विकसित भारत-2047 के संकल्प को पूरा करने में सबका सहयोग जरूरी; ₹6,940 करोड़ की 12 मेगा परियोजनाओं की समीक्षा में CM धामी सख्त


Aapki Media AI


देहरादून, 08 जून, 2026: उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को वैश्विक स्तर का बनाने के लिए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बहुत बड़ी प्रशासनिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। सोमवार को सचिवालय में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने 'प्रगति पोर्टल' (Proactive Governance and Timely Implementation) के माध्यम से राज्य में चल रही ₹6,940 करोड़ की कुल 12 प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं की बिंदुवार और विस्तृत समीक्षा की।

विकसित भारत-2047 के संकल्प को पूरा करने में सबका सहयोग जरूरी; ₹6,940 करोड़ की 12 मेगा परियोजनाओं की समीक्षा में CM धामी सख्त


बैठक में कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 'विकसित भारत-2047' के महान संकल्प को पूरा करने में उत्तराखंड की भूमिका अग्रणी होनी चाहिए और इसके लिए हर स्तर पर नौकरशाही का पूर्ण सहयोग और समयबद्धता अनिवार्य है। उन्होंने सुस्त परियोजनाओं की लेटलतीफ़ी पर नाराजगी व्यक्त करते हुए जवाबदेही (Accountability) तय करने और काम में तेजी लाने के लिए एक कड़ा प्रशासनिक ढांचा और समयसीमा निर्धारित कर दी है।


सीएम का कड़ा अल्टीमेटम: 50% पूरी हो चुकी परियोजनाएं 15 अक्टूबर 2026 तक हों मुकम्मल


 

परियोजनाओं की कछुआ गति पर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी कार्यदायी संस्थाओं और विभागाध्यक्षों को एक कड़ा अल्टीमेटम (Deadline) जारी किया है।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मुख्य निर्देश:


 

"राज्य की विकास परियोजनाओं में अनावश्यक देरी से न केवल सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ता है, बल्कि इसका सीधा प्रतिकूल प्रभाव जनहित, पर्यटन और राज्य की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है। इसलिए, जिन महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर 50 प्रतिशत या उससे अधिक का कार्य धरातल पर पूरा हो चुका है, उन्हें हर हाल में आगामी 15 अक्टूबर 2026 तक शत-प्रतिशत पूर्ण कर जनता को समर्पित किया जाए। परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की कोताही या टालमटोल मिलने पर संबंधित शीर्ष अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और नियमानुसार उनके खिलाफ तत्काल कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।"


₹6,940 करोड़ की 12 प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाएं: एक नजर में


इस वृहद समीक्षा बैठक के दौरान जिन महत्वपूर्ण परिवहन, ऊर्जा, सामरिक सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति का ऑडिट किया गया, उनका विवरण नीचे दी गई तालिका में संकलित है:


विभाग और क्षेत्र (Sectors Involved)समीक्षा के दायरे में आईं मुख्य परियोजनाएं (Key Projects under Review)चिन्हित प्रशासनिक अड़चनें (Identified Bottlenecks)नया कड़ा निगरानी तंत्र (New Monitoring Framework)
परिवहन विभाग (Transport)रामनगर आईएसबीटी, रानीखेत बस टर्मिनल, तथा ताड़ीखेत डिपो एवं कार्यशाला।भूमि हस्तांतरण और प्रशासनिक स्वीकृतियां।मुख्यमंत्री स्तर पर: प्रत्येक माह नियमित समीक्षा।
ऊर्जा विभाग (Energy)बनबसा (चम्पावत) एवं रुद्रप्रयाग विद्युत उपकेंद्र (Substations) परियोजनाएं।वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियां (Forest Clearance)।मुख्य सचिव स्तर पर: प्रत्येक 10 दिनों में सघन ट्रैकिंग।
सामरिक व तीर्थाटन मार्गचारधाम सड़क परियोजनाएं, अस्कोट-लिपुलेख मार्ग, और माणा पास सड़क परियोजना।भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) व क्षतिपूर्ति भुगतान।जिलाधिकारी स्तर पर: जनपद स्तर के लंबित मामलों की व्यक्तिगत निगरानी।
राष्ट्रीय राजमार्ग (NHAI & PWD)हरिद्वार एवं काशीपुर क्षेत्र की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं।अंतर-विभागीय समन्वय की कमी।पोर्टल मैपिंग: प्रगति पोर्टल के माध्यम से रीयल-टाइम मॉनिटरिंग।

थ्री-टियर मॉनिटरिंग सिस्टम: अब सीएम हर महीने और मुख्य सचिव हर 10 दिन में लेंगे रिपोर्ट


परियोजनाओं को फाइलों के जाल से बाहर निकालने के लिए मुख्यमंत्री ने एक कड़ा थ्री-टियर (त्रि-स्तरीय) निगरानी तंत्र लागू करने का आदेश दिया है। अब इन 12 बड़ी परियोजनाओं की प्रगति की रिपोर्टिंग केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगी।


  • प्रथम स्तर (CM Level): मुख्यमंत्री स्वयं प्रत्येक माह 'प्रगति पोर्टल' के माध्यम से लाइव प्रोग्रेस की समीक्षा करेंगे।
  • द्वितीय स्तर (Chief Secretary Level): राज्य के मुख्य सचिव प्रत्येक 10 दिन में संबंधित विभागों के सचिवों और कार्यदायी संस्थाओं के साथ बैठक कर ग्राउंड प्रोग्रेस की जांच करेंगे।
  • तृतीय स्तर (DM Level): सभी जिलावासियों/जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जनपदों में वन भूमि हस्तांतरण (Forest Land Transfer), मुआवजा वितरण और पर्यावरण क्लीयरेंस के मामलों की व्यक्तिगत रूप से फाइल-टू-फाइल मॉनिटरिंग कर उनका निस्तारण करवाएं।

 

चारधाम और सीमांत सामरिक सड़कें राज्य की लाइफलाइन: मुख्यमंत्री


मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि चारधाम ऑल-वेदर रोड, अस्कोट-लिपुलेख मार्ग और चीन सीमा को जोड़ने वाली माणा पास सड़क परियोजनाएं केवल यातायात का साधन नहीं हैं। ये परियोजनाएं देश की सुरक्षा, सामरिक दृष्टिकोण (Strategic Importance), पर्यटन, स्थानीय व्यापार और सीमांत क्षेत्रों से हो रहे पलायन को रोकने के लिए उत्तराखंड की लाइफलाइन (Lifeline) हैं।


उन्होंने निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं में वन भूमि हस्तांतरण या क्षतिपूर्ति भुगतान के कारण काम रुका हुआ है, वहां संबंधित विभाग (जैसे वन विभाग, राजस्व विभाग और लोनिवि) आपस में समन्वित रूप से त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें। इसके लिए विभागों को स्पष्ट समयसीमा निर्धारित कर काम करने को कहा गया है।
 

उत्तराखंड इंफ्रास्ट्रक्चर सुशासन के 4 मुख्य स्तंभ 


राज्य में 6,940 करोड़ रुपये के इन प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने के लिए अपनाई जा रही चार सूत्रीय रणनीतियां इस प्रकार हैं:


  • प्रगति पोर्टल का प्रभावी उपयोग: प्रगति पोर्टल को एक सक्रिय और कड़े डिजिटल निगरानी तंत्र के रूप में उपयोग किया जाएगा, जहां किसी भी परियोजना के लटकने पर संबंधित नोडल अधिकारी के डैशबोर्ड पर तुरंत रेड फ्लैग (Red Flag) दिखाई देगा।
  • विशेष कार्ययोजना (Special Action Plan): जिन परियोजनाओं की भौतिक प्रगति वर्तमान में निर्धारित मानकों से कम पाई गई है, उनके लिए संबंधित सचिवों को एक सप्ताह के भीतर विशेष कार्ययोजना तैयार कर शीघ्र परिणाम देने के निर्देश दिए गए हैं।
  • आर्थिक गतिविधियों को गति: विद्युत उपकेंद्रों और परिवहन टर्मिनलों के समयबद्ध निर्माण से राज्य में उद्योगों, निवेश, व्यापार और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा।
  • समयबद्ध क्षतिपूर्ति वितरण: भूमि अधिग्रहण से प्रभावित होने वाले स्थानीय नागरिकों को उनके मुआवजे और क्षतिपूर्ति का भुगतान बिना किसी कड़े प्रशासनिक विलंभ के सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से करने पर जोर दिया गया है।

 

बैठक में शीर्ष नौकरशाही और नीति-निर्माताओं की रही मौजूदगी


सचिवालय के मुख्य सभागार में आयोजित इस बेहद महत्वपूर्ण बैठक में उत्तराखंड शासन के शीर्ष नीति-निर्माता और नौकरशाह उपस्थित थे। इनमें प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, प्रमुख सचिव डॉ. आर.मीनाक्षी सुंदरम, सचिव श्री बृजेश कुमार संत, सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, अपर सचिव डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट और अपर सचिव श्री बंशीधर तिवारी सहित लोक निर्माण विभाग, ऊर्जा, एनएचएआई, बीआरओ और परिवहन विभाग के कई अन्य वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ और अभियंता मौजूद रहे। इसके अलावा, राज्य के सभी जनपदों के जिलाधिकारी वर्चुअल माध्यम (Video Conferencing) से इस बैठक से जुड़े रहे।


फाइल कल्चर से डिलीवरेबल सुशासन की ओर बढ़ते कदम


मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा ₹6,940 करोड़ की परियोजनाओं की प्रगति पोर्टल के माध्यम से समीक्षा करना और 15 अक्टूबर 2026 की कड़ी समयसीमा निर्धारित करना उत्तराखंड में 'डिलीवरेबल सुशासन' (Deliverable Governance) की एक नई मिसाल है। अक्सर उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों में भौगोलिक विषमताओं, वन भूमि की स्वीकृतियों और अंतर-विभागीय तालमेल की कमी के कारण अरबों रुपये की योजनाएं वर्षों तक लटकी रहती हैं, जिससे परियोजना की लागत (Project Cost) भी बढ़ जाती है।


मुख्यमंत्री का हर महीने खुद मॉनिटरिंग करने का निर्णय और मुख्य सचिव को हर 10 दिन में समीक्षा सौंपना यह साबित करता है कि सरकार अब 'फाइल कल्चर' से ऊपर उठकर धरातल पर परिणाम देखना चाहती है। रामनगर आईएसबीटी, रानीखेत बस टर्मिनल और सीमांत क्षेत्रों की सामरिक सड़कें देवभूमि के आर्थिक और सामाजिक विकास का आधार हैं। यदि सरकार का यह कड़ा प्रशासनिक हंटर इसी तरह चलता रहा, तो तय समय में इन बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं का पूरा होना निश्चित है, जो उत्तराखंड को वर्ष 2047 के 'विकसित भारत' के संकल्प में एक अग्रणी और समृद्ध राज्य के रूप में स्थापित करेगा।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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