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देहरादून, 02 जून, 2026: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के संतुलित, समग्र और सतत विकास को गति देने के लिए जिला प्रशासन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का खाका पूरी तरह तैयार कर लिया है। सूचना एवं लोक संपर्क विभाग (सू.वि. देहरादून) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट के अनुसार, जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में जिला योजना संरचना की एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में जिलाधिकारी ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि अब पारंपरिक और लकीर के फकीर वाले प्रस्तावों को जिला योजना में जगह नहीं मिलेगी। उन्होंने सभी सरकारी महकमों को सख्त हिदायत दी कि देहरादून की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए केवल जनहित आधारित, व्यावहारिक और नवाचारयुक्त (Innovative) योजनाएं ही जिला प्लान में शामिल की जाएं। जिलाधिकारी ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों (सांसदों, विधायकों और पंचायत प्रतिनिधियों) से प्राप्त जन-उपयोगी सुझावों और प्रस्तावों को इस योजना संरचना में अनिवार्य रूप से समाहित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि विकास का लाभ सीधे धरातल पर आम जनता तक पहुंचे।
बजट का पूरा गणित: नए कार्यों से लेकर स्वरोजगार तक ₹99.39 करोड़ का आवंटन
समीक्षा बैठक के दौरान जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी शशि कांत गिरी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जनपद देहरादून हेतु स्वीकृत कुल बजटीय परिव्यय का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष देहरादून जनपद के विकास के लिए कुल 99.39 करोड़ रुपये (लगभग 100 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम बजट अनुमोदित किया गया है।
देहरादून जिला योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजटीय वर्गीकरण
प्रशासन द्वारा बजट को पारदर्शी तरीके से अलग-अलग प्राथमिकताओं में विभाजित किया गया है, जिसे इस विस्तृत तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:
| बजटीय श्रेणी (Budget Category) | आवंटित धनराशि (करोड़ रुपये में) | कुल बजट का प्रतिशत (Approx) | मुख्य उद्देश्य और कार्यक्षेत्र (Focus Area) |
| मानदेय एवं वचनबद्ध योजनाएं | ₹37.19 करोड़ | 37.4% | पूर्व से चल रहे संविदा कर्मियों का मानदेय, अनिवार्य प्रशासनिक और विभागीय प्रतिबद्धताएं। |
| चालू एवं अधूरे निर्माण कार्य | ₹10.39 करोड़ | 10.5% | पिछले वर्षों की अधूरी पड़ी सड़कों, भवनों, पुलियों और पेयजल लाइनों को हर हाल में पूरा करना। |
| स्वरोजगार संबंधी योजनाएं | ₹15.93 करोड़ | 16.0% | युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सब्सिडी, टूलकिट वितरण और आजीविका संवर्धन। |
| नए एवं अभिनव (इनोवेटिव) कार्य | ₹36.25 करोड़ | 36.1% | जिलों में नई तकनीकों का समावेश, आधुनिक खेती, पर्यटन संवर्धन और लीक से हटकर नए प्रोजेक्ट। |
| कुल अनुमोदित परिव्यय (Total) | ₹99.39 करोड़ | 100% | देहरादून जनपद का समग्र, संतुलित और जनहित आधारित चहुंमुखी विकास। |
"हर विभाग दे एक अभिनव परियोजना": जिलाधिकारी की सख्त चेतावनी
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने प्रशासनिक जवाबदेही तय करते हुए सभी विभागाध्यक्षों के लिए एक नया नियम अनिवार्य कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग कम से कम एक अभिनव (Innovative) एवं स्थायी (Sustainable) परियोजना को जिला योजना में अनिवार्य रूप से शामिल करे। इसके साथ ही, अधिकारियों को केवल कागजी प्रस्ताव नहीं देना होगा, बल्कि उस अभिनव योजना से समाज को क्या फायदा होगा और उसके अपेक्षित परिणाम (Expected Outcomes) क्या होंगे, इसकी एक विस्तृत 'इम्पैक्ट रिपोर्ट' भी अग्रिम रूप से प्रस्तुत करनी होगी।
