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देहरादून, 05 जून, 2026: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जनसुविधाओं और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने अब बेहद आक्रामक और सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने गुरुवार (04 जून) को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के साथ जीएमएस रोड से लेकर सहारनपुर चौक तक उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) द्वारा चलाए जा रहे अंडरग्राउंड (भूमिगत) विद्युत केबल बिछाने के कार्यों का औचक स्थलीय निरीक्षण (Field Inspection) किया।
निरीक्षण के दौरान धरातल पर काम की बेहद धीमी रफ्तार, मलबे का अव्यवस्थित फैलाव और पर्याप्त जनशक्ति (Manpower) की कमी देखकर जिलाधिकारी का पारा चढ़ गया। उन्होंने मौके पर ही कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और एक बड़ी दंडात्मक कार्रवाई करते हुए यूपीसीएल के अधीक्षण अभियंता (Superintending Engineer - SE) का वेतन रोकने (Salary Hold) के आदेश जारी कर दिए। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने रोड कटिंग समिति की अनुमति शर्तों का उल्लंघन करने पर सख्त विधिक कार्रवाई की चेतावनी देते हुए आगामी 05 दिनों के भीतर हर हाल में कार्य पूर्ण करने का अंतिम अल्टीमेटम (Deadline) थमा दिया है।
बल्लीवाला फ्लाईओवर से सहारनपुर चौक तक निरीक्षण: सड़कों पर बिखरा मिला मलबा
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक परमेन्द्र डोभाल के साथ जीएमएस रोड स्थित बल्लीवाला फ्लाईओवर से कांवली रोड होते हुए सहारनपुर चौक तक के पूरे मार्ग का पैदल और वाहनों के माध्यम से सघन निरीक्षण किया। इस दौरान यह मुख्य मार्ग पूरी तरह से खुदा हुआ और अव्यवस्थित पाया गया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी की सख्त टिप्पणी:
"पब्लिक यूटिलिटी (जनसुविधा) से जुड़े प्रोजेक्ट्स का इस तरह कछुआ गति से चलना और मुख्य सड़कों को महीनों तक बंधक बनाकर रखना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कांवली रोड से सहारनपुर चौक तक जगह-जगह सड़क की खुदाई के बाद निर्माण सामग्री और भारी मलबा सड़कों पर लावारिस छोड़ दिया गया है। इससे न केवल राजधानी की यातायात व्यवस्था चरमरा रही है, बल्कि आम नागरिकों, पैदल यात्रियों और व्यापारियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। इस मलबे और निर्माण सामग्री को तत्काल प्रभाव से सड़क से हटाया जाए।"
यूपीसीएल भूमिगत केबलिंग परियोजना: डीएम के कड़े निर्देश और समयसीमा
इस महत्वपूर्ण स्थलीय निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी द्वारा विभिन्न विभागों को जारी किए गए प्रशासनिक निर्देशों, नई समयसीमा और कार्ययोजना का पूरा विवरण इस तालिका में देखा जा सकता है:
| विभाग / कार्यदायी संस्था (Agency) | वर्तमान परियोजना एवं स्थान (Project Location) | डीएम द्वारा चिन्हित कमियां (Deficiencies) | प्रशासनिक आदेश एवं नई समयसीमा (Directives & Deadline) |
| यूपीसीएल (UPCL) | जीएमएस रोड (बल्लीवाला फ्लाईओवर) से कांवली रोड होते हुए सहारनपुर चौक। | धीमी प्रगति, मैनपॉवर व मशीनों की भारी कमी, सड़कों पर बिखरा मलबा। | अधीक्षण अभियंता का वेतन रोका; 500-500 मीटर के पैच बनाकर 05 दिन में काम पूरा करने का अल्टीमेटम। |
| लोनिवि (PWD) | प्रभावित मार्गों का पुनर्स्थापन (Road Restoration)। | यूपीसीएल और गेल द्वारा समय पर सड़क हस्तांतरण न होना। | यूपीसीएल से हैंडओवर लेते ही मानसून से पूर्व सड़कों की मरम्मत और डामरीकरण सुनिश्चित करना। |
| गेल (GAIL) | गैस पाइपलाइन बिछाने का कार्य। | अनुमति शर्तों के परिपालन में ढिलाई। | गैस पाइपलाइन का काम शर्तों के अनुरूप तुरंत पूरा कर सड़क लोनिवि को हस्तांतरित करना। |
युद्धस्तर पर काम की रणनीति: 500-500 मीटर के पैच बनाकर काम करने का फॉर्मूला
सहारनपुर चौक और कांवली रोड जैसे व्यस्ततम व्यापारिक और रिहायशी इलाकों में यातायात व्यवस्था को पूरी तरह ठप होने से बचाने के लिए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने यूपीसीएल के अधिकारियों को एक नया और व्यावहारिक 'माइक्रो-प्लान' (Micro-Plan) दिया है।
डीएम ने निर्देशित किया कि पूरी सड़क को एक साथ खोदकर छोड़ने के बजाय 500-500 मीटर के छोटे-छोटे पैच (खंड) बनाए जाएं। प्रत्येक पैच पर पर्याप्त संख्या में आधुनिक मशीनरी और अतिरिक्त लेबर (मैनपॉवर) की तैनाती की जाए। जैसे ही एक 500 मीटर के हिस्से में अंडरग्राउंड केबल बिछाने का कार्य पूरा हो, उसे तुरंत बंद कर अगले पैच पर काम शुरू किया जाए। जिलाधिकारी ने यूपीसीएल को प्रतिदिन की कार्य प्रगति रिपोर्ट (Daily Progress Report) अनिवार्य रूप से जिलाधिकारी कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं ताकि कार्यों की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग (Real-Time Monitoring) की जा सके।
मानसून से पूर्व लोनिवि को हैंडओवर करने के निर्देश; सड़कों का होगा कायाकल्प
देहरादून में आगामी मानसून सीजन की आहट को देखते हुए जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग (PWD) और यूपीसीएल के बीच समन्वय की कमी पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने आदेश दिया कि जैसे ही यूपीसीएल आगामी 5 दिनों के भीतर अपने केबलिंग कार्य को पूरा कर लेता है, वह बिना एक दिन की भी देरी किए संबंधित मार्गों को सड़क पुनर्स्थापन (Road Restoration) के लिए तत्काल लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित (Handoff) कर दे।
डीएम ने लोनिवि के अधिशासी अभियंता को कड़े लहजे में कहा कि जैसे ही यूपीसीएल और गेल (GAIL) से सड़कों का नियंत्रण वापस मिलता है, वैसे ही डामरीकरण और पैच वर्क का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया जाए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मानसून की पहली बारिश से पहले देहरादून की ये सभी लाइफलाइन सड़कें पूरी तरह से दुरुस्त, समतल और सुरक्षित हो जानी चाहिए, ताकि वर्षाकाल में जलभराव या कीचड़ के कारण कोई बड़ी दुर्घटना न हो।
शहरी बुनियादी ढांचा विकास और जिला प्रशासन की 4 सूत्रीय सख्त नीति
राजधानी देहरादून में जनसुविधाओं से जुड़े निर्माण कार्यों को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए जिला प्रशासन ने निम्नलिखित चार कड़े नीतिगत मानक तय किए हैं:
- वेतन रोकने की दंडात्मक नीति: केवल कागजी चेतावनियों के बजाय सीधे विभागाध्यक्षों और उच्च अधिकारियों (जैसे यूपीसीएल के एसई) का वेतन रोकने की इस कार्रवाई से प्रशासनिक अमले में यह संदेश गया है कि काम में लापरवाही की व्यक्तिगत जवाबदेही (Personal Accountability) तय होगी।
- अनुमति शर्तों का कड़ाई से पालन: रोड कटिंग समिति द्वारा जब भी किसी एजेंसी को सड़क खोदने की अनुमति दी जाती है, तो उसकी शर्त होती है कि मलबे को साथ के साथ हटाया जाए और सुरक्षा बोर्ड लगाए जाएं। इन शर्तों के उल्लंघन पर अब सीधे विधिक मुकदमे दर्ज किए जाएंगे।
- अंतर-विभागीय समन्वय (Inter-Departmental Coordination): यूपीसीएल, गेल और लोनिवि जैसे विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी के कारण जनता पिसती है। डीएम ने अब संयुक्त निरीक्षण और अनिवार्य संयुक्त बैठकों के जरिए इस गैप को खत्म करने की नीति अपनाई है।
- नियमित और औचक मॉनिटरिंग: जिलाधिकारी ने घोषणा की है कि जनसुविधाओं और नागरिक अधिकारों से जुड़े विकास कार्यों की वे खुद और उनकी टीम साप्ताहिक आधार पर औचक मॉनिटरिंग करेगी और किसी भी प्रकार का 'कम्प्रमाइज' (Compromise) स्वीकार नहीं किया जाएगा।
वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम रही मौके पर मौजूद
इस धरातलीय और कड़े निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी के साथ देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक परमेन्द्र डोभाल भी मुस्तैद रहे, जिन्होंने केबलिंