श्री कैंचीधाम वार्षिक मेला 2026: 15 जून को स्थापना दिवस पर उमड़ेगा देश-विदेश के श्रद्धालुओं का सैलाब


Aapki Media AI


देहरादून/नैनीताल, 10 जून, 2026: बाबा नीम करौली महाराज की पावन तपोस्थली और वैश्विक आस्था के सबसे बड़े केंद्रों में से एक, नैनीताल जनपद स्थित 'श्री कैंचीधाम' (Shri Kainchi Dham) का ऐतिहासिक वार्षिक स्थापना दिवस मेला आगामी 15 जून को आयोजित होने जा रहा है। देश और दुनिया भर से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भारी आमद (Peak Footfall) और वीआईपी मूवमेंट को देखते हुए उत्तराखंड शासन ने सुरक्षा और सुगम यातायात के लिए अपनी कमर कस ली है।


सूचना एवं लोक संपर्क विभाग (सूचना ब्यूरो, देहरादून) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट के अनुसार, राज्य के मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने बुधवार (10 जून) को सचिवालय में एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में मुख्य सचिव ने 15 जून के स्थापना दिवस मेले को पूरी तरह से सुव्यवस्थित, सुरक्षित और बाधा मुक्त रूप से आयोजित कराने के लिए पुलिस, कुमाऊं जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग (PWD) और परिवहन विभाग के आला अधिकारियों को युद्धस्तर पर आवश्यक कदम उठाने के कड़े निर्देश दिए हैं।

 

श्री कैंचीधाम वार्षिक मेला 2026: 15 जून को स्थापना दिवस पर उमड़ेगा देश-विदेश के श्रद्धालुओं का सैलाब


यातायात संकुलन से निपटने की बड़ी रणनीति: अगले 10 दिन के लिए बनेगा स्पेशल 'रूट प्लान'


कैंचीधाम में हर साल स्थापना दिवस पर नैनीताल-अल्मोड़ा हाईवे पर लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम (Traffic Jam) को देखते हुए मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने लोक निर्माण विभाग और यातायात पुलिस को सबसे सख्त हिदायत दी है। उन्होंने कहा कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के आवागमन का पीक टाइम (Peak Time) शुरू हो चुका है, जो अगले 10 दिनों तक लगातार जारी रहेगा।


मुख्य सचिव का रणनीतिक विज़न:


"लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए संपूर्ण मेला क्षेत्र को जोनल और सेक्टोरल प्लान (Zonal and Sectoral Plan) में विभाजित किया जाए। प्रत्येक जोन और सेक्टर में मजिस्ट्रेटों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की तैनाती रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए की जाए। इसके साथ ही, पार्किंग मैनेजमेंट और वैकल्पिक रूट प्लान का व्यापक प्रचार-प्रसार केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि संपूर्ण उत्तराखंड, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और अन्य पड़ोसी राज्यों में भी डिजिटल और प्रिंट मीडिया के माध्यम से अभी से किया जाए, ताकि बाहर से आ रहे श्रद्धालुओं को पहले से रूट डायवर्जन और रुकने की व्यवस्थाओं की सटीक जानकारी हो।"


 

श्री कैंचीधाम वार्षिक मेला 2026: प्रशासनिक और सुरक्षा सुशासन की रूपरेखा


मेले के सफल आयोजन, वीआईपी और वीवीआईपी मूवमेंट और बुनियादी जनसुविधाओं के लिए मुख्य सचिव द्वारा तय की गई विभागीय जिम्मेदारियों का विवरण इस प्रकार है:

