देहरादून, 26 मार्च 2026: उत्तराखंड के लाखों अभिभावकों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य परिवहन प्राधिकरण (STA) ने प्रदेश में पहली बार स्कूल बस, टैक्सी और मैक्सी जैसे अनुबंध वाहनों के लिए मासिक किराया (Monthly Fare) निर्धारित कर दिया है। 25 मार्च 2026 को परिवहन आयुक्त बृजेश कुमार संत की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया।
अब राज्य के सभी निजी और सरकारी स्कूलों को सरकार द्वारा तय की गई इन दरों के अनुसार ही परिवहन शुल्क लेना होगा।
स्कूल बस मासिक किराया (प्रति छात्र)
नैनीताल हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद गठित समिति ने ईंधन, मेंटेनेंस और ड्राइवर के वेतन का अध्ययन कर निम्नलिखित दरें तय की हैं:
| दूरी (Distance) | निर्धारित मासिक शुल्क (Bus) |
| 01 से 10 किमी | ₹ 2,200 |
| 10 से 20 किमी | ₹ 2,700 |
| 20 से 30 किमी | ₹ 3,200 |
| 30 किमी से अधिक | ₹ 3,700 |
स्कूल वैन/टैक्सी/मैक्सी मासिक किराया (प्रति छात्र)
वैन और छोटी गाड़ियों के लिए भी स्पष्ट स्लैब निर्धारित किए गए हैं:
| दूरी (Distance) | निर्धारित मासिक शुल्क (Van/Taxi) |
| 01 से 05 किमी | ₹ 2,100 |
| 05 से 10 किमी | ₹ 2,500 |
| 10 से 20 किमी | ₹ 3,000 |
| 20 किमी से अधिक | ₹ 3,500 |
1. हाईकोर्ट के आदेश पर पहली बार 'किराया निर्धारण'
अब तक उत्तराखंड में स्कूल वाहन संचालक और स्कूल प्रबंधन अपनी मर्जी से किराया वसूलते थे, जिससे अभिभावकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता था।
- जनहित याचिका: नैनीताल हाईकोर्ट में दाखिल एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार को किराया तय करने के निर्देश दिए थे।
- विशेष समिति: संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव कुमार मेहरा की अध्यक्षता में बनी समिति ने वाहन की लागत, बीमा, टैक्स और चालक-परिचालक के वेतन जैसे 6 प्रमुख बिंदुओं का बारीकी से अध्ययन करने के बाद यह रिपोर्ट सौंपी है।
2. क्या हैं किराया तय करने के मानक?
परिवहन प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि किराया तय करते समय केवल दूरी ही नहीं, बल्कि वाहन संचालकों के खर्चों का भी ध्यान रखा गया है:
- ईंधन की लागत: पेट्रोल-डीजल की वर्तमान दरों के आधार पर।
- मेंटेनेंस: टायर, सर्विस और स्पेयर पार्ट्स का खर्च।
- मानवीय श्रम: ड्राइवर और हेल्पर का न्यूनतम वेतन।
- टैक्स और बीमा: वार्षिक रोड टैक्स और फिटनेस/बीमा का भार।
3. अभिभावकों और स्कूलों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश
इस फैसले के लागू होने के बाद अब प्रदेश भर के स्कूलों में असमंजस की स्थिति समाप्त हो जाएगी।
- समानता: यह नियम राज्य के सभी छोटे-बड़े निजी स्कूलों और अनुबंध पर चलने वाले वाहनों पर समान रूप से लागू होगा।
- शिकायत: यदि कोई स्कूल या वाहन संचालक तय दरों से अधिक पैसे मांगता है, तो अभिभावक परिवहन विभाग (RTO/ARTO) में इसकी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
4. क्या बोले अधिकारी?
परिवहन आयुक्त बृजेश कुमार संत ने कहा कि इस निर्णय का उद्देश्य छात्र सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। किराया निर्धारित होने से प्रतिस्पर्धा के नाम पर सुरक्षा मानकों से समझौता नहीं होगा और संचालकों को भी उचित मुनाफा मिल सकेगा।
सुशासन की ओर एक और कदम
नया शिक्षा सत्र (2026-27) शुरू होने से ठीक पहले लिया गया यह फैसला उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। अब अभिभावक अपने बजट का बेहतर प्रबंधन कर सकेंगे और स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगेगी।
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