₹1.87 लाख करोड़ के पार पहुंचा खादी-ग्रामोद्योग का कारोबार; 12 वर्षों में बिक्री 501% और उत्पादन 380% बढ़ा, 2 करोड़ से अधिक लोगों को मिला रोजगार


Aapki Media AI


देहरादून/नई दिल्ली, 29 मई, 2026: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रेरणा और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व व कुशल मार्गदर्शन में भारत के पारंपरिक 'खादी एवं ग्रामोद्योग' क्षेत्र ने विकास, परिवर्तन और आर्थिक सुदृढ़ीकरण की एक ऐसी अभूर्व यात्रा तय की है, जिसने वैश्विक कॉरपोरेट जगत को हैरान कर दिया है। पत्र सूचना कार्यालय (PIB Dehradun) द्वारा भारत सरकार की ओर से जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 (FY 2025-26) में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की कुल बिक्री 1,87,105 करोड़ रुपये के सर्वकालिक ऐतिहासिक एवं रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।

₹1.87 लाख करोड़ के पार पहुंचा खादी-ग्रामोद्योग का कारोबार; 12 वर्षों में बिक्री 501% और उत्पादन 380% बढ़ा, 2 करोड़ से अधिक लोगों को मिला रोजगार



यह अभूतपूर्व आंकड़ा न केवल देश के औद्योगिक इतिहास में दर्ज होने वाली सबसे बड़ी जीतों में से एक है, बल्कि यह ग्रामीण भारत की बढ़ती उद्यमशीलता, जमीनी आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे सशक्त प्रमाण है। प्रधानमंत्री के आह्वान पर शुरू हुए ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘वोकल फॉर लोकल’ (Vocal for Local) और ‘लोकल टू ग्लोबल’ (Local to Global) जैसे राष्ट्रीय अभियानों से ऊर्जा पाकर खादी आज केवल एक पारंपरिक वस्त्र या उत्पाद नहीं रह गई है, बल्कि यह ‘नये भारत’ की आत्मनिर्भरता, स्वदेशी स्वाभिमान और ग्रामीण समृद्धि का एक जीवंत वैश्विक ब्रांड बन चुकी है।


KVIC अध्यक्ष मनोज कुमार ने जारी किए अनंतिम आंकड़े: 12 साल में बदला देश का आर्थिक परिदृश्य


नई दिल्ली के गांधी दर्शन, राजघाट स्थित केंद्रीय कार्यालय में वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम (Provisional) आंकड़े जारी करते हुए खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने इस सफलता को देश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में दिन-रात पसीना बहाने वाले करोड़ों कारीगरों, बुनकरों और कत्तिनों को समर्पित किया।

अध्यक्ष मनोज कुमार ने तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए बताया:



"यदि हम वर्ष 2013-14 के आधारभूत आंकड़ों से वर्तमान वर्ष 2025-26 की तुलना करें, तो बीते 12 वर्षों में खादी और ग्रामोद्योग के क्षेत्र में एक वास्तविक क्रांति आई है। इन 12 वर्षों में कुल बिक्री में 501 प्रतिशत, कुल उत्पादन में 380 प्रतिशत और ग्रामीण रोजगार सृजन के क्षेत्र में 56 प्रतिशत की भारी-भरकम और ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। यह दर्शाता है कि 'टीम केवीआईसी' विकसित भारत@2047 के संकल्प को पूरा करने के लिए कितनी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है।"

 

खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र की 12 वर्षों की प्रगति का समग्र सांख्यिकीय विवरण


KVIC द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर वर्ष 2013-14 और वित्त वर्ष 2025-26 के बीच आए इस युगांतरकारी आर्थिक बदलाव को इस विस्तृत तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:

आर्थिक संकेतक (Economic Indicators)आधार वर्ष (2013-14) की स्थितिवित्त वर्ष (2025-26) की रिकॉर्ड स्थितिपिछले 12 वर्षों में हुई कुल प्रतिशत वृद्धि
समग्र टर्नओवर / कुल बिक्री₹31,154 करोड़₹1,87,105 करोड़501% की अभूतपूर्व बढ़ोतरी (6 गुना से अधिक)
समग्र उत्पादन (Total Production)₹26,109 करोड़₹1,25,296 करोड़380% की रिकॉर्ड वृद्धि (लगभग 5 गुना)
खादी वस्त्रों का विशेष उत्पादन₹811 करोड़₹3,974 करोड़390% की भारी बढ़ोतरी
खादी वस्त्रों की विशेष बिक्री₹1,081 करोड़₹7,869 करोड़628% की चमत्कारी वृद्धि (7 गुना से अधिक)
ग्रामोद्योग उत्पादों का उत्पादन₹25,298 करोड़₹1,21,322 करोड़380% की वृद्धिशील प्रगति
ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री₹30,073 करोड़₹1,79,236 करोड़496% का भारी बाजार विस्तार
कुल संचयी रोजगार (Cumulative Job)1.30 करोड़ लोग2.04 करोड़ लोग56% की वृद्धि (ग्रामीण भारत की रीढ़)

