उत्तरकाशी: बड़कोट में हेली एम्बुलेंस बनी 'देवदूत'; नवजात को सांस लेने में दिक्कत होने पर जच्चा-बच्चा को किया एयरलिफ्ट

बड़कोट (उत्तरकाशी), 13 अप्रैल 2026: उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में सरकार द्वारा संचालित हेली एम्बुलेंस सेवा एक बार फिर जीवनदायिनी साबित हुई है। उत्तरकाशी जिले के बड़कोट में नवजात शिशु की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे और उसकी मां को तत्काल हायर सेंटर के लिए एयरलिफ्ट किया गया है।

नवजात को सांस लेने में दिक्कत होने पर जच्चा-बच्चा को किया एयरलिफ्ट

मामले का संक्षिप्त विवरण

  1. स्थान: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), बड़कोट।
  2. मरीज: अनामिका (पत्नी प्रवेश, निवासी-ग्राम कुर्सील)।
  3. समस्या: प्रसव के बाद नवजात शिशु को सांस लेने में गंभीर समस्या।
  4. तत्काल कदम: मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के निर्देशन में हेली एम्बुलेंस सेवा द्वारा हायर सेंटर रेफर।

क्या है पूरी घटना?

जानकारी के अनुसार, बड़कोट तहसील के ग्राम कुर्सील निवासी अनामिका को प्रसव पीड़ा के चलते सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बड़कोट लाया गया था। यहां चिकित्सकों की देखरेख में महिला का सुरक्षित प्रसव कराया गया। हालांकि, जन्म के तुरंत बाद नवजात शिशु को सांस लेने में काफी कठिनाई होने लगी।

शिशु की नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉ. अंगद राणा और डॉ. रोहित भंडारी ने तुरंत मामले की सूचना उत्तरकाशी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. बी.एस. रावत को दी। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए, सीएमओ के निर्देशन में जच्चा और बच्चा दोनों को बेहतर उपचार के लिए हेली एम्बुलेंस के जरिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।

पहाड़ों के लिए वरदान 'हेली एम्बुलेंस'

दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तरकाशी जैसे जिलों में स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों में यह हेली एम्बुलेंस सेवा किसी वरदान से कम नहीं है। सड़क मार्ग से हायर सेंटर पहुँचने में लगने वाले घंटों के समय को यह सेवा मिनटों में बदल देती है, जिससे जान बचाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

डॉ. अंगद राणा ने बताया कि अस्पताल में हर संभव प्राथमिक उपचार के बाद, नवजात की जान बचाने के लिए समय रहते उसे बड़े चिकित्सा संस्थान में भेजना आवश्यक था। फिलहाल, जच्चा और बच्चा दोनों को सुरक्षित हायर सेंटर पहुँचा दिया गया है, जहाँ उनका उपचार चल रहा है।

स्वास्थ्य विभाग की इस त्वरित कार्रवाई और हेली एम्बुलेंस सेवा की उपलब्धता ने एक नवजात की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई है। प्रशासन के इस सक्रिय रुख की स्थानीय लोगों ने भी जमकर सराहना की है।

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