NSG के मेजर अखिलेश भट्ट के नेतृत्व में उत्तराखंड के वीरों ने चूमा एवरेस्ट का शिखर; मात्र 20 दिनों में फतह कर रचा नया इतिहास


Aapki Media AI


देहरादून, 24 मई, 2026: कहते हैं कि पहाड़ों की गोद में पले-बढ़े उत्तराखंड के सपूतों के हौसले इतने बुलंद होते हैं कि उनके सामने दुनिया का सबसे ऊंचा शिखर भी बौना साबित हो जाता है। देवभूमि के जांबाज सैन्य वीरों ने एक बार फिर वैश्विक पटल पर इस बात को शत-प्रतिशत सच साबित कर दिखाया है। देश के सबसे प्रतिष्ठित और प्रीमियम विंग नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG - ब्लैक कैट कमांडो) की 16 सदस्यीय कुलीन पर्वतारोहण टीम ने 23 मई 2026 को प्रातः 3:26 बजे (नेपाल समयानुसार) दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर) पर सफलतापूर्वक कदम रखकर एक नया स्वर्णिम इतिहास रच दिया है।

NSG के मेजर अखिलेश भट्ट के नेतृत्व में उत्तराखंड के वीरों ने चूमा एवरेस्ट का शिखर


इस बेहद गौरवशाली और सामरिक रूप से चुनौतीपूर्ण अभियान का सबसे खास और देश को गौरवान्वित करने वाला पहलू यह है कि इस पूरे मिशन का नेतृत्व उत्तराखंड के सपूत मेजर अखिलेश भट्ट ने किया। उनके कुशल और जांबाज नेतृत्व में टीम ने न केवल एवरेस्ट फतह किया, बल्कि बेस कैंप काठमांडू से रवाना होने के मात्र 20 दिनों के भीतर शिखर तक पहुंचने का एक अत्यंत दुर्लभ और अकल्पनीय रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज कर लिया। सामान्य तौर पर एवरेस्ट अभियानों को पूरा करने में 45 से 60 दिनों का समय लगता है, लेकिन इन जवानों की फौलादी शारीरिक क्षमता और सैन्य अनुशासन ने इस समय को समेटकर इतिहास बदल दिया।

NSG के मेजर अखिलेश भट्ट के नेतृत्व में उत्तराखंड के वीरों ने चूमा एवरेस्ट का शिखर

नायक और उनके क्षेत्र: चोटी पर दहाड़े देवभूमि के 'ब्लैक कैट' कमांडो


इस ऐतिहासिक फतह में उत्तराखंड के विभिन्न पहाड़ी जनपदों के पांच जांबाज सपूतों ने न केवल अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता का लोहा मनवाया, बल्कि वैश्विक स्तर पर उत्तराखंड के नेतृत्व कौशल को भी स्थापित किया।

  • अभियान के लीडर (The Leader): इस पूरे मिशन की कमान मेजर अखिलेश भट्ट के हाथों में थी। मेजर अखिलेश वर्तमान में देहरादून के इंद्रापुर (बसंत विहार क्षेत्र) के निवासी हैं, लेकिन मूल रूप से उनका परिवार टिहरी गढ़वाल के घनसाली क्षेत्र का रहने वाला है। वे प्रतिष्ठित शिक्षाविद् व समाजसेवी श्री दिनेश प्रसाद भट्ट के सुपुत्र हैं।
  • उपकप्तान (Deputy Leader): मिशन में दूसरे सबसे महत्वपूर्ण पद यानी डिप्टी लीडर की भूमिका पौड़ी गढ़वाल के ग्राम कंडाई निवासी सूबेदार सुरेश कुमार बेबनी ने निभाई, जो श्री शंभू प्रसाद बेबनी के पुत्र हैं। उनकी तकनीकी सूझबूझ ने टीम को हर संकट से उबारा।

 

माउंट एवरेस्ट फतह करने वाले उत्तराखंड के वीर सपूतों का विवरण

 

वीर जवान का नाम व पदमूल निवास स्थान (जनपद व गांव)पिता का नामअभियान में निभाई गई मुख्य भूमिका
मेजर अखिलेश भट्ट (Expedition Leader)इंद्रापुर, देहरादून (मूल: घनसाली, टिहरी गढ़वाल)श्री दिनेश प्रसाद भट्टमुख्य कमांडर/लीडर, जिन्होंने पूरे रणनीतिक रूट और गति को नियंत्रित किया।
सूबेदार सुरेश कुमार बेबनी (Deputy Leader)ग्राम कंडाई, पौड़ी गढ़वालश्री शंभू प्रसाद बेबनीडिप्टी लीडर, सुरक्षा प्रोटोकॉल और तकनीकी परिशुद्धता के प्रभारी।
नायक राहुल सिंह (NSG कमांडो)ग्राम सेरा, चमोलीश्री कुंवर सिंहशिखर टीम के मुख्य सदस्य, जिन्होंने कठिन वेदर में रूट ओपन किया।
नायक पंकज सिंह दोसाद (NSG कमांडो)ग्राम ल्वेशाल, अल्मोड़ाश्री केशर सिंह दोसादचरम ऊंचाई (Death Zone) पर टीम के लॉजिस्टिक्स और संचार को संभाला।
कमांडो गौतम बुटोला (NSG एलीट विंग)सीमांत जनपद उत्तरकाशीप्रतिष्ठित सैन्य परिवारशिखर पर तिरंगा और एनएसजी का ध्वज फहराने वाले जांबाज।

एक दिन की नहीं है यह जीत: महीनों की फौलादी ट्रेनिंग और वैज्ञानिक योजना का परिणाम


माउंट एवरेस्ट की 8848.86 मीटर ऊंची चोटी पर हवा का दबाव बेहद कम होता है और 'डेथ ज़ोन' (8000 मीटर से ऊपर) में ऑक्सीजन की मात्रा इतनी कम होती है कि सामान्य इंसान चंद मिनटों में दम तोड़ दे। एनएसजी के प्रवक्ता के अनुसार, इस मिशन की सफलता के पीछे पिछले एक साल की कठोर और वैज्ञानिक सैन्य ट्रेनिंग शामिल थी:

  • माउंट सतोपंथ की फतह (अक्टूबर 2025): एवरेस्ट मिशन के पहले चरण के रूप में मेजर अखिलेश भट्ट ने अपनी टीम को लेकर गढ़वाल हिमालय की बेहद तकनीकी चोटी माउंट सतोपंथ (7,075 मीटर) पर सफल चढ़ाई की थी, ताकि टीम के फेफड़ों और मांसपेशियों को अत्यधिक ऊंचाई के अनुकूल (Acclimatization) ढाला जा सके।
  • चरम शीतकालीन प्रशिक्षण (लाहौल-स्पीति): इसके बाद टीम को हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति भेजा गया, जहां शून्य से 30 डिग्री नीचे के तापमान में भारतीय सेना की प्रसिद्ध डॉगरा स्काउट्स (Dogra Scouts) के साथ जांबाजों ने 'विंटर आइस क्राफ्ट और ग्लेशियर रेस्क्यू' का उन्नत कड़ा प्रशिक्षण लिया।
  • माउंट कानामो विजय (5,975 मीटर): सर्दियों के अंत में टीम ने एक और कठिन चोटी माउंट कानामो को फतह कर अपनी तकनीकी परिशुद्धता और रफ्तार को धार दी। इसी ट्रेनिंग का नतीजा था कि काठमांडू से एवरेस्ट शिखर की दूरी को मात्र 20 दिनों में नाप दिया गया।

 

'सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा': एनएसजी के ध्येय वाक्य को किया चरितार्थ


एनएसजी (National Security Guard) के महानिदेशक और प्रवक्ता ने दिल्ली मुख्यालय से जारी एक बयान में इस फतह को देश की सुरक्षा और सैन्य इतिहास का एक अविस्मरणीय क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह मिशन केवल एक पर्वतारोहण अभियान नहीं था, बल्कि यह एनएसजी के मूल ध्येय वाक्य 'सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा' (Omnipresent Most Excellent Protection) का एक जीवंत और व्यावहारिक उदाहरण है।


मेजर अखिलेश भट्ट और उनकी टीम ने जिस तरह बर्फीले तूफानों, हिमस्खलन (Avalanches) के खतरों और हड्डियों को जमा देने वाली हाड़-कंपाती ठंड के बीच अपनी 16 सदस्यीय टीम के एक-एक सदस्य को सुरक्षित रखते हुए शिखर तक पहुंचाया, वह भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों के नेतृत्व कौशल की दुनिया में एक महान मिसाल है।


इस एवरेस्ट अभियान की 4 सबसे बड़ी और ऐतिहासिक विशेषताएं


इस पर्वतारोहण अभियान ने वैश्विक स्तर पर कई नए रिकॉर्ड स्थापित किए हैं, जिन्हें मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं के तहत समझा जा सकता है:


  • दुर्लभ कीर्तिमान (The 20-Day Record): काठमांडू से रवाना होने के बाद मात्र 20 दिनों के भीतर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी के शिखर को छूना एवरेस्ट के इतिहास में एक दुर्लभ और अविश्वसनीय रिकॉर्ड है, जिसने अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहियों को हैरान कर दिया है।
  • पूर्ण देवभूमि नेतृत्व: मिशन के लीडर (टिहरी/देहरादून) और डिप्टी लीडर (पौड़ी) दोनों ही उत्तराखंड के थे। इसके अलावा टीम के तीन अन्य मुख्य स्ट्राइकर्स भी चमोली, अल्मोड़ा और उत्तरकाशी यानी पूरे उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
  • शून्य हताहत (Zero Casualty Rate): इतने तीव्र गति वाले और जोखिम भरे अभियानों में अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन सैन्य अनुशासन और अचूक योजना के कारण पूरी 16 सदस्यीय टीम सुरक्षित रही और मिशन शत-प्रतिशत सफल रहा।
  • युवाओं के लिए प्रेरणापुंज: यह अभियान देश और विशेष रूप से उत्तराखंड के युवाओं को यह कड़ा संदेश देता है कि यदि आपके पास अटूट अनुशासन, फौलादी संकल्प और निरंतर परिश्रम की शक्ति है, तो जीवन का कोई भी एवरेस्ट आपके सामने टिक नहीं सकता।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पूरे उत्तराखंड ने वीर सपूतों को किया सलाम


इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व सफलता की खबर जैसे ही सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों से उत्तराखंड पहुंची, पूरे राज्य में जश्न का माहौल बन गया। मेजर अखिलेश भट्ट के देहरादून स्थित आवास और टिहरी के पैतृक गांव में लोग मिठाइयां बांटकर खुशियां मना रहे हैं।


उत्तराखंड सरकार की ओर से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया के माध्यम से पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा:


"देवभूमि के वीर सपूतों ने एक बार फिर पूरी दुनिया में उत्तराखंड के साहस, नेतृत्व और सामर्थ्य का लोहा मनवाया है। मेजर अखिलेश भट्ट और उनकी पूरी एनएसजी टीम ने विश्व के सर्वोच्च शिखर पर भारत के आन-बान-शान के प्रतीक 'तिरंगे' के साथ देवभूमि के स्वाभिमान को लहराया है। पहाड़ों की विकट परिस्थितियों में पले-बढ़े हमारे युवाओं का यह शौर्य हर भारतीय को गौरवान्वित करने वाला है। राज्य सरकार और समस्त उत्तराखंडवासी अपने इन वीर बेटों को कोटि-कोटि नमन और सलाम करते हैं।"


देवभूमि की सैन्य और साहसिक परंपरा का एक नया स्वर्णिम अध्याय


माउंट एवरेस्ट पर एनएसजी की इस फतह ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि उत्तराखंड को यूं ही 'वीर प्रसूता' भूमि नहीं कहा जाता। देश की सीमाओं की रक्षा से लेकर खेल और एडवेंचर के सबसे कठिन मैदानों तक, उत्तराखंड के युवाओं का खून और उनका जज्बा हमेशा देश को शीर्ष पर रखता है।


मेजर अखिलेश भट्ट का नेतृत्व, सूबेदार सुरेश कुमार की तकनीकी कमान, और राहुल, पंकज व गौतम जैसे जांबाजों की शारीरिक ताकत ने यह दिखा दिया है कि जब उत्तराखंड का बेटा कुछ ठान लेता है, तो एवरेस्ट जैसी विशाल प्राकृतिक बाधाएं भी उसके कदमों के आगे नतमस्तक हो जाती हैं। यह फतह आने वाली कई पीढ़ियों को देश सेवा, अनुशासन और पर्वतारोहण के क्षेत्र में देश का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित करती रहेगी।




📢 खबरों को सबसे पहले पाने के लिए आपकी मीडिया को फॉलो करें
👉 WhatsApp Channel Join करें 👉 WhatsApp Group Join करें
Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
Previous Post Next Post