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देहरादून, 28 मई, 2026: देवभूमि उत्तराखंड को ऊर्जा के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर, पर्यावरण-अनुकूल और देश का एक आदर्श मॉडल राज्य बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के प्रयासों को एक और बड़ी और ऐतिहासिक सफलता मिली है। गुरुवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय, देहरादून में आयोजित एक विशेष और गरिमापूर्ण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने वैश्विक थिंक-टैंक 'काउंसिल ऑन एनर्जी, इन्वायरमेन्ट एण्ड वॉटर' (CEEW) द्वारा तैयार की गई अत्यंत महत्वपूर्ण ‘सौर जागरूकता स्मारिका पुस्तिका’ का आधिकारिक विमोचन किया।
इस अवसर पर प्रदेश को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल केवल एक स्मारिका पुस्तिका या किताब का विमोचन मात्र नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के उज्ज्वल, आत्मनिर्भर, प्रदूषण-मुक्त और हरित भविष्य (Green Future) के निर्माण की दिशा में हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता और संकल्प का एक सशक्त प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने इस सफलता के लिए राज्य के ऊर्जा महकमे और जनता की सराहना की।
वैश्विक संकट के दौर में सौर ऊर्जा एकमात्र विकल्प: सीएम धामी
पुस्तिका का विमोचन करने के उपरांत मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने वैश्विक पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा पर अपनी सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन (Climate Change), ग्लोबल वार्मिंग, ऊर्जा संकट और गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों से जूझ रही है। बेमौसम बरसात, अत्यधिक गर्मी और घटते पारंपरिक ऊर्जा स्रोत इस बात का संकेत हैं कि अब हमें अपनी ऊर्जा नीतियों को बदलना होगा।
मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया:
"ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में सौर ऊर्जा (Solar Energy) केवल बिजली पैदा करने का एक वैकल्पिक साधन नहीं है, बल्कि यह हमारी आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वच्छ भविष्य को सुनिश्चित करने वाली एक अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी मार्गदर्शन में संचालित 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के अंतर्गत उत्तराखंड ने जो अभूतपूर्व और उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त की हैं, वे आज पूरे देश के अन्य राज्यों के लिए एक महान प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं।"
उत्तराखंड की सौर ऊर्जा क्रांति: मुख्य आंकड़े और उपलब्धियों का विवरण
पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार की सौर नीतियों और CEEW के तकनीकी सहयोग से आए बदलावों को इस विस्तृत तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:
| मुख्य संकेतक / मानक (Parameters) | 2024 की स्थिति / प्रारंभिक लक्ष्य | वर्तमान स्थिति (मई 2026 तक) | हासिल की गई ऐतिहासिक उपलब्धि |
| कुल रूफटॉप सोलर संयंत्र | प्रारंभिक लक्ष्य: 40,000 घर | 95 प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्ण | निर्धारित समय-सीमा से काफी पहले लक्ष्य के मुहाने पर पहुंचा राज्य। |
| कुल सौर ऊर्जा क्षमता (Capacity) | आधारभूत क्षमता (वर्ष 2024) | लगभग 290 मेगावाट (MW) | मात्र दो वर्षों के भीतर सौर ऊर्जा क्षमता में 10 गुना (10x) की रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि। |
| रेजिडेंशियल रूफटॉप वर्ग | शुरुआती चरण में सीमित | घरेलू उपभोक्ताओं के छतों पर स्थापित | देश में सर्वाधिक सक्रिय भागीदारी वाले शीर्ष राज्यों (Top States) की श्रेणी में शुमार। |
