मसूरी, 14 अप्रैल 2026: पहाड़ों की रानी मसूरी में पार्किंग की समस्या पहले ही पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। इसी बीच, नगर पालिका के एक विवादित निर्णय ने शहर में हलचल मचा दी है। प्रशासन ने पिक्चर पैलेस स्थित कार पार्किंग को बंद कर वहां 'पालिका बाजार' बनाने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद से स्थानीय राजनीति और मजदूर संघों के बीच तीखी तकरार शुरू हो गई है।
विवाद का मुख्य सारांश
| बिंदु | विवरण |
| विवाद का केंद्र | पिक्चर पैलेस कार पार्किंग। |
| प्रशासन का निर्णय | पार्किंग हटाकर 'पालिका बाजार' बनाना। |
| विरोध का कारण | पर्यटन सीजन में पार्किंग की भीषण कमी और मजदूर संघ के अनुबंध का उल्लंघन। |
| पालिका का तर्क | माल रोड के 100 पटरी व्यापारियों को पालिका बाजार में समायोजित करना। |
पालिका का तर्क और तैयारी
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी गौरव मसीन के अनुसार, माल रोड पर पटरी व्यापार कर रहे लोगों को व्यवस्थित करने के लिए 'पालिका बाजार' का निर्माण आवश्यक है। इसके लिए 100 लोगों की पहली सूची भी तैयार की गई है। पालिका का दावा है कि पार्किंग की वैकल्पिक व्यवस्था 'टाउन हॉल' में कर दी गई है।
सभासद ने खोला मोर्चा
पालिका सभासद गीता कुमाई ने इस निर्णय का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने बताया कि बोर्ड बैठक में ही इस प्रस्ताव पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई गई थी, जिसे दरकिनार कर दिया गया। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
"जहां मसूरी को नई पार्किंग स्थल चयन करने चाहिए थे, वहां एकमात्र पार्किंग को बंद करना मसूरी की छवि धूमिल करने जैसा है। चर्चाएं हैं कि टाउन हॉल को पालिका द्वारा अपने चहेतों को ठेके पर दिया जा रहा है।"
मजदूर संघ की चेतावनी: "हमारा हक न छीना जाए"
पार्किंग का संचालन कर रहे मजदूर संघ ने इस कदम को पूरी तरह से अनुचित बताया है। मजदूर संघ के महामंत्री शोभन पवार ने स्पष्ट किया कि उनके साथ 1 वर्ष का अनुबंध है जो जुलाई में समाप्त होगा, उससे पहले उन्हें हटाना सरासर गलत है।
मजदूर नेता संजय टम्टा ने इसे एक बड़ा घोटाला करार देते हुए कहा कि हाथ-रिक्शा उन्मूलन के तहत यह पार्किंग उन्हें शहर के मजदूरों को समायोजित करने के लिए दी गई थी। यदि मजदूरों का हक छीना गया, तो संगठन उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
पर्यटन पर संकट के बादल
मसूरी का पर्यटन सीजन पीक पर है। ऐसे में शहर की मुख्य पार्किंग का बंद होना पर्यटकों के लिए भारी परेशानी का सबब बनेगा। जाम की समस्या और पार्किंग की किल्लत मसूरी के व्यापार और छवि दोनों पर बुरा असर डाल सकती है।
अब सबकी निगाहें नगर पालिका और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस गतिरोध को कैसे समाप्त करते हैं। क्या मसूरी को एक और पार्किंग मिलेगी या केवल बाजार की राजनीति में पर्यटकों और मजदूरों का नुकसान होगा?
