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देहरादून/कालसी, 01 जून, 2026: उत्तराखंड के विकास की रीढ़ और देश के ऊर्जा परिदृश्य को बदलने में सक्षम 300 मेगावाट की महत्वाकांक्षी लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना (Lakhwar Multipurpose Project) क्षेत्र में कानून, शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने एक बहुत बड़ा विधिक कदम उठाया है। जिला सूचना कार्यालय (सूवि देहरादून) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट के अनुसार, परियोजना क्षेत्र और निर्माण स्थलों पर कुछ असामाजिक तत्वों और स्थानीय संगठनों द्वारा उग्र आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और सरकारी कार्य में बाधा डालने की खुफिया इनपुट के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।
कालसी के उप जिला मजिस्ट्रेट (SDM) प्रेम लाल ने व्यापक जनहित, लोक शांति और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नए कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा-163 (जो पूर्व में दंड प्रक्रिया संहिता यानी CrPC की धारा-144 के रूप में जानी जाती थी) के अंतर्गत तत्काल प्रभाव से निषेधाज्ञा (Prohibitory Orders) लागू कर दी है। प्रशासन द्वारा जारी यह सख्त आदेश आज से ही पूरे परियोजना क्षेत्र में प्रभावी हो गया है और आगामी 6 महीने की लंबी अवधि तक लागू रहेगा।
खुफिया और प्रशासनिक रिपोर्टों के बाद लिया गया फैसला: जनहानि की थी बड़ी आशंका
इस संवेदनशील सीमांत और जनजातीय क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू करने का निर्णय अचानक नहीं लिया गया, बल्कि इसके पीछे गंभीर सुरक्षा कारणों और खुफिया विभागों की चेतावनियां थीं। लखवाड़ परियोजना के उपमहाप्रबंधक (जनपद-प्रथम), डाकपत्थर और कोतवाली कालसी के प्रभारी निरीक्षक द्वारा उप जिला मजिस्ट्रेट को एक अत्यंत गोपनीय और विस्तृत कानून-व्यवस्था संबंधी रिपोर्ट सौंपी गई थी।
सुरक्षा रिपोर्ट का मुख्य अंश:
"परियोजना क्षेत्र के भीतर और उसके आसपास कुछ विशेष व्यक्तियों, स्थानीय भू-स्वामियों और कतिपय यूनियनों/संगठनों द्वारा लगातार उग्र धरना-प्रदर्शन, चक्का जाम, उग्र जुलूस, नारेबाजी और कार्यस्थलों पर बिना अनुमति के अनधिकृत प्रवेश (Trespassing) किया जा रहा है। इसके कारण न केवल राष्ट्रीय महत्व की इस परियोजना का कार्य बाधित हो रहा है, बल्कि वहां तैनात इंजीनियरों, श्रमिकों और प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। स्थिति इतनी संवेदनशील है कि कभी भी हिंसक टकराव और भारी जनहानि होने की आशंका बनी हुई है।"
इन गंभीर और विपरीत परिस्थितियों का संज्ञान लेते हुए एसडीएम कालसी ने त्वरित गति से यह दंडात्मक निषेधाज्ञा जारी की है, ताकि असामाजिक तत्वों के मंसूबों को समय रहते नाकाम किया जा सके।
लखवाड़ परियोजना क्षेत्र में लागू निषेधाज्ञा (BNSS-163) के कड़े प्रतिबंधात्मक नियम
प्रशासन द्वारा जारी किए गए नए सुरक्षा प्रोटोकॉल और प्रतिबंधों को इस विस्तृत सांख्यिकीय एवं विधिक तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:
| विधिक बिंदु / प्रतिबंधित क्षेत्र (Parameters) | प्रशासन द्वारा लागू किए गए कड़े प्रतिबंधात्मक नियम (Prohibitions) | छूट / रियायत की विशेष शर्तें (Exceptions) |
| सुरक्षा घेरा / परिधि (Radius) | परियोजना के सभी निर्माण स्थलों, कार्यालयों और टनल से 500 मीटर की परिधि। | इस दायरे में केवल अधिकृत अधिकारियों और पास-धारक श्रमिकों को प्रवेश। |
| भीड़ / जनसमूह पर रोक | कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने के उद्देश्य से 5 या उससे अधिक व्यक्तियों का जमावड़ा प्रतिबंधित। | धार्मिक अनुष्ठान (पूर्व अनुमति पर) या सामान्य शांतिपूर्ण पारिवारिक आवागमन। |
