
- सत्यापन: उद्यान विभाग द्वारा आवेदन की जांच और स्थल सत्यापन किया जाएगा।
- वाउचर जारी करना: पात्र किसानों के मोबाइल पर डिजिटल वॉलेट के माध्यम से CBDC वाउचर भेजे जाएंगे।
- लॉक्ड स्टेटस: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पॉलीहाउस निर्माण कार्य पूर्ण होने और अंतिम सत्यापन तक यह राशि ‘लॉक्ड स्टेटस’ में रहेगी।
- अंतिम भुगतान: भौतिक सत्यापन के बाद ही यह राशि संबंधित पंजीकृत फर्म या कंपनी के खाते में स्थानांतरित होगी।
भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड: पारदर्शिता का नया मानक
कृषि मंत्री ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि इस नई व्यवस्था से धनराशि का दुरुपयोग रुक जाएगा। चूंकि वाउचर केवल निर्दिष्ट उद्देश्य (पॉलीहाउस निर्माण) के लिए ही भुनाया जा सकेगा, इसलिए यह सुनिश्चित होगा कि सरकारी पैसा सीधे लक्ष्य तक पहुँच रहा है। इसके अलावा, विभाग ने 25 अनुभवी फर्मों एवं कंपनियों को पंजीकृत किया है। किसान अपनी पसंद के अनुसार किसी भी फर्म से काम करा सकते हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और गुणवत्ता में सुधार होगा।
योजना का संक्षिप्त विवरण
| विवरण | विवरण विवरण |
| योजना का नाम | नाबार्ड आरआईडीएफ (RIDF) पॉलीहाउस योजना |
| मुख्य अतिथि | कृषि मंत्री गणेश जोशी |
| भुगतान माध्यम | CBDC (डिजिटल रुपया) वाउचर |
| कुल बजट | ₹ 304.43 करोड़ |
| अनुदान प्रतिशत | 80% तक |
| पॉलीहाउस का आकार | 50 से 100 वर्गमीटर |
| आवेदन पोर्टल | अपुणि सरकार (Apuni Sarkar) |
| पंजीकृत फर्म | 25 कंपनियां |
भविष्य की योजनाएं: सेब और कीवी मिशन में भी लागू होगा डिजिटल भुगतान
कृषि मंत्री यहीं नहीं रुकने वाले हैं। उन्होंने घोषणा की कि उद्यान विभाग के तहत सेब की अति सघन बागवानी (High-Density Apple Plantation) और कीवी नीति में भी इसी डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लागू किया जा रहा है।
उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि कृषि एवं उद्यान विभाग की जितनी भी अनुदान आधारित योजनाएं हैं, उनका भुगतान धीरे-धीरे पूरी तरह से CBDC के माध्यम से ही किया जाए। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि विभाग की कार्यप्रणाली में जवाबदेही भी बढ़ेगी।
किसानों के लिए प्रशिक्षण एवं जागरूकता
योजना का लाभ अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए मंत्री जी ने ब्लॉक स्तर तक व्यापक प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।
- जागरूकता अभियान: किसानों को डिजिटल वॉलेट चलाने और ऑनलाइन आवेदन करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
- तकनीकी सहायता: ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को किसानों की मदद के लिए तत्पर रहने को कहा गया है।
उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
इस गरिमामयी अवसर पर शासन और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें शामिल थे:
- डॉ. एस.एन. पांडेय (सचिव कृषि)
- सुंदर लाल सेमवाल (निदेशक उद्यान)
- आलोक कुमार पाण्डेय (निदेशक आईटीडीए)
- अभिनव कापड़ी (डीजीएम, नाबार्ड)
- आरबीआई, यूनियन बैंक और उद्यान विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी।
क्यों खास है यह पहल?
- पारदर्शिता: डिजिटल वाउचर सीधे लाभार्थी के वॉलेट में जाएंगे, जिससे बिचौलियों का हस्तक्षेप शून्य हो जाएगा।
- समयबद्धता: 'अपुणि सरकार' पोर्टल के जरिए प्रक्रिया में तेजी आएगी और फाइलों के रुकने का डर नहीं रहेगा।
- उचित उपयोग: वाउचर 'लॉक्ड' होने के कारण सब्सिडी का पैसा केवल पॉलीहाउस निर्माण पर ही खर्च हो सकेगा।
- किसानों की आय: हाई-टेक खेती (पॉलीहाउस) के माध्यम से किसान ऑफ-सीजन सब्जियां और फूल उगा सकेंगे, जिससे उन्हें बाजार में बेहतर दाम मिलेंगे।
- आर्थिक प्रगति: 304 करोड़ का निवेश ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकेगा और स्वरोजगार के अवसर पैदा करेगा।
उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी की यह पहल प्रदेश के किसानों के लिए एक नए युग की शुरुआत है। तकनीक के प्रयोग से जहाँ एक ओर सरकारी प्रक्रियाओं में सुगमता आई है, वहीं दूसरी ओर किसानों का सरकार के प्रति विश्वास भी बढ़ा है। प्रधानमंत्री के 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के सपने को यह डिजिटल कदम तेजी से आगे बढ़ा रहा है।
अब उत्तराखंड का किसान केवल 'अन्नदाता' ही नहीं बल्कि एक 'डिजिटल उद्यमी' भी बन रहा है। यदि आप भी एक कृषक हैं, तो आज ही 'अपुणि सरकार' पोर्टल पर जाकर इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन करें।
