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रामनगर: स्कूलों और बुक सेलर्स के 'कॉर्पोरेट खेल' पर प्रशासन का डंडा; छापेमारी से मचा हड़कंप, निजी प्रकाशकों की किताबों का मिला खेल


Aapki Media AI


रामनगर (नैनीताल), 10 अप्रैल 2026: रामनगर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों की जेब पर डाले जा रहे डाके को रोकने के लिए प्रशासन अब पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। जिलाधिकारी नैनीताल के सख्त निर्देशों के बाद शुक्रवार को एसडीएम और खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) की संयुक्त टीम ने शहर एवं ग्रामीण इलाकों में संचालित स्टेशनरी विक्रेताओं और बुक सेलर्स की दुकानों पर अचानक छापेमारी की।

गोपाल सिंह चौहान  एसडीएम रामनगर
गोपाल सिंह चौहान एसडीएम रामनगर

इस दौरान टीम ने ग्राम पीरुमदारा स्थित ग्रेट मिशन पब्लिक स्कूल में भी औचक दबिश दी। प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई से उन स्कूल संचालकों और दुकानदारों में हड़कंप मच गया है, जो साठगांठ कर मनमाने दामों पर किताबें और स्टेशनरी बेच रहे थे।

रामनगर प्रशासन की छापेमारी: मुख्य बिंदु और जांच रिपोर्ट

जांच का क्षेत्रप्रशासनिक कार्यवाही और पाए गए तथ्य (Action & Findings)
कुल दुकानेंरामनगर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की 10 स्टेशनरी दुकानों पर छापेमारी।
बड़ी अनियमिततादुकानों पर निजी स्कूलों की 'रेफरल पर्चियां' बरामद हुईं।
स्कूल पर रेडपीरुमदारा स्थित ग्रेट मिशन पब्लिक स्कूल में जांच की गई।
मुख्य शिकायतNCERT की किताबें बाहर से और प्राइवेट पब्लिशर की किताबें स्कूल से बेचना।
कड़ी चेतावनीनिर्धारित दुकान से बुक खरीदने का दबाव बनाना पूरी तरह गैरकानूनी।
फीस का मुद्दाएडमिशन फीस और बढ़ी हुई फीस वसूलने वाले स्कूलों पर होगी एफआईआर।

दुकानों पर मिली स्कूलों की पर्चियां; अभिभावकों ने खोली पोल

एसडीएम ने बताया कि रामनगर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में स्थित 10 प्रमुख बुक सेलर्स की दुकानों पर जब औचक छापा मारा गया, तो वहां चौकाने वाले प्रमाण मिले। मौके पर मौजूद कई अभिभावकों ने टीम को वे पर्चियां दिखाईं, जो स्कूलों द्वारा उन्हें दी गई थीं। इन पर्चियों में विशेष दुकानों से ही किताबें खरीदने के निर्देश दिए गए थे।

अभिभावकों ने लिखित और मौखिक रूप से शिकायत दर्ज कराई कि स्कूल संचालक उन पर कुछ खास दुकानों से ही सेट खरीदने का दबाव बना रहे हैं। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से गैरकानूनी है। कोई भी स्कूल संचालक किसी विशेष दुकान को प्रमोट नहीं कर सकता और न ही अभिभावकों की पसंद को सीमित कर सकता है।

ग्रेट मिशन पब्लिक स्कूल में मिली गंभीर खामियां

पीरुमदारा के हिम्मतपुर ब्लॉक स्थित ग्रेट मिशन पब्लिक स्कूल की शिकायत प्रशासन को लंबे समय से मिल रही थी। जांच के दौरान टीम ने पाया कि स्कूल संचालक द्वारा एक दोहरी रणनीति अपनाई जा रही थी। बच्चों को एनसीईआरटी (NCERT) की किताबें तो बाजार से खरीदने को कहा जा रहा था, लेकिन निजी प्रकाशकों (Private Publishers) की महंगी किताबें स्कूल परिसर के भीतर से ही बेची जा रही थीं।

नियमों के अनुसार, कोई भी शिक्षण संस्थान अपनी सीमा के भीतर व्यवसायिक गतिविधियां जैसे किताबें या यूनिफॉर्म बेचना नहीं कर सकता। एसडीएम ने स्कूल प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि प्राइवेट किताबों के नाम पर कमीशनखोरी का यह खेल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

फीस और एडमिशन के नाम पर लूट पर रोक; नाम रखा जाएगा गोपनीय

छापेमारी के दौरान एसडीएम ने फीस वृद्धि और एडमिशन फीस को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने बताया कि कई स्कूल संचालक निर्धारित फीस से अधिक वसूली कर रहे हैं और पुराने छात्रों से भी दोबारा 'एडमिशन फीस' के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे हैं।
सख्त निर्देश: यदि कोई स्कूल संचालक नियम विरुद्ध फीस लेता है, तो उसके खिलाफ मान्यता रद्द करने तक की कार्यवाही की जाएगी।
शिकायत प्रक्रिया: अभिभावक सीधे एसडीएम कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। एसडीएम ने भरोसा दिलाया कि शिकायत करने वाले अभिभावक का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा, ताकि उनके बच्चों को स्कूल में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

जिलाधिकारी को भेजी जा रही रिपोर्ट; जारी होंगे नोटिस

आज की गई इस व्यापक छापेमारी की विस्तृत रिपोर्ट मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) नैनीताल और जिलाधिकारी को अग्रिम दंडात्मक कार्यवाही के लिए भेजी जा रही है। एसडीएम ने बताया कि दोषी पाए गए सभी 10 बुक सेलर्स और संबंधित स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यह अभियान केवल एक दिन का नहीं है, बल्कि पूरी प्रवेश प्रक्रिया के दौरान जारी रहेगा। प्रशासन की इस मुस्तैदी से उन अभिभावकों ने राहत की सांस ली है जो अब तक निजी स्कूलों की मनमानी के आगे बेबस महसूस कर रहे थे।

रामनगर प्रशासन की यह कार्यवाही उत्तराखंड के अन्य शहरों के लिए भी एक नजीर है। शिक्षा के व्यवसायीकरण को रोकने और मध्यमवर्गीय परिवारों को आर्थिक शोषण से बचाने के लिए ऐसे कड़े कदमों की नितांत आवश्यकता है। अब देखना यह होगा कि नोटिस मिलने के बाद इन संस्थानों पर कितनी कठोर कार्यवाही की जाती है।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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