खादी वस्त्रों में क्रांतिकारी उछाल: 1,081 करोड़ से बढ़कर 7,869 करोड़ पर पहुंची बिक्री


प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, शुद्ध खादी वस्त्रों के क्षेत्र में जो प्रगति हुई है, उसने सभी व्यावसायिक अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। वर्ष 2013-14 में जहां देश में मात्र 811 करोड़ रुपये के खादी वस्त्रों का उत्पादन होता था, वह वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 390 प्रतिशत की छलांग लगाकर 3,974 करोड़ रुपये हो गया है।
इसी प्रकार, विपणन और फैशन के आधुनिक तौर-तरीकों को अपनाने के कारण खादी वस्त्रों की बिक्री 1,081 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 628 प्रतिशत की रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि के साथ 7,869 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा खुद विभिन्न वैश्विक मंचों से खादी पहनने और उपहार में देने के सतत प्रचार-प्रसार का ही यह सीधा सकारात्मक प्रभाव है कि आज देश की युवा पीढ़ी और कॉरपोरेट जगत में खादी की स्वीकार्यता और बाजार का दायरा अत्यधिक व्यापक हो गया है।

 

ग्रामोद्योग उत्पादों ने मचाई धूम: ग्रामीण उद्योगों से 1.99 करोड़ लोगों को मिल रहा संबल


KVIC की रीढ़ कहे जाने वाले 'ग्रामोद्योग' (Village Industries) क्षेत्र—जिसके तहत हर्बल उत्पाद, शहद, हस्तनिर्मित कागज, खाद्य प्रसंस्करण और कुटीर उद्योग आते हैं—ने ग्रामीण आर्थिकी को पूरी तरह बदल कर रख दिया है।

  • उत्पादन की प्रगति: वर्ष 2013-14 में ग्रामोद्योग उत्पादों का उत्पादन 25,298 करोड़ रुपये था, जो अब 380 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1,21,322 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।
  • बिक्री का कीर्तिमान: इसी अवधि में इसकी बिक्री 30,073 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 496 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी के साथ 1,79,236 करोड़ रुपये दर्ज की गई।
  • रोजगार का सहारा: इस क्षेत्र ने ग्रामीण युवाओं के पलायन को रोकने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। वर्ष 2013-14 में जहां ग्रामोद्योगों से 1.19 करोड़ लोगों की आजीविका चलती थी, वह वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1.99 करोड़ हो गई है। 'घर-घर स्वदेशी' के अभियान ने डाबर और पतंजलि जैसे बड़े ब्रांड्स के बीच खादी के ग्रामोद्योगी उत्पादों को बाजार में एक प्रीमियम और शुद्ध उत्पाद के रूप में स्थापित कर दिया है।

 

PMEGP और ग्रामोद्योग विकास योजना: ग्रामीण आंत्रप्रेन्योरशिप का नया डिजिटल युग


प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) देश में नए रोजगार और स्टार्टअप स्थापित करने का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है। अकेले वित्त वर्ष 2025-26 के भीतर इस योजना के तहत देश भर में 66,494 नई सूक्ष्म इकाइयों की स्थापना की गई। इन इकाइयों को शुरू करने के लिए 7,375 करोड़ रुपये के कुल बैंक ऋण के मुकाबले सरकार द्वारा 2,457 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के खातों में वितरित की गई, जिससे एक ही साल में 7,31,434 लोगों को सीधे रोजगार मिला।


PMEGP की संचयी ऐतिहासिक सफलता: योजना की शुरुआत से लेकर अब तक पूरे देश में कुल 10,84,679 इकाइयों की स्थापना की जा चुकी है। इन इकाइयों के लिए 80,705 करोड़ रुपये के ऋण के सापेक्ष सरकार द्वारा 29,623 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी बांटी गई है, जिसके माध्यम से अब तक देश के लगभग 97.95 लाख लोगों को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया गया है।


इसके साथ ही, 'ग्रामोद्योग विकास योजना' के तहत ग्रामीण कारीगरों की तकनीकी क्षमता बढ़ाने के लिए अब तक 3,23,006 आधुनिक मशीनें, टूलकिट और उन्नत उपकरण बांटे जा चुके हैं। इसमें बिजली से चलने वाले चाक, मधुमक्खी पालन के लिए बी-बॉक्स, अगरबत्ती मशीनें, लेदर फुटवियर टूलकिट और मोबाइल रिपेयरिंग किट्स शामिल हैं। अकेले वित्त वर्ष 2025-26 में ही 37,769 ऐसी मशीनें बांटी गईं।


