लोहाघाट/चंपावत: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का फूटा गुस्सा; अपमानजनक धरना स्थल पर भड़कीं महिलाएं, कहा- 'महिला सशक्तिकरण सिर्फ कागजों में'

लोहाघाट/चंपावत, 13 अप्रैल 2026: अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले एक सप्ताह से आंदोलनरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आक्रोश अब चरम पर है। लोहाघाट में उपजिलाधिकारी कार्यालय परिसर से हटाए जाने के बाद, कार्यकर्ताओं को जो वैकल्पिक धरना स्थल दिया गया, वह रोड़ी, बजरी और धूल-मिट्टी से भरा होने के कारण अत्यंत असुविधाजनक है। इस अपमानजनक व्यवहार से भड़कीं कार्यकर्ताओं ने रविवार को ऋषेश्वर महादेव मंदिर मार्ग पर बैनर लगाकर जोरदार प्रदर्शन किया।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का फूटा गुस्सा; अपमानजनक धरना स्थल पर भड़कीं महिलाएं

आंदोलन: मुख्य अपडेट

बिंदुविवरण
क्षेत्रलोहाघाट और चंपावत (उत्तराखंड)
मुख्य मुद्दातीन सूत्रीय मांगों पर अनदेखी और अपमानजनक धरना स्थल
विरोध का कारणधरना स्थल पर धूल-मिट्टी, गंदगी और बैठने की उचित व्यवस्था का अभाव
प्रमुख मांगेंसम्मानजनक धरना स्थल की व्यवस्था और मांगों का निस्तारण
चेतावनीसरकार ने ध्यान न दिया तो अब मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग पर होगा आंदोलन

'महिला सशक्तिकरण' केवल कागजों तक सीमित?

आंगनबाड़ी संगठन की ब्लॉक अध्यक्ष कविता पंत ने शासन-प्रशासन के दोहरे रवैये पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार 'महिला सशक्तिकरण' के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर आंदोलनरत महिलाओं को बैठने के लिए एक उचित स्थान तक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा:

"एक सप्ताह से हम शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन हमें जो जगह दी गई, वहां धूल-मिट्टी और गंदगी के सिवा कुछ नहीं है। यह महिलाओं का नहीं, बल्कि हमारी मांगों का अपमान है।"

इस दौरान माया राय, बसंती, दीपा राय, दमयंती और शकुंतला जैसी कार्यकर्ताओं ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी कि यदि उन्हें जल्द ही सम्मानजनक धरना स्थल नहीं मिला, तो वे चक्का जाम करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग पर उतरने को बाध्य होंगी।

चंपावत में भी आंदोलन तेज

लोहाघाट के साथ-साथ चंपावत मुख्यालय में भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आंदोलन लगातार जारी है। जिला अध्यक्ष मीना बोहरा ने कहा कि सरकार द्वारा लगातार की जा रही अनदेखी से कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है। उन्होंने जिले के सभी जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से अपील की है कि वे इस कठिन समय में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के समर्थन में खड़े हों और सरकार पर उनकी मांगों को पूरा करने का दबाव बनाएं।

सरकार के लिए बढ़ती चुनौती

पिछले एक सप्ताह से चल रहा यह आंदोलन अब उस मुकाम पर पहुंच गया है जहाँ प्रशासन के लिए स्थिति को संभालना चुनौतीपूर्ण होगा। अपनी मांगों के प्रति सरकार की 'चुप्पी' और कार्यकर्ताओं को मिल रहा 'असहयोग' आने वाले दिनों में बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है।
क्या सरकार समय रहते इन महिलाओं की सुध लेगी, या फिर उन्हें अपनी मांगों के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर होना पड़ेगा? यह देखना शेष है।

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