देहरादून, 10 अप्रैल 2026: राजधानी देहरादून में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और जनसुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने जिले में संचालित और प्रस्तावित सभी अल्ट्रासाउंड व रेडियो डायग्नोस्टिक सेंटरों के पंजीकरण एवं नवीनीकरण (Renewal) को लेकर नए और सख्त मानक तय कर दिए हैं।
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जिलाधिकारी सविन बंसल |
देहरादून में यह पहली बार हो रहा है जब किसी डायग्नोस्टिक सेंटर को अनुमति देने से पहले उसकी 'बिल्डिंग सेफ्टी' से लेकर 'सीवेज ट्रीटमेंट' तक की सूक्ष्म जांच की जा रही है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो केंद्र निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उन्हें न केवल अनुमति नहीं मिलेगी, बल्कि पूर्व से संचालित केंद्रों को सील करने की कार्यवाही भी अमल में लाई जाएगी।
डायग्नोस्टिक सेंटरों के लिए नए अनिवार्य मानक और नियम
| मानक का प्रकार | अनिवार्य दस्तावेज/व्यवस्था (Requirements) | संबंधित अधिनियम (Acts/Rules) |
| भवन सुरक्षा | स्ट्रक्चरल बिल्डिंग सेफ्टी सर्टिफिकेट | उत्तराखंड बिल्डिंग बायलॉज |
| अग्नि सुरक्षा | वैध फायर सेफ्टी एनओसी (Fire NOC) | फायर प्रिवेंशन एक्ट |
| कचरा प्रबंधन | बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण व्यवस्था एवं प्रमाण पत्र | बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स |
| प्रदूषण नियंत्रण | प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी (Consent to Operate) | एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट |
| तकनीकी मानक | लिंग चयन प्रतिषेध अधिनियम का कड़ा पालन | पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) एक्ट |
| संस्थान पंजीकरण | क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत पंजीकरण | क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 |
भवन सुरक्षा और फायर सेफ्टी पर 'नो कॉम्प्रोमाइज'
जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशों के अनुसार, अब देहरादून में किसी भी डायग्नोस्टिक सेंटर का नवीनीकरण केवल 'पीसीपीएनडीटी एक्ट' के आधार पर नहीं होगा। पंजीकरण के लिए केंद्र को यह साबित करना होगा कि जिस भवन में मशीनें संचालित हैं, वह संरचनात्मक रूप से सुरक्षित (Building Safety) है। इसके साथ ही, अस्पतालों और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में स्थित सेंटरों के लिए फायर सेफ्टी के पुख्ता इंतजाम और अग्निशमन विभाग की एनओसी को अनिवार्य कर दिया गया है।
विगत छह माह से जिला प्रशासन ऐसे केंद्रों की स्क्रीनिंग कर रहा है। जिलाधिकारी ने निर्देशित किया है कि जनमानस की जान के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को संचालन की छूट नहीं दी जा सकती।
प्रदूषण नियंत्रण और सीवेज ट्रीटमेंट: नई अनिवार्य शर्त
स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन ने अब रेडियो डायग्नोस्टिक सेंटरों के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) की एनओसी को अनिवार्य कर दिया है। इसके अंतर्गत केंद्रों को:
- बायोमेडिकल वेस्ट: सुई, सिरिंज और अन्य मेडिकल कचरे के सुरक्षित निस्तारण का वैध अनुबंध दिखाना होगा।
- STP व्यवस्था: सेंटरों से निकलने वाले अपशिष्ट जल के लिए सीवेज ट्रीटमेंट की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
- स्वच्छता: क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 के प्रावधानों के तहत साफ-सफाई के उच्च मानकों का पालन करना होगा।
अनियमितता मिलने पर होगी सीधे सीलिंग की कार्यवाही
जिलाधिकारी ने संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों और जांच टीमों को सख्त लहजे में निर्देश दिए हैं कि सभी आवेदनों की गहनता से जांच की जाए। उन्होंने कहा कि केवल उन केंद्रों को ही पंजीकरण या नवीनीकरण प्रदान किया जाए जो सभी मानकों पर 100% खरे उतरते हों।
डीएम सविन बंसल ने साफ किया है कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि निरीक्षण के दौरान किसी भी केंद्र में पीसीपीएनडीटी अधिनियम का उल्लंघन, बायोमेडिकल कचरे का गलत निस्तारण या सुरक्षा मानकों में कमी पाई गई, तो संबंधित क्लीनिक या अस्पताल को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया जाएगा।
जिलाधिकारी सविन बंसल का कड़ा संदेश
प्रशासनिक मुस्तैदी पर बात करते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा:
"जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है। देहरादून में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर असुरक्षित भवनों या मानकों के विपरीत केंद्रों का संचालन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमने डायग्नोस्टिक सेंटरों के पंजीकरण के लिए बहु-स्तरीय सुरक्षा मानक (Multi-level Safety Standards) तय किए हैं। प्रदूषण बोर्ड की एनओसी, बिल्डिंग सेफ्टी और बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट अब वैकल्पिक नहीं बल्कि अनिवार्य हैं। जो संस्थान नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन पर सख्त विधिक कार्यवाही की जाएगी।"
देहरादून जिला प्रशासन की यह पहल राज्य में स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नई क्रांति लेकर आएगी। कड़े मानकों के लागू होने से न केवल अवैध रूप से चल रहे केंद्रों पर लगाम लगेगी, बल्कि मरीजों को एक सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में रेडियोलॉजी सेवाएं मिल सकेंगी। प्रशासन की यह सक्रियता अन्य जनपदों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण है।
