बद्रीनाथ मास्टर प्लान पर बरसे कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला; सरकार के दावों को बताया 'हवा-हवाई', गिनाईं जमीनी खामियां


Aapki Media AI


देहरादून, 09 अप्रैल 2026: चारधाम यात्रा का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, उत्तराखंड की सियासत में 'बद्रीनाथ मास्टर प्लान' को लेकर उबाल आ गया है। बद्रीनाथ विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक लखपत सिंह बुटोला ने प्रदेश सरकार की तैयारियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निगरानी में चल रहे मास्टर प्लान पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। विधायक बुटोला का दावा है कि सरकार कागजों पर तो बड़ी-बड़ी बातें कर रही है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है।

हाल ही में बद्रीनाथ धाम का स्थलीय निरीक्षण कर लौटे विधायक बुटोला ने देहरादून में मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि यात्रा शुरू होने की कगार पर है, लेकिन निर्माण कार्यों की गति कछुआ चाल से चल रही है। उन्होंने सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि महत्वपूर्ण समीक्षा बैठकों से स्थानीय जन प्रतिनिधियों को दूर रखा जा रहा है, ताकि सच सामने न आ सके।

 बद्रीनाथ विधायक लखपत बुटोला की प्रमुख आपत्तियां और मांगें

श्रेणीविधायक द्वारा उठाए गए मुद्दे / मांगें (Demands & Issues)
मास्टर प्लान की स्थितिलगभग 40 से 50 फीसदी कार्य अभी भी अधूरा पड़ा है।
नदी का स्वरूपअलकनंदा नदी की चौड़ाई 3 मीटर कम करने से मंदिर और आबादी को खतरा।
पुरोहितों का पुनर्वास3 साल पहले तोड़े गए घर आज भी खंडहर, पुनर्वास कार्य ठप।
रजिस्ट्रेशनश्रद्धालुओं की संख्या सीमा (Cap) खत्म हो और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हमेशा खुला रहे।
परिवहनड्राइवरों का ग्रीन कार्ड 6 महीने के लिए वैध हो और बैरिकेडिंग कम की जाए।

व्यापारिक राहत

होटल और होमस्टे संचालकों को रियायती दरों पर कमर्शियल गैस मिले।

अलकनंदा की चौड़ाई घटाने पर छिड़ा विवाद

विधायक लखपत सिंह बुटोला ने सबसे बड़ा और तकनीकी आरोप अलकनंदा नदी के सौंदर्यीकरण कार्य पर लगाया है। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान के नाम पर अलकनंदा नदी की चौड़ाई को करीब 3 मीटर तक घटा दिया गया है। विधायक के अनुसार, नदी के प्राकृतिक प्रवाह के साथ यह छेड़छाड़ भविष्य में विनाशकारी साबित हो सकती है। इससे न केवल मुख्य मंदिर की नींव को खतरा पैदा हो गया है, बल्कि आसपास की स्थानीय आबादी और तीर्थ पुरोहितों के घरों पर भी बाढ़ का साया मंडरा रहा है।

उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आखिर किस वैज्ञानिक आधार पर नदी के तटों को सिकोड़ा जा रहा है? विधायक ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में कोई प्राकृतिक आपदा आती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

तीर्थ पुरोहितों की बदहाली और खंडहर होते आशियाने

बद्रीनाथ मास्टर प्लान के प्रथम चरण में कई भवनों को ध्वस्त किया गया था, जिनमें तीर्थ पुरोहितों के पुश्तैनी घर भी शामिल थे। विधायक बुटोला ने दुख जताते हुए कहा कि तीन साल बीत जाने के बाद भी इन पुरोहितों के घरों का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। आज भी बद्रीनाथ धाम में उनके आशियाने खंडहर की स्थिति में हैं। सरकार ने वादा किया था कि उन्हें जल्द ही नए और आधुनिक घर दिए जाएंगे, लेकिन अब तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं। पुरोहित समाज में सरकार के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त है, जो यात्रा के दौरान विरोध प्रदर्शन का रूप ले सकता है।

यात्रा सुगमता के लिए उठाई 13 सूत्रीय मांगें

विधायक ने केवल कमियां ही नहीं गिनाईं, बल्कि आगामी यात्रा को सफल बनाने के लिए सरकार के सम्मुख 13 सूत्रीय मांगें भी रखी हैं। उन्होंने मांग की कि ऋषिकेश से बद्रीनाथ तक जगह-जगह लगाई गई बैरिकेडिंग को कम किया जाए, क्योंकि इससे यात्रियों को मानसिक और शारीरिक परेशानी होती है।

परिवहन क्षेत्र की समस्याओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ड्राइवरों को बार-बार ग्रीन कार्ड बनवाने की जद्दोजहद से बचाने के लिए इसकी अवधि कम से कम 6 महीने की जानी चाहिए। साथ ही, उन्होंने श्रद्धालुओं की संख्या पर लगाई गई सीमा को तुरंत हटाने की वकालत की, ताकि स्थानीय पर्यटन कारोबार को नुकसान न हो।

विधायक लखपत सिंह बुटोला का कड़ा बयान

प्रेस वार्ता के दौरान विधायक बुटोला ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा:

"सरकार केवल समीक्षा बैठकों के फोटो खिंचवाने में व्यस्त है। 5 अप्रैल को जब मैं खुद बद्रीनाथ गया, तो वहाँ की हकीकत देखकर दंग रह गया। मास्टर प्लान का 50 प्रतिशत काम अधूरा है। समीक्षा बैठकों में स्थानीय विधायकों को जानबूझकर नहीं बुलाया जाता क्योंकि हम सरकार के झूठ की पोल खोल देंगे। अलकनंदा के साथ छेड़छाड़ बद्रीनाथ के अस्तित्व से खिलवाड़ है। यदि सरकार ने हमारी 13 सूत्रीय मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो हम जनता के साथ सड़कों पर उतरेंगे।"

बद्रीनाथ विधायक के इन आरोपों ने चारधाम यात्रा की तैयारियों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन आरोपों का क्या जवाब देती है और क्या यात्रा शुरू होने से पहले इन 13 सूत्रीय मांगों पर कोई ठोस निर्णय लिया जाता है।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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