चकराता: स्कूल से गायब शिक्षक पर गिरी निलम्बन की गाज; शिक्षा मंत्री के निर्देश पर हुई बड़ी कार्रवाई, फर्जी हाजिरी का भी खुलासा

देहरादून/चकराता, 09 अप्रैल 2026: उत्तराखंड के विद्यालयी शिक्षा विभाग में अनुशासनहीनता और लापरवाही बरतने वाले कार्मिकों के खिलाफ सरकार ने "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपना ली है। ताजा मामला देहरादून जनपद के चकराता विकासखण्ड से सामने आया है, जहाँ राजकीय प्राथमिक विद्यालय डिरनाड़ में तैनात सहायक अध्यापक हरपाल सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

शिक्षा मंत्री के निर्देश पर हुई बड़ी कार्रवाई, फर्जी हाजिरी का भी खुलासा

सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो और स्थानीय ग्रामीणों की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए सूबे के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विभागीय अधिकारियों को त्वरित जांच के आदेश दिए थे, जिसके बाद यह कड़ी कार्यवाही की गई है।

चकराता शिक्षक निलम्बन प्रकरण: मुख्य तथ्य और जांच रिपोर्ट

विवरणविस्तृत जानकारी 
आरोपी शिक्षकहरपाल सिंह, सहायक अध्यापक
विद्यालय का नामराजकीय प्राथमिक विद्यालय डिरनाड़, चकराता
अनुपस्थिति की तिथि06 एवं 07 अप्रैल 2026
मुख्य आरोपबिना अनुमति गायब रहना और उपस्थिति पंजिका में अग्रिम हस्ताक्षर करना।
कार्यवाही का आधारसोशल मीडिया वीडियो, ग्रामीणों की शिकायत और उप शिक्षा अधिकारी की जांच।
वर्तमान स्थितितत्काल प्रभाव से निलंबित एवं बीईओ कार्यालय चकराता में सम्बद्ध।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने खोली पोल

मामला तब प्रकाश में आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित हुआ, जिसमें विद्यालय में शिक्षक की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठाए गए थे। स्थानीय ग्रामीणों ने भी शिकायत की थी कि शिक्षक हरपाल सिंह अक्सर विद्यालय से नदारद रहते हैं। इस वीडियो का संज्ञान लेते हुए शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विभागीय मर्यादा बनाए रखने हेतु तुरंत जांच के निर्देश दिए।

उप शिक्षा अधिकारी चकराता द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में पाया गया कि शिक्षक हरपाल सिंह 6 और 7 अप्रैल को बिना किसी पूर्व सूचना या स्वीकृत अवकाश के विद्यालय से गायब थे। जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि शिक्षक ने पकड़े जाने के डर से उपस्थिति पंजिका (Attendance Register) में पहले से ही हस्ताक्षर कर दिए थे, जो कि एक गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितता है।

स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं; बीईओ को 30 दिन में सौंपनी होगी विस्तृत रिपोर्ट

जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) ने जांच रिपोर्ट के आधार पर हरपाल सिंह को निलंबित करने के आदेश जारी किए। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमनुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। विभाग ने शिक्षक से इस लापरवाही पर स्पष्टीकरण भी मांगा था, लेकिन उनके द्वारा दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीईओ बेसिक ने खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) चकराता को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि सभी पक्षों की सुनवाई करते हुए और साक्ष्यों का मिलान करते हुए 30 दिन के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट कार्यालय को सौंपें। इस कार्यवाही से चकराता और आसपास के क्षेत्रों के शिक्षकों में हड़कंप मचा हुआ है।

नियमित निरीक्षण के निर्देश: विभाग की छवि से समझौता नहीं

शिक्षा विभाग में कतिपय कर्मचारियों द्वारा अनुशासन को ताक पर रखने की घटनाओं से सरकार खासी नाराज है। अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया गया है कि विद्यालयों के संचालन में किसी भी प्रकार की कोताही विभाग की छवि को धूमिल करती है। यही कारण है कि अब जिला स्तर के अधिकारियों को समय-समय पर विद्यालयों का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्यवाही से उन शिक्षकों को कड़ा संदेश जाएगा जो अपने कर्तव्यों के प्रति सजग नहीं हैं। सरकार अब डिजिटल अटेंडेंस और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग पर भी जोर दे रही है ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।

 शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का कड़ा रुख

प्रकरण पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा:

"शिक्षा विभाग में अनुशासनहीनता किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो भी कर्मचारी अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतेगा या विभाग की छवि को धूमिल करेगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और विभागीय कार्यवाही की जाएगी। हमने सभी जनपदों के सीईओ (CEO) को नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए हैं ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।"

चकराता की यह घटना सबक है कि अब सोशल मीडिया के दौर में प्रशासनिक लापरवाही छिप नहीं सकती। सरकार की सक्रियता और ग्रामीणों की जागरूकता ने एक लापरवाह शिक्षक को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उम्मीद है कि भविष्य में इस तरह की कड़ाई से उत्तराखंड की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में सुधार देखने को मिलेगा।

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