जिलाधिकारी ने कड़े लहजे में चेतावनी दी कि जिले में पर्याप्त धनराशि उपलब्ध होने के बावजूद यदि योजनाएं समय पर पूरी नहीं होती हैं, तो इसे संबंधित विभाग की गंभीर विफलता (Failure) माना जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि लेटलतीफी के कारण बजट सरेंडर होने या काम लटकने पर सीधे तौर पर संबंधित जिला स्तरीय अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी और उनके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक एवं विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
ब्लूबेरी से लेकर ट्राउट मछली तक: ग्रामीण आर्थिकी को मजबूत करने पर जोर
देहरादून की ग्रामीण और अर्ध-शहरी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रिवर्स माइग्रेशन (पलायन रोकने) को बढ़ावा देने के लिए जिलाधिकारी ने प्राथमिक क्षेत्र (Primary Sector) पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को जिला योजना का मुख्य केंद्र बिंदु बताते हुए उद्योग, कृषि, उद्यान (Horticulture), पशुपालन, मत्स्य पालन (Fisheries), दुग्ध विकास और आजीविका संवर्धन से जुड़े प्रस्तावों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने परंपरागत खेती से हटकर हाई-वैल्यू एग्रीकल्चर (High-Value Agriculture) पर फोकस करने को कहा। उन्होंने जिले के अनुकूल जलवायु वाले क्षेत्रों में निम्नलिखित चार विशिष्ट गतिविधियों को विशेष रूप से प्रोत्साहित करने पर जोर दिया:
- ब्लूबेरी फार्मिंग (Blueberry Farming): बाजार में अत्यधिक मांग और ऊंची कीमत के कारण किसानों की आय को कई गुना बढ़ाने के लिए इसके क्लस्टर विकसित किए जाएंगे।
- ट्राउट मत्स्य उत्पादन (Trout Fish Production): ठंडे पानी वाले पहाड़ी क्षेत्रों (जैसे चकराता, कालसी) में हाई-टेक ट्राउट फिश फार्मिंग को जिला योजना से बजट दिया जाएगा।
- पोल्ट्री फार्मिंग (Poultry Farming): युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही आजीविका से जोड़ने के लिए पोल्ट्री क्लस्टर्स का निर्माण।
- गन्ना उत्पादन और नकदी फसलें: मैदानी क्षेत्रों (जैसे डोईवाला, ऋषिकेश, विकासनगर) में गन्ना किसानों को आधुनिक तकनीकी और उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराना।
योजना चयन के तीन कड़े मापदंड: भूमि, विवाद-रहित स्थिति और समयबद्धता
जिला योजना के बजट का शत-प्रतिशत सदुपयोग सुनिश्चित करने और सरकारी धन को फंसने से बचाने के लिए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने योजनाओं के चयन के लिए तीन अत्यंत कड़े और व्यावहारिक मापदंड निर्धारित किए हैं:
- भूमि की उपलब्धता (Land Availability): जिला योजना में केवल उन्हीं परियोजनाओं को शामिल किया जाएगा, जिनके लिए सरकारी भूमि पहले से उपलब्ध हो या भूमि हस्तांतरण (Land Transfer) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी हो।
- विवाद-रहित स्थिति (Dispute-Free): यदि किसी प्रस्तावित योजना की जमीन पर कोर्ट केस, स्थानीय निवासियों का विरोध या कोई भी राजस्व संबंधी विवाद है, तो उसे तुरंत जिला योजना से बाहर कर दिया जाएगा।
- समयबद्धता (Time-Bound Completion): केवल उन्हीं कार्यों को बजट मिलेगा जिन्हें वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 के भीतर या अधिकतम अगले वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीनों तक हर हाल में पूरा कर जनता को समर्पित किया जा सके।
विभागीय समन्वय और बुनियादी ढांचे के विकास के 4 मुख्य नीतिगत निर्देश
बैठक में विभिन्न विभागों को जमीनी स्तर पर काम सुधारने के लिए जिलाधिकारी द्वारा निम्नलिखित चार महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए:
- स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की शत-प्रतिशत गारंटी: शिक्षा विभाग को सख्त निर्देश देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद देहरादून का कोई भी सरकारी विद्यालय बिजली, शुद्ध पेयजल और छात्र-छात्राओं के लिए पृथक शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं रहना चाहिए। मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) को निर्देश दिए गए हैं कि वे तत्काल ऐसे स्कूलों को चिन्हित कर इसी जिला योजना के बजट से वहां व्यवस्थाएं दुरुस्त कराएं।