| जन-जागरूकता के माध्यम | पारंपरिक विभागीय प्रचार | सौर कौथिग, नुक्कड़ नाटक, ट्रेनिंग | जन-जन तक स्वच्छ ऊर्जा क्रांति को पहुंचाया, आम नागरिकों के बिजली बिलों में भारी कमी। |
2 साल में 10 गुना उछाल: 290 मेगावाट क्षमता के साथ रचा इतिहास
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनसभा और मीडिया को संबोधित करते हुए राज्य की एक ऐसी आर्थिक और तकनीकी उपलब्धि का खुलासा किया, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड का मान बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2024 से लेकर अब तक, यानी मात्र दो वर्षों के संक्षिप्त कार्यकाल में उत्तराखंड ने अपनी सौर ऊर्जा क्षमता में लगभग 10 गुना (1000%) की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की है।
इस समय राज्य रिकॉर्ड 290 मेगावाट (MW) क्षमता के 'रेजिडेंशियल रूफटॉप सोलर संयंत्र' (Residential Rooftop Solar Plants) सफलतापूर्वक स्थापित करने में आत्मनिर्भर हो चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक पहाड़ी राज्य के लिए, जहां भौगोलिक परिस्थितियां अत्यंत विषम हैं, वहां इतनी बड़ी मात्रा में घरेलू छतों पर सोलर पैनल लगाना और ग्रिड से जोड़ना ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर उत्तराखंड (Atmanirbhar Uttarakhand) के निर्माण की दिशा में एक युगांतरकारी मील का पत्थर है।
'टीम उत्तराखंड' की सामूहिक प्रतिबद्धता की सराहना
इस महा-अभियान की सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री ने किसी एक व्यक्ति को न देकर इसे 'टीम उत्तराखंड' की सामूहिक जीत बताया। उन्होंने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL), उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (UREDA), पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (PITCUL), क्षेत्रीय प्रशासनिक अधिकारियों, इंजीनियरों और इस अभियान से जुड़े सभी लाइन-डिपार्टमेंट्स के अधिकारियों की पीठ थपथपाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सरकारी विभाग, वैज्ञानिक संस्थाएं और आम जनता एक दिशा में मिलकर काम करते हैं, तो ऐसे ही चमत्कारी परिणाम सामने आते हैं। उन्होंने इस स्मारिका को तैयार करने और राज्य को तकनीकी इनपुट प्रदान करने के लिए CEEW (Council on Energy, Environment and Water) की पूरी टीम के सहयोग और उनके उल्लेखनीय वैज्ञानिक योगदान की भी भूरि-भूरि प्रशंसा की।
उत्तराखंड को सोलर हब बनाने वाले 4 मुख्य प्रशासनिक स्तंभ
राज्य सरकार द्वारा सौर ऊर्जा को जन-आंदोलन बनाने के लिए उठाए गए चार सबसे प्रभावी कदमों का विवरण निम्नलिखित है:
- 'सौर कौथिग' का आयोजन: पारंपरिक पहाड़ी मेलों की तर्ज पर राज्य के सभी जिलों और विकासखंडों में 'सौर कौथिग' (सौर मेलों) का आयोजन किया गया, जहां ऑन-स्पॉट पंजीकरण, ऋण सुविधा और सब्सिडी की जानकारी दी गई।
- नुक्कड़ नाटकों से पारंपरिक प्रचार: ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के लाभ समझाने के लिए स्थानीय भाषाओं में नुक्कड़ नाटकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सहारा लिया गया, जिससे निरक्षर और कम पढ़े-लिखे लोग भी योजना से जुड़े।
- अधिकारियों का विशेष तकनीकी प्रशिक्षण: यूपीसीएल और उरेडा के ग्राउंड स्टाफ और तकनीकी लाइनमैनों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, ताकि सोलर पैनल लगाने और नेट-मीटरिंग (Net-Metering) की प्रक्रिया में उपभोक्ताओं को कोई देरी न हो।
- सरल सब्सिडी हस्तांतरण प्रणाली: केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया, जिससे उपभोक्ताओं के बैंक खातों में सीधे और बिना किसी भ्रष्टाचार के पैसा ट्रांसफर हुआ।