| आंदोलन एवं प्रोपेगैंडा | बिना सक्षम मजिस्ट्रेट की लिखित अनुमति के धरना, प्रदर्शन, जुलूस, पुतला दहन और नारेबाजी पर पूर्ण रोक। | किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि इस क्षेत्र में पूरी तरह प्रतिबंधित। |
| घातक सामग्री / लाउडस्पीकर | लाठी, डंडा, किसी भी प्रकार के हथियार, चाकू, पेट्रोल/ज्वलनशील पदार्थ और ध्वनि विस्तारक यंत्र (Mic/Speaker) ले जाना प्रतिबंधित। | ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा बलों, पुलिस और सैन्य बलों के हथियारों पर यह नियम लागू नहीं। |
| डिजिटल / सोशल मीडिया | सोशल मीडिया (WhatsApp, FB, X) पर परियोजना के खिलाफ भड़काऊ, आपत्तिजनक या भ्रामक अफवाहें फैलाना प्रतिबंधित। | आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति और तथ्य-आधारित समाचारों के प्रसारण की छूट। |
500 मीटर का नो-गो ज़ोन: अनधिकृत प्रवेश करने पर दर्ज होगी सीधी एफआईआर
उप जिला मजिस्ट्रेट कालसी प्रेम लाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना के अंतर्गत आने वाले समस्त मुख्य कार्यस्थलों, प्रशासनिक भवनों, आवासीय परिसरों, डंपिंग जोनों और टनल निर्माण क्षेत्रों के 500 मीटर के दायरे को पूरी तरह से 'सुरक्षित क्षेत्र' (Secured Zone) घोषित कर दिया गया है।
इस परिधि के भीतर पांच या पांच से अधिक व्यक्तियों का किसी भी प्रकार के विरोध-प्रदर्शन या भीड़ जुटाने के उद्देश्य से एकत्र होना पूरी तरह से गैर-कानूनी माना जाएगा। यदि कोई भी व्यक्ति या समूह बिना वैध पहचान पत्र या सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति के इन क्षेत्रों में प्रवेश करने का प्रयास करता है, तो सुरक्षा बलों को उन्हें हिरासत में लेने और पुलिस को उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
हथियार, लाउडस्पीकर और सोशल मीडिया की अफवाहों पर डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक
सुरक्षा को और अधिक कड़ा करते हुए प्रशासन ने इस बात को रेखांकित किया है कि आंदोलन के नाम पर किसी भी प्रकार के हथियारों का प्रदर्शन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निषेधाज्ञा के तहत लाठी, डंडा, धारदार हथियार, चाकू, एसिड या किसी भी प्रकार के ज्वलनशील पदार्थ को क्षेत्र में लाना प्रतिबंधित है। इसके अतिरिक्त, बिना अनुमति के भारी आवाज वाले ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउडस्पीकरों) के उपयोग पर भी रोक लगा दी गई है ताकि अशांति न फैले।
डिजिटल निगरानी और साइबर सेल सक्रिय:
प्रशासन ने इस बार सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी कड़े प्रावधान किए हैं। पुलिस के साइबर सेल को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय स्तर पर चल रहे व्हाट्सएप ग्रुपों, फेसबुक पेजों और यूट्यूब चैनलों पर पैनी नजर रखें। यदि कोई भी व्यक्ति लखवाड़ परियोजना को लेकर भड़काऊ भाषण देता है, भ्रामक आंकड़े पेश करता है या कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए अफवाहें फैलाता पाया गया, तो उसे भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत सीधे जेल भेजा जाएगा।
परियोजना क्षेत्र के स्थानीय निवासियों और सुरक्षा व्यवस्था के 4 सबसे महत्वपूर्ण पहलू
प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करने के साथ-साथ आम जनता की सहूलियत और राष्ट्रीय हितों के बीच संतुलन बनाने के लिए चार प्रमुख बिंदु तय किए हैं:
- स्थानीय ग्रामीणों को आवागमन की शांतिपूर्ण छूट: इस निषेधाज्ञा से स्थानीय मूल निवासियों के दैनिक जीवन को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीणों को अपने घरों तक आने-जाने तथा अपने खेतों में कृषि कार्यों के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र के पारंपरिक रास्तों से शांतिपूर्ण तरीके से गुजरने की पूरी अनुमति रहेगी, बशर्ते वे किसी भीड़ या प्रदर्शन का हिस्सा न हों।
- सुरक्षा बलों के निर्देशों का पालन अनिवार्य: केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) या राज्य पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सुरक्षा जांच के दौरान जो भी निर्देश दिए जाएंगे, उनका पालन करना वहां से गुजरने वाले हर नागरिक के लिए अनिवार्य होगा।
- सरकारी मशीनरी को नुकसान पहुंचाने पर भारी जुर्माना: परियोजना के भारी वाहनों, क्रेन, टनल बोरिंग मशीनों, उपकरणों तथा अन्य सरकारी संपत्तियों को क्षति पहुंचाने या निर्माण कार्य को बलपूर्वक रोकने का कोई भी प्रयास अक्षम्य अपराध माना जाएगा और नुकसान की शत-प्रतिशत वसूली उपद्रवियों की निजी संपत्ति से की जाएगी।
- उप जिला मजिस्ट्रेट की आम जनता से विशेष अपील: एसडीएम कालसी ने समस्त क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे देश और राज्य के विकास के इस महाप्रकल्प को सुचारू रूप से चलाने में प्रशासन का सहयोग करें तथा किसी भी असामाजिक तत्व के बहकावे या अफवाहों में न आएं।'
क्यों महत्वपूर्ण है लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना? उत्तराखंड के विकास का पावरहाउस
लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना केवल देहरादून या कालसी क्षेत्र के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण उत्तराखंड और उत्तर भारत के छह राज्यों के लिए एक गेम-चेंजर (Game-changer) प्रोजेक्ट है। 300 मेगावाट क्षमता की इस जलविद्युत परियोजना के महत्व को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन: परियोजना के पूर्ण होने से उत्तराखंड को सालाना करोड़ों यूनिट पर्यावरण-अनुकूल और सस्ती बिजली मिलेगी, जिससे राज्य में उद्योगों और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली संकट हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।
- छह राज्यों को मिलेगा पीने और सिंचाई का पानी: यमुना नदी पर बन रहे इस विशाल बांध से न केवल उत्तराखंड बल्कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश को भारी मात्रा में पेयजल और खेतों के लिए सिंचाई का पानी उपलब्ध होगा।
- स्थानीय रोजगार और पर्यटन का विकास: इस परियोजना के निर्माण से जौनसार-बावर क्षेत्र के सैकड़ों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। आने वाले समय में यह विशाल जलाशय एक बहुत बड़ा टूरिस्ट डेस्टिनेशन और वाटर स्पोर्ट्स हब बनेगा, जिससे स्थानीय आर्थिकी मजबूत होगी।
राष्ट्रीय संपत्तियों की सुरक्षा में शून्य-सहिष्णुता की नीति
देहरादून जिला प्रशासन और कालसी उप जिला मजिस्ट्रेट द्वारा लखवाड़ परियोजना क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा-163 लागू करना यह स्पष्ट संदेश देता है कि सरकार राष्ट्रीय महत्व की विकास परियोजनाओं की सुरक्षा को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) यानी शून्य-सहिष्णुता की नीति पर चल रही है। लोकतंत्र में अपनी मांगों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन यदि उस प्रदर्शन की आड़ में विकास कार्यों को ठप करने, सरकारी संपत्ति को फूंकने या देश के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जाएगी, तो कानून के हाथ बेहद सख्त होंगे।
अगले 6 महीनों के लिए लागू की गई यह निषेधाज्ञा लखवाड़ परियोजना के अभियंताओं और निर्माण कंपनियों को एक भयमुक्त और सुरक्षित वातावरण प्रदान करेगी, जिससे यह 300 मेगावाट का पावर प्रोजेक्ट अपनी तय समय-सीमा के भीतर पूरा हो सकेगा। स्थानीय निवासियों को भी चाहिए कि वे इस राष्ट्रीय यज्ञ में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें और जिला प्रशासन द्वारा जारी शांति व्यवस्था के इस आदेश का पूर्ण रूप से सम्मान और अनुपालन करें।