- केंद्रीय और राज्य योजनाओं का कन्वर्जेंस: जिलाधिकारी ने कहा कि बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए विभाग अलग-अलग टुकड़ों में काम करने के बजाय केंद्र सरकार (जैसे मनरेगा, जल जीवन मिशन) और राज्य सरकार की योजनाओं को जिला योजना के साथ समन्वित (Convergence) करें। इससे कम बजट में बड़े और स्थायी एसेट्स (Assets) तैयार हो सकेंगे।
- अधूरी और लंबित योजनाओं को पहली प्राथमिकता: नए कामों को शुरू करने से पहले पिछले वर्षों की अधूरी एवं लंबित पड़ी योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर बजट देकर पूर्ण किया जाएगा, ताकि सरकारी निवेश बेकार न जाए।
- धरातल पर दिखना चाहिए 100 करोड़ का प्रभाव: डॉ. आशीष चौहान ने दो टूक कहा कि राज्य सरकार ने जनपद को जो लगभग 100 करोड़ रुपये दिए हैं, उसका गुणात्मक प्रभाव (Qualitative Impact) धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखना चाहिए। फाइलों में विकास दिखाने का दौर अब समाप्त हो चुका है।
क्रेडिट नहीं, काम चाहिए: प्रस्तावित कार्यों का होगा 'थर्ड पार्टी भौतिक सत्यापन'
बैठक के समापन पर जिलाधिकारी ने एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा निर्णय लेते हुए सभी अधिकारियों के पसीने छुड़ा दिए। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अभिनव शाह को निर्देशित किया कि जिला योजना के अंतर्गत जितने भी कार्यों को धनराशि आवंटित की जा रही है, उन सभी का अनिवार्य रूप से भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कराया जाएगा।
इसके लिए प्रशासन एक स्वतंत्र टास्क फोर्स या थर्ड पार्टी एजेंसी से औचक निरीक्षण करवाएगा। यदि किसी भी विभाग द्वारा जनहित और तय मानकों के अनुरूप धनराशि का सदुपयोग नहीं पाया गया, निर्माण कार्य की गुणवत्ता खराब मिली, या बिना काम किए कागजों पर भुगतान पाया गया, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध सीधे वित्तीय अनियमितता का मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में उपस्थित रहा जिले का शीर्ष प्रशासनिक अमला
विकास कार्यों के इस महामंथन में जिला प्रशासन और विकास से जुड़े सभी शीर्ष अधिकारी कलेक्ट्रेट सभागार में उपस्थित थे। मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुत विकासपरक प्रस्तावों की विस्तृत तकनीकी और वित्तीय जानकारी जिलाधिकारी के समक्ष रखी।
बैठक में मुख्य रूप से उप प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) नीरज कुमार शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. मनोज शर्मा, परियोजना निदेशक डीआरडीए विक्रम सिंह, जिला विकास अधिकारी (DDO) सुनील कुमार, मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) वी.के. ढौंडियाल सहित लोक निर्माण विभाग, जल संस्थान, विद्युत, सिंचाई, कृषि और उद्योग विभाग के सभी जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।
देहरादून में पारदर्शी और जवाबदेह विकास के नए युग का सूत्रपात
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए देहरादून जनपद की ₹99.39 करोड़ की जिला योजना की यह समीक्षा बैठक उत्तराखंड के प्रशासनिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने जिस प्रकार से योजनाओं के चयन के लिए 'नो-विवाद' और 'रेडी-लैंड' की नीति अपनाई है, उससे सरकारी धन की बर्बादी रुकेगी। अक्सर देखा जाता है कि बजट जारी होने के बाद सालों तक जमीन न मिलने के कारण योजनाएं लटकी रहती हैं, लेकिन इस नई व्यवस्था से इस समस्या का अंत होगा।
इसके अलावा, बजट का एक बड़ा हिस्सा (₹15.93 करोड़ स्वरोजगार के लिए और ₹36.25 करोड़ नए अभिनव कार्यों के लिए) आरक्षित करना यह दर्शाता है कि प्रशासन का ध्यान केवल कंक्रीट के ढांचे खड़े करने पर नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन, आधुनिक कृषि (ब्लूबेरी और ट्राउट फार्मिंग) और स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं देने पर है। 'भौतिक सत्यापन' और 'जवाबदेही' के कड़े प्रावधानों के कारण अब देहरादून जिला योजना का एक-एक पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने के बजाय सीधे देवभूमि के विकास और आम नागरिक की खुशहाली में तब्दील होगा।