सिर्फ संयंत्र लगाना उद्देश्य नहीं, प्रत्येक नागरिक को बनाना है भागीदार
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का विजन बहुत व्यापक है। सरकार का उद्देश्य केवल छतों पर सोलर पैनल या तकनीकी संयंत्र स्थापित कर देना मात्र नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के प्रत्येक नागरिक को इस 'स्वच्छ ऊर्जा क्रांति' (Clean Energy Revolution) का एक सक्रिय और जागरूक साझीदार बनाना है।
सौर ऊर्जा के व्यापक उपयोग से होने वाले त्रिपक्षीय लाभों को समझाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा:
- आर्थिक लाभ: घरेलू छतों पर सोलर पैनल लगने से आम नागरिकों के मासिक विद्युत व्यय (बिजली के बिल) में भारी कमी आएगी और वे बची हुई बिजली ग्रिड को बेचकर अतिरिक्त कमाई भी कर सकेंगे।
- पर्यावरण संरक्षण: थर्मल या कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम होने से देवभूमि के पर्यावरण, जंगलों और ग्लेशियरों को प्रदूषण से बचाया जा सकेगा।
- हरित भविष्य का उपहार: हमारी आने वाली पीढ़ियों को एक ऐसा उत्तराखंड मिलेगा जो स्वच्छ, सुरक्षित, कार्बन-न्यूट्रल और सदैव हरा-भरा रहेगा। मुख्यमंत्री ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले कुछ ही समय में उत्तराखंड नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में पूरे देश के समक्ष एक प्रेरणादायक और 'गोल्डन मॉडल' के रूप में स्थापित होगा।
विमोचन के अवसर पर मौजूद रहा शीर्ष प्रशासनिक और राजनैतिक अमला
मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आयोजित इस हाई-प्रोफाइल विमोचन कार्यक्रम में राज्य के नीति-निर्माताओं और सौर ऊर्जा क्षेत्र के दिग्गजों ने शिरकत की। कार्यक्रम में मुख्य रूप से कपकोट के विधायक श्री सुरेश गड़िया, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव श्री विनय शंकर पांडेय उपस्थित रहे, जो इस योजना की प्रशासनिक मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
इसके अलावा, राष्ट्रीय स्तर के विख्यात ऊर्जा विशेषज्ञ और CEEW के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) डॉ. अरुणाभ घोष, पिटकुल (PITCUL) के प्रबंध निदेशक डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट, यूपीसीएल (UPCL) के प्रबंध निदेशक श्री जी. एस. बुदियाल सहित उरेडा और ऊर्जा मंत्रालय के कई वरिष्ठ विभागीय तकनीकी अधिकारी और वैज्ञानिक भी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि वे राज्य को सौर ऊर्जा में नंबर-1 बनाए रखने के लिए अपने प्रयासों को और तेज करेंगे।
ऊर्जा क्षेत्र में देश का पथ-प्रदर्शक बनता उत्तराखंड
देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा ‘सौर जागरूकता स्मारिका पुस्तिका’ का विमोचन और राज्य द्वारा मात्र दो वर्षों में सौर क्षमता को 10 गुना बढ़ाना यह प्रमाणित करता है कि उत्तराखंड केवल दावों में नहीं, बल्कि धरातल पर एक बड़ी पर्यावरण क्रांति का नेतृत्व कर रहा है। हिमालयी राज्यों में अमूमन पनबिजली (Hydro Power) को ही मुख्य स्रोत माना जाता रहा है, लेकिन धामी सरकार ने रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देकर यह साबित कर दिया कि पहाड़ों की छतों पर चमकने वाली धूप भी राज्य की आर्थिकी और ऊर्जा सुरक्षा की तकदीर बदल सकती है।
निर्धारित लक्ष्य से पहले 40 हजार रूफटॉप सोलर के लक्ष्य के 95% हिस्से को पूरा कर लेना और 290 मेगावाट की क्षमता हासिल करना ब्यूरोक्रेसी और जनता के बेजोड़ तालमेल का नतीजा है। CEEW जैसी वैश्विक संस्थाओं का साथ और 'सौर कौथिग' जैसे अनूठे जन-जागरूकता अभियान इस बात की गारंटी हैं कि उत्तराखंड आने वाले समय में देश का पहला पूर्ण 'हरित और आत्मनिर्भर ऊर्जा राज्य' बनने की राह पर बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है।