KVIC की इस ऐतिहासिक सफलता के 4 सबसे बड़े सामाजिक-आर्थिक पहलू 


भारत सरकार द्वारा जारी इस प्रेस रिलीज के विश्लेषण से खादी क्षेत्र में आए चार क्रांतिकारी और दूरगामी सामाजिक बदलाव स्पष्ट होते हैं:


  • महिला नेतृत्व आधारित सशक्तिकरण (Women Empowerment): केवीआईसी के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी रिकॉर्ड 59 प्रतिशत (47,382 महिलाएं) तक पहुंच गई है। पीएमईजीपी के तहत 28,180 महिला उद्यमियों ने अपनी फैक्ट्रियां लगाईं, जिससे 3 लाख से अधिक महिलाओं को रोजगार मिला। वर्तमान में खादी क्षेत्र के कुल 5 लाख कारीगरों में 80 प्रतिशत से अधिक केवल महिलाएं हैं, जो महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा वैश्विक उदाहरण है।
  • कारीगरों के पारिश्रमिक में 275% की भारी वृद्धि: केवीआईसी ने ग्रामीण गरीबों के शोषण को खत्म करते हुए उनके पारिश्रमिक में ऐतिहासिक सुधार किया है। वर्ष 2013-14 में जहां कारीगरों को प्रति हैंक (सूत की लच्छी) मात्र 4 रुपये मिलते थे, उसे वर्तमान सरकार ने 275% बढ़ाकर 15 रुपये प्रति हैंक कर दिया है, जिससे ग्रामीण बुनकरों की दैनिक आय में कई गुना सुधार हुआ है।
  • संस्थागत मांग और सरकारी आपूर्ति में उछाल: विभिन्न सरकारी मंत्रालयों, रेलवे, एयरलाइंस और रक्षा बलों में खादी के अनिवार्य उपयोग की नीति के कारण केवीआईसी की सरकारी और संस्थागत आपूर्ति बढ़कर 92.08 करोड़ रुपये के आंकड़े को छू चुकी है।
  • 'हर घर तिरंगा' का आर्थिक प्रभाव: देश में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने वाले 'हर घर तिरंगा' जन-अभियान का सबसे बड़ा आर्थिक लाभ खादी क्षेत्र को मिला है। खादी के राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगे) की बिक्री वर्ष 2013-14 के मात्र 0.87 करोड़ रुपये से कई गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 2.35 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

 

 'विकसित भारत' की आर्थिक धुरी बनता केवीआईसी का स्वदेशी मॉडल


पत्र सूचना कार्यालय (PIB) देहरादून द्वारा जारी खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के ये अनंतिम आंकड़े इस बात का अकाट्य दस्तावेज हैं कि भारत की आर्थिक तरक्की का रास्ता केवल विदेशी निवेश (FDI) या बड़े शहरों के कॉरपोरेट टावरों से होकर नहीं गुजरता, बल्कि उसकी असली ताकत ग्रामीण भारत के कुटीर उद्योगों में छिपी है। 1.87 लाख करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल करना किसी भी बहुराष्ट्रीय एफएमसीजी (FMCG) कंपनी के लिए एक सपना जैसा है, जिसे भारत के पारंपरिक बुनकरों और ग्रामीण महिलाओं ने सच कर दिखाया है।


उत्पादन में 380% और बिक्री में 501% की यह असाधारण वृद्धि दर्शाती है कि 'वोकल फॉर लोकल' केवल एक राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि इसने देश के उपभोक्ताओं के क्रय व्यवहार (Buying Behavior) को पूरी तरह बदल दिया है। 2.04 करोड़ लोगों को रोजगार देकर केवीआईसी आज देश की सबसे बड़ी गैर-कृषि रोजगार प्रदाता संस्था बन चुकी है। अध्यक्ष मनोज कुमार के नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों के दम पर खादी का यह स्वदेशी आर्थिक मॉडल न केवल भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की आर्थिकी बनाने में मुख्य भूमिका निभा रहा है, बल्कि 'विकसित भारत@2047' के उस सपने को भी धरातल पर साकार कर रहा है, जहां देश का हर गांव आर्थिक रूप से समृद्ध और आत्मनिर्भर होगा।




📢 खबरों को सबसे पहले पाने के लिए आपकी मीडिया को फॉलो करें
👉 WhatsApp Channel Join करें 👉 WhatsApp Group Join करें
Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
Previous Post Next Post