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देहरादून। देश में केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और उनके कथित राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर विपक्षी दलों का विरोध तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई(एम) की देहरादून जिला कमेटी के आह्वान पर राजधानी देहरादून में केंद्र सरकार, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों के खिलाफ एक व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया।
इस प्रदर्शन के माध्यम से पार्टी कार्यकर्ताओं और विभिन्न लोकतांत्रिक संगठनों ने विपक्षी नेताओं के खिलाफ की जा रही प्रशासनिक कार्रवाइयों पर कड़ा ऐतराज जताया। कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की और गांधी पार्क के मुख्य द्वार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह तथा प्रवर्तन निदेशालय (ED) का पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया।
जिला कार्यालय से गांधी पार्क तक निकाला गया जुलूस
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस विरोध कार्यक्रम की शुरुआत देहरादून स्थित माकपा के जिला कार्यालय से हुई। कार्यालय पर एकत्रित होने के बाद बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, विभिन्न श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि, युवा, छात्र और लोकतांत्रिक विचारधारा से जुड़े लोग एक शांतिपूर्ण जुलूस के रूप में सड़कों पर उतरे।
यह जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से होता हुआ ऐतिहासिक गांधी पार्क के मुख्य द्वार पर पहुंचा। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं के हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता बनाए रखने और लोकतंत्र की रक्षा करने संबंधी नारे लिखे हुए थे। गांधी पार्क पहुंचकर यह जुलूस एक विरोध सभा में परिवर्तित हो गया, जहां पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने वर्तमान राजनीतिक व प्रशासनिक परिदृश्य पर अपने विचार रखे।
मुख्य वक्ताओं के तर्क: केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पर कार्रवाई का विरोध
विरोध सभा को संबोधित करते हुए सीपीआई(एम) के जिला सचिव शिव प्रसाद देवली ने हाल ही में केरल में हुई प्रशासनिक हलचल का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 27 मई 2026 को केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (Pinarayi Vijayan) के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई कार्रवाई पूरी तरह से राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। उन्होंने इस कदम को लोकतांत्रिक मूल्यों और संघीय ढांचे पर आघात बताते हुए आरोप लगाया कि इसका एकमात्र उद्देश्य विपक्ष की आवाज को दबाना और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) की छवि को धूमिल करना है।
सभा में उपस्थित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी इस विषय पर विस्तार से बात की:
- राजेन्द्र नेगी (केंद्रीय कमेटी सदस्य): उन्होंने आरोप लगाया कि देश के भीतर वर्तमान में उन सभी राजनेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वतंत्र संगठनों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है, जो सरकार की जनविरोधी नीतियों और आर्थिक फैसलों के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाते हैं।
- राजेंद्र पुरोहित (उत्तराखंड राज्य कमेटी सचिव): उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि आज प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), आयकर विभाग (Income Tax) और अन्य केंद्रीय वित्तीय एजेंसियों का उपयोग निष्पक्ष जांच संस्थाओं के रूप में न होकर एक राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में गैर-भाजपा या विपक्ष की सरकारें हैं, वहां जानबूझकर छापेमारी की आवृत्ति बढ़ाई जा रही है।
- लेखराज (CITU जिला महामंत्री): उन्होंने सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को इस राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़ते हुए कहा कि जब भी देश की जनता बेरोजगारी, महंगाई, निजीकरण, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगती है, तब ध्यान भटकाने के लिए विपक्षी नेताओं के खिलाफ इन एजेंसियों को सक्रिय कर दिया जाता है।
राजनीतिक विरोधियों को डराने और दोहरे रवैये का आरोप
पार्टी के वक्ताओं ने देश की जनता के विवेक पर भरोसा जताते हुए कहा कि अब आम नागरिक भी "भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई" के नाम पर किए जा रहे इन प्रशासनिक प्रयासों के पीछे की वास्तविक राजनीति को समझ चुके हैं। संगठन का मानना है कि जांच एजेंसियों द्वारा अपनाया जा रहा वर्तमान रवैया पूरी तरह से दोहरा है।
नेताओं ने तर्क दिया कि जो राजनीतिक नेता सत्ता पक्ष में शामिल हो जाते हैं या सरकार का समर्थन कर देते हैं, उनके खिलाफ चल रही पुरानी जांचें और मुकदमे अचानक ठंडे बस्ते में चले जाते हैं या उनकी गति बेहद धीमी हो जाती है। इसके विपरीत, जो लोग सरकार की नीतियों की तार्किक आलोचना करना जारी रखते हैं, उनके परिसरों पर लगातार छापे मारे जाते हैं और उन्हें पूछताछ के नाम पर प्रताड़ित किया जाता है। माकपा सचिवमंडल के सदस्य कमरुद्दीन ने स्पष्ट किया कि वामपंथी और लोकतांत्रिक ताकतें इस प्रकार की दमनकारी प्रशासनिक राजनीति से प्रभावित होकर पीछे नहीं हटेंगी और सड़कों पर अपना लोकतांत्रिक प्रतिरोध जारी रखेंगी।
प्रदर्शन एवं कार्यक्रम का मुख्य विवरण
| क्र.सं. | प्रदर्शन के मुख्य मानक (Protest Metrics) | प्राप्त विवरण एवं प्रशासनिक संदर्भ (Details & Context) |
|---|---|---|
| 1. | आयोजक संगठन | कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) - देहरादून जिला कमेटी |
| 2. | प्रदर्शन की तिथि एवं स्थान | 29 मई, 2026 | देहरादून (उत्तराखंड) |
| 3. | मुख्य विरोध का कारण | केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED, CBI, IT) का कथित दुरुपयोग |
| 4. | तत्कालिक घटनाक्रम संदर्भ | 27 मई 2026 को केरल के पूर्व सीएम पिनाराई विजयन के आवास पर ED की कार्रवाई |
| 5. | पुतला दहन (किनका किया गया) | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह एवं प्रवर्तन निदेशालय (ED) |
| 6. | प्रदर्शन का मार्ग | माकपा जिला कार्यालय से गांधी पार्क मुख्य द्वार तक (जुलूस) |
| 7. | मुख्य नारा एवं संकल्प | "संविधान बचाओ-लोकतंत्र बचाओ", "ED-CBI का दुरुपयोग बंद करो" |
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता
देहरादून में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में माकपा के राज्य और जिला स्तर के पदाधिकारियों सहित विभिन्न अनुषांगिक संगठनों जैसे सीटू (CITU) और एसएफआई (SFI) के कार्यकर्ताओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान प्रशासनिक कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय पुलिस बल भी मुस्तैद रहा।
प्रदर्शन में शामिल होने वाले मुख्य सदस्यों की सूची इस प्रकार है:
- राज्य एवं जिला कमेटी के वरिष्ठ सदस्य: शम्भू प्रसाद मंगाई, विजय भट्ट, मनमोहन, हिमांशु चौहान, बी एस पयाल, रवीन्द्र नौडियाल और कृष्ण गुनियाल।
- छात्र एवं युवा संगठनों के प्रतिनिधि: स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की ओर से अयाज खान, मुकुल, विप्लव अनंत और भरत नेगी।
अन्य सक्रिय कार्यकर्ता एवं महिला प्रतिनिधि: विनोद खंडूरी, नूरेशा अंसारी, प्रेमा, कुसुम नौडियाल, अंजली, अनीता रावत, बिना बिष्ट, संगीता नैथानी, अमर बहादुर शाही, दीपक, प्रदीप कुमार, भगत सिंह, गुरमीत सिंह और हैप्पी सिंह सहित बड़ी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने देश के लोकतांत्रिक ढांचे, संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और जनता के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपने वैचारिक और व्यावहारिक संघर्ष को भविष्य में और अधिक मजबूत करने का सामूहिक संकल्प लिया।