प्रशासनिक एवं तकनीकी मोर्चा (Sectors)मुख्य सचिव द्वारा जारी विधिक निर्देश (Directives)जिम्मेदार प्रशासनिक एवं सुरक्षा विंग (Stakeholders)
मेला क्षेत्र सुरक्षा (Security Matrix)संपूर्ण कैंचीधाम और आस-पास के क्षेत्रों को जोन और सेक्टर में बांटना।जिला प्रशासन नैनीताल एवं कुमाऊं पुलिस विंग।
ट्रैफिक एवं इंफ्रास्ट्रक्चर (PWD)वैकल्पिक मार्गों की ब्लैक टॉपिंग (डामरीकरण) और सख्त रूट डायवर्जन।लोक निर्माण विभाग (PWD) एवं एसपी ट्रैफिक।
परिवहन सुगमता (Mobility)होल्डिंग पार्किंग एरिया से मंदिर तक निरंतर 'शटल सेवा' (Shuttle Service) का संचालन।परिवहन विभाग एवं स्थानीय प्रशासन।
आपातकालीन तंत्र (Disaster/Health)एम्बुलेंस और ऑन-साइट मेडिकल कैंप्स के साथ 'निकासी योजना' (Evacuation Plan)।स्वास्थ्य विभाग, एसडीआरएफ एवं मंदिर सुरक्षाकर्मी।
मूलभूत नागरिक सुविधाएं (Civic Amenities)मेला और पार्किंग क्षेत्रों में प्रकाशीकरण, शुद्ध पेयजल तथा टॉयलेट्स की व्यवस्था।नगर निकाय, जल संस्थान एवं विद्युत विभाग।

मल्टीलेवल पार्किंग में 'वन-वे' इन-आउट सिस्टम; मंदिर तक चलेंगी शटल बसें


कैंचीधाम में भौगोलिक सीमाओं के कारण पार्किंग हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। मुख्य सचिव ने इस समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करते हुए निर्देश दिए कि नवनिर्मित मल्टीलेवल पार्किंग (Multilevel Parking) के लिए वाहनों के आने (Entry) और जाने (Exit) का मार्ग पूरी तरह से अलग और सुव्यवस्थित (One-way Loop) रखा जाए। इससे पार्किंग के भीतर या उसके मुख्य द्वार पर गाड़ियां नहीं फंसेंगी और जाम की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी।
इसके साथ ही, मुख्य सचिव ने बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों की सुविधा के लिए पार्किंग स्थलों से लेकर मुख्य मंदिर परिसर तक आने-जाने के लिए पर्याप्त संख्या में शटल सेवा (Shuttle Buses) की उचित और निरंतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पुलिस को निर्देश दिए कि मुख्य हाईवे पर किसी भी निजी वाहन को अनधिकृत रूप से पार्क न होने दिया जाए और चिन्हित पार्किंग स्थलों पर ही वाहनों को पार्क कराया जाए।


सौन्दर्यीकरण और लाइटिंग का काम तुरंत हो पूरा; वैकल्पिक मार्गों की होगी 'ब्लैक टॉपिंग'


मेले के धार्मिक और आध्यात्मिक स्वरूप को भव्यता प्रदान करने के लिए मुख्य सचिव ने भवाली और कैंचीधाम क्षेत्र में चल रहे सौन्दर्यीकरण (Beautification) एवं प्रकाशीकरण (High-mast Lighting) कार्यों को आगामी दो दिनों के भीतर हर हाल में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रात्रि के समय भी श्रद्धालुओं को आवागमन में कोई असुविधा न हो।


लोनिवि के अभियंताओं को निर्देशित करते हुए सीएस ने कहा कि मुख्य मार्ग के अतिरिक्त जितने भी लिंक रोड या वैकल्पिक मार्ग (Alternative Routes) डायवर्जन के लिए उपयोग किए जाने हैं, उन सभी की तत्काल ब्लैक टॉपिंग (Black Topping - डामरीकरण) और पैच वर्क का काम पूरा कर लिया जाए। सड़कों पर कहीं भी निर्माण सामग्री बिखरी नहीं होनी चाहिए ताकि धूल और मलबे से बचा जा सके। इसके साथ ही पार्किंग और मेला क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में शुद्ध पेयजल के टैंकर और मोबाइल टॉयलेट्स (बायो-टॉयलेट्स) की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के सख्त आदेश दिए गए हैं।


स्थापना दिवस मेले को सफल और सुरक्षित बनाने वाले 4 मुख्य प्रशासनिक स्तंभ


लाखों की भीड़ को नियंत्रित करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए शासन द्वारा अपनाए जा रहे चार सबसे महत्वपूर्ण विधिक व व्यावहारिक मानक निम्नलिखित हैं:


  • आकस्मिक निकासी योजना (Emergency Evacuation Plan): मुख्य सचिव ने किसी भी अप्रिय स्थिति या भगदड़ जैसी आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने के लिए एक विस्तृत 'इवैक्युएशन प्लान' को अनिवार्य रूप से तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।
  • सुरक्षाकर्मियों की संयुक्त ब्रीफिंग: इस निकासी योजना को केवल कागजों तक सीमित न रखकर, पुलिस बल, एसडीआरएफ (SDRF) और मंदिर समिति के निजी सुरक्षाकर्मियों के साथ ऑन-ग्राउंड मॉक ड्रिल (Mock Drill) कर अच्छे से ब्रीफ करने को कहा गया है ताकि संकट के समय त्वरित रिस्पॉन्स (Quick Response) मिल सके।
  • सतत हितधारक संवाद (Stakeholder Dialogue): भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) को सुचारू बनाने के लिए जिला प्रशासन को स्थानीय व्यापारियों, टैक्सी यूनियनों, मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और क्षेत्रीय जनता के साथ लगातार संवाद (Dialogue) बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
  • रीयल-टाइम मेडिकल रिस्पॉन्स: संपूर्ण मेला रूट पर पर्याप्त संख्या में जीवन रक्षक दवाओं से लैस एम्बुलेंस, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती 24 घंटे शिफ्टवार सुनिश्चित की जाएगी।

 

वर्चुअल माध्यम से जुड़े कुमाऊं के शीर्ष अधिकारी; कमिश्नर दीपक रावत ने दिया फीडबैक


सचिवालय में आयोजित इस समीक्षा बैठक की खास बात यह रही कि इसमें देहरादून मुख्यालय के साथ-साथ जमीनी स्तर पर काम कर रहे कुमाऊं मंडल के शीर्ष नौकरशाह और पुलिस कप्तान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Virtual Medium) के माध्यम से सीधे जुड़े रहे।


बैठक में शासन स्तर पर सचिव श्री धीराज सिंह गर्ब्याल उपस्थित रहे, जबकि कुमाऊं से आयुक्त (कमिश्नर) श्री दीपक रावत, आईजी कुमाऊं श्रीमती निवेदिता कुकरेती, जिलाधिकारी नैनीताल श्री ललित मोहन रयाल एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) श्री मंजुनाथ टीसी ने प्रतिभाग किया। कमिश्नर दीपक रावत और एसएसपी मंजुनाथ टीसी ने मुख्य सचिव को कैंचीधाम में अब तक किए गए रूट डायवर्जन के ट्रायल्स, सुरक्षा व्यवस्थाओं और शटल बसों के रूट्स के संबंध में एक विस्तृत प्रेजेंटेशन के माध्यम से फीडबैक दिया और आश्वस्त किया कि स्थानीय प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।


सुरक्षित और दिव्य 'कैंचीधाम मेला' उत्तराखंड की प्रतिष्ठा का विषय


मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में संपन्न हुई यह उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक यह दर्शाती है कि उत्तराखंड सरकार धार्मिक पर्यटन और बड़े जन-समागमों के प्रबंधन को लेकर कितनी गंभीर और प्रो-एक्टिव है। बाबा नीम करौली महाराज का कैंचीधाम आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है; फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग से लेकर एप्पल के स्टीव जॉब्स और देश-दुनिया के दिग्गज राजनेता व अभिनेता यहाँ शीश नवा चुके हैं। ऐसे में 15 जून को आयोजित होने वाला वार्षिक मेला केवल नैनीताल जिले की कानून व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह देवभूमि उत्तराखंड की वैश्विक छवि और उसकी 'स्मार्ट टूरिज्म मैनेजमेंट' (Smart Tourism Management) क्षमता की परीक्षा है।


मुख्य सचिव द्वारा जोनल और सेक्टर प्लान लागू करने, मल्टीलेवल पार्किंग में 'वन-वे' इन-आउट सिस्टम बनाने और सबसे महत्वपूर्ण—एक 'आकस्मिक निकासी योजना' (Evacuation Plan) की ऑन-ग्राउंड ब्रीफिंग कराने के निर्देश बेहद व्यावहारिक और सराहनीय हैं। पहाड़ों की संकरी भौगोलिक परिस्थितियों में भीड़ और ट्रैफिक को नियंत्रित करना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन यदि पुलिस, पीडब्ल्यूडी और प्रशासन आपसी तालमेल के साथ मुख्य सचिव के इन आदेशों को शत-प्रतिशत धरातल पर उतारते हैं, तो बाबा के दर पर आने वाले हर श्रद्धालु को एक दिव्य, सुगम और सुरक्षित अनुभूति प्राप्त होगी, जो उत्तराखंड के सुशासन की साख को और मजबूत करेगी।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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