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देहरादून, 01 जून, 2026: उत्तराखंड की राजधानी और मुख्य प्रशासनिक केंद्र देहरादून में आम नागरिकों की समस्याओं, शिकायतों और प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने के लिए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने एक बेहद क्रांतिकारी और तकनीक-आधारित व्यवस्था की शुरुआत की है। सूचना विभाग (सू.वि. देहरादून) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट के अनुसार, जिला मुख्यालय में आयोजित होने वाले पारंपरिक 'जनता दरबार' को अब और अधिक परिणामोन्मुख, पारदर्शी और जवाबदेह बनाते हुए प्रत्येक सोमवार को ‘समाधान दिवस’ के रूप में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।
इस व्यवस्था के तहत जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि अब अधिकारियों की केवल मौखिक या फाइलों तक सीमित रहने वाली हिदायतें काम नहीं करेंगी। जनता दरबार में आने वाली हर एक शिकायत और जन-समस्या को तत्काल प्रभाव से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल (CM Helpline Portal) पर ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा। इस डिजिटल कदम से प्रत्येक शिकायत की नियमित और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग, जीपीएस ट्रैकिंग और समयबद्ध (Time-bound) निस्तारण सुनिश्चित हो सकेगा, जिससे भ्रष्टाचार और हीलाहवाली पर पूरी तरह रोक लगेगी।
ऋषिपर्णा सभागार में 132 शिकायतों पर तुरंत एक्शन: भूमि विवाद सबसे ऊपर
सोमवार को कलेक्ट्रेट स्थित ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित पहले 'समाधान दिवस' के दौरान जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने विभिन्न दूर-दराज के क्षेत्रों से आए फरियादियों की समस्याओं को बेहद गंभीरता और संवेदनशीलता से सुना। इस विशेष दिवस पर कुल 132 लोगों ने अपनी शिकायतें प्रत्यक्ष रूप से जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कीं।
समीक्षा और प्राप्त आवेदनों के विश्लेषण में यह तथ्य सामने आया कि इनमें से अधिकांश शिकायतें भूमि विवादों, अवैध कब्जों और सीमांकन से जुड़ी थीं। इसके अलावा, समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों द्वारा ऋण माफी, गंभीर बीमारियों के लिए आर्थिक सहायता, ग्रामीण क्षेत्रों में पैदल पुलिया निर्माण, मुख्य मार्गों तथा सार्वजनिक रास्तों से जुड़े अतिक्रमण की समस्याएं भी प्रमुख रूप से उठाई गईं। जिलाधिकारी ने मौके पर ही सभी संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों को बुलाकर त्वरित निस्तारण के कड़े निर्देश दिए।
समाधान दिवस में लिए गए बड़े फैसले और प्रशासनिक जिम्मेदारियां
इस विस्तृत तालिका के माध्यम से विभिन्न विभागों को जारी किए गए कड़े निर्देशों और नीतिगत फैसलों को समझा जा सकता है:
| विभाग / क्षेत्र (Department/Area) | मुख्य शिकायत / जन-समस्या | जिलाधिकारी द्वारा लिया गया कड़ा प्रशासनिक फैसला | नोडल प्रशासनिक अधिकारी (Zonal Officer) |
| राजस्व एवं पुलिस विभाग | भूमि विवाद, अतिक्रमण, किरायेदार विवाद | फास्ट ट्रैक मोड में त्वरित समाधान के लिए उच्च स्तरीय विशेष सेल का गठन। | जनपद स्तरीय विशेष राजस्व एवं पुलिस टीम |
| स्वास्थ्य विभाग (Health) | दूरस्थ गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं, प्रसव पीड़ा | बिना सड़क वाले गांवों की गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग, एडवांस सुरक्षित अस्पताल भर्ती। | मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) देहरादून |
| राजस्व / उपजिलाधिकारी | बुजुर्गों की संपत्ति पर अवैध कब्जा एवं धमकी | बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए तत्काल बेदखली और कानूनी कार्रवाई का सख्त आदेश। | एसडीएम सदर / संबंधित पुलिस क्षेत्राधिकारी |
| उद्यान एवं कृषि विभाग | ओलावृष्टि से फसलों/बागानों की भारी क्षति | PM फसल बीमा योजना के तहत नुकसान का त्वरित आकलन कर तुरंत मुआवजा वितरण। | जिला उद्यान अधिकारी |
| शिक्षा विभाग / उपजिलाधिकारी | आर्थिक तंगी से स्कूल फीस न भरने पर सर्टिफिकेट रोकना | स्कूल प्रबंधन से समन्वय कर बच्ची का साल और प्रमाण पत्र सुरक्षित कराने का निर्देश। | उपजिलाधिकारी (SDM) सदर |
भूमि विवादों के लिए बनेगा 'हाई-लेवल स्पेशल सेल': राजस्व मामलों का होगा फास्ट ट्रैक
जनता दरबार में भूमि विवादों, पैमाइश (सीमांकन), अवैध कब्जे, किरायेदारों द्वारा मकान खाली न करने और भू-माफियाओं के बढ़ते दखल से जुड़ी शिकायतों की सबसे अधिक संख्या को देखते हुए जिलाधिकारी ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। डॉ. आशीष चौहान ने जनपद स्तर पर एक 'उच्च स्तरीय विशेष सेल' (High-Level Special Cell) गठित करने के निर्देश जारी किए हैं। यह विशेष सेल पूरी तरह समर्पित होकर निम्नलिखित मामलों का फास्ट ट्रैक मोड में निपटारा करेगा:
- भूमि सीमांकन और पैमाइश: जमीन की नाप-जोख से जुड़े सालों पुराने लंबित विवाद।
- अवैध कब्जा और अतिक्रमण: सरकारी या निजी संपत्तियों पर भू-माफियाओं द्वारा किया गया कब्जा।
- किरायेदार संबंधी विवाद: वरिष्ठ नागरिकों और मकान मालिकों को किरायेदारों द्वारा प्रताड़ित करने के मामले।
- ऋण भुगतान एवं राजस्व वसूली: बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाओं से जुड़े विवादों का विधिक निस्तारण।
दूरस्थ क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी: सीएमओ को निर्देश
पहाड़ी और दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को बेहद मानवीय और कड़े निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि देहरादून जनपद के ऐसे दूरस्थ गांव, जो अभी तक मुख्य मोटर मार्गों या पक्की सड़कों से नहीं जुड़ पाए हैं, वहां की गर्भवती महिलाओं का एक डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाए।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें और आशा कार्यकत्रियां इन महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच (Antenatal Care) और निगरानी करेंगी। जिलाधिकारी ने विशेष बल देते हुए कहा कि जो महिलाएं 'हाई रिस्क प्रेग्नेंसी' (High Risk Pregnancy) की श्रेणी में चिन्हित की जाएंगी, उन्हें प्रसव (Delivery) की संभावित तिथि से कुछ दिन पहले ही सुरक्षित रूप से बड़े अस्पतालों या प्रसूति केंद्रों में भर्ती कराया जाए, ताकि ऐन वक्त पर सड़क न होने के कारण किसी मां या नवजात की जान को खतरा न हो। इसके अलावा, जिला अस्पतालों में मरीजों को लंबी लाइनों से बचाने के लिए तत्काल 'टोकन व्यवस्था' लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
मानवीय संवेदना: बुजुर्गों, पूर्व सैनिकों और असहाय महिलाओं के लिए तुरंत न्याय
'समाधान दिवस' के दौरान जिलाधिकारी का बेहद संवेदनशील और न्यायप्रिय रूप देखने को मिला, जब उन्होंने समाज के सबसे कमजोर और बुजुर्ग तबके की शिकायतों पर ऑन-स्पॉट फैसला सुनाया:
- 89 वर्षीय पूर्व सैनिक की पुकार: देहरादून के 89 वर्षीय वयोवृद्ध पूर्व सैनिक राधेश्याम ने रोते हुए शिकायत की कि उनके किरायेदार ने न केवल उनके मकान पर कब्जा कर रखा है बल्कि खाली करने का अनुरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है। जिलाधिकारी ने मामले को देश के रक्षक के स्वाभिमान से जोड़ते हुए तत्काल संबंधित पुलिस क्षेत्राधिकारी (CO) को व्यक्तिगत रूप से दखल देकर मकान खाली कराने और बुजुर्ग को सुरक्षा देने के निर्देश दिए।
- अवैध कब्जे पर भड़के डीएम: इसी तरह बुजुर्ग भरत भूषण मित्तल द्वारा अपनी निजी संपत्ति पर अवैध कब्जे और धमकी की शिकायत पर एसडीएम सदर को चौबीस घंटे के भीतर मौका मुआयना कर कार्रवाई करने को कहा गया।
- बेसहारा मां की मदद: डालनवाला की रहने वाली मुस्कान ने बताया कि अत्यधिक आर्थिक तंगी के कारण वह अपने बेटे की स्कूल फीस जमा नहीं कर पाई, जिसके कारण स्कूल प्रशासन ने बच्चे का ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) और मार्कशीट रोक दी है, जिससे उसका आगे का दाखिला रुक गया है। जिलाधिकारी ने इसे बच्चे के भविष्य का हनन मानते हुए एसडीएम सदर को निर्देश दिए कि वे खुद स्कूल प्रशासन से बात करें और मानवीय आधार पर बिना फीस के कारण प्रमाणपत्र रोकने की प्रथा को समाप्त कराएं।
- विधवा एवं बुजुर्ग महिलाओं को आर्थिक संबल: डोईवाला की विधवा लता थपलियाल और आराघर की बुजुर्ग महिला मंचल बाला की आर्थिक लाचारी को देखते हुए समाज कल्याण विभाग को उन्हें तत्काल नियमानुसार आर्थिक सहायता और पेंशन योजनाओं से जोड़ने के निर्देश दिए गए।
देहरादून के ग्रामीण और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 4 मुख्य नीतिगत निर्देश
जिले की बुनियादी सुविधाओं और सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने के लिए समाधान दिवस में निम्नलिखित चार बड़े निर्देश जारी किए गए:
- चकराता और लाखामंडल में 'खुशियों की सवारी': जौनसार-बावर के जनजातीय क्षेत्रों चकराता, क्वांसी और ऐतिहासिक लाखामंडल में नवजात शिशुओं और प्रसूताओं को घर छोड़ने वाली 'खुशियों की सवारी' एंबुलेंस सेवा को तत्काल शुरू करने के लिए सीएमओ को अधिकृत किया गया है।
- जौलीग्रांट-थानो मार्ग पर इलेक्ट्रिक बस सेवा: देहरादून से डोईवाला, भानियावाला, जौलीग्रांट एयरपोर्ट और थानो मार्ग पर जनता की भारी मांग को देखते हुए परिवहन निगम और देहरादून स्मार्ट सिटी को इस रूट पर तत्काल इलेक्ट्रिक या स्मार्ट बस सेवा शुरू करने का फिजिबिलिटी प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है।
- ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को तत्काल मुआवजा: जनपद के विशलाड़, अठगांव, बोंदूर, तपलाड़ और द्वारखात क्षेत्रों में हाल ही में हुई भीषण ओलावृष्टि से नगदी फसलों और सेब-आड़ू के बागानों को हुए भारी नुकसान की भरपाई के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत त्वरित सर्वेक्षण कराकर उद्यान विभाग को तुरंत मुआवजा जारी करने का आदेश दिया गया।
- सार्वजनिक मार्गों से अतिक्रमण हटाने की डेडलाइन: ग्राम कुंजा ग्रांट में सार्वजनिक रास्ते को रोककर किए गए अवैध निर्माण की शिकायत पर एसडीएम विकासनगर को दोनों पक्षों को बुलाकर बिना किसी पक्षपात के कानून सम्मत तरीके से अतिक्रमण ढहाने के निर्देश दिए गए।
लापरवाही करने वाले विभागों को स्वतः संज्ञान लेने की अंतिम चेतावनी
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने समाधान दिवस के समापन पर उपस्थित सभी आला अधिकारियों को कड़े लहजे में सचेत किया। उन्होंने कहा कि जनता का सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटना और छोटी-छोटी समस्याओं के लिए जिलाधिकारी कार्यालय तक आना इस बात का प्रमाण है कि निचले स्तर पर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया:
"सभी विभागों को अब 'स्वतः संज्ञान' (Suo Motu) की कार्यप्रणाली अपनानी होगी। नागरिकों की शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण ही शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि किसी भी विभाग द्वारा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर दर्ज शिकायतों को बिना ठोस कारण के लंबित रखा गया या गलत रिपोर्ट लगाकर बंद किया गया, तो संबंधित विभागाध्यक्ष के खिलाफ कड़ी विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।"
बैठक में उपस्थित रहा जिला प्रशासन का शीर्ष अमला
इस पहले हाई-टेक 'समाधान दिवस' के अवसर पर जिलाधिकारी के साथ पूरी प्रशासनिक टीम मौजूद रही ताकि ऑन-स्पॉट फाइलों का निस्तारण किया जा सके। बैठक में मुख्य रूप से अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह, एसडीएम स्मृता परमार, एसडीएम अर्पणा ढौंडियाल, एसडीएम अपूर्वा सिंह, परियोजना निदेशक विक्रम सिंह और जिला विकास अधिकारी (DDO) सुनील कुमार सहित लोनिवि, जल संस्थान, विद्युत, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के सभी जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।
डिजिटल सुशासन और जनता के प्रति जवाबदेही की नई मिसाल
देहरादून में प्रत्येक सोमवार को 'समाधान दिवस' मनाने और हर एक शिकायत को सीधे 'मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल' से लिंक करने का जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान का यह फैसला देवभूमि के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़े और सकारात्मक बदलाव की बयार है। अक्सर देखा जाता है कि जनता दरबारों में शिकायतें केवल कागजों पर दर्ज होकर ठंडे बस्ते में चली जाती हैं, लेकिन ऑनलाइन ट्रैकिंग और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग लागू होने से अब बाबू या अधिकारी शिकायतों को दबा नहीं पाएंगे।
भूमि विवादों के लिए अलग से 'हाई-लेवल सेल' का गठन और दूरस्थ क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं के लिए डिजिटल ट्रैकिंग जैसे निर्णय यह साबित करते हैं कि वर्तमान जिला प्रशासन केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज के सबसे अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के स्वास्थ्य, शिक्षा और संपत्ति की सुरक्षा के लिए भी पूरी तरह संवेदनशील है। यदि यह व्यवस्था धरातल पर इसी कड़ाई से लागू रही, तो देहरादून आने वाले समय में देश के लिए 'डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शी सुशासन' का एक बेहतरीन मॉडल बनकर उभरेगा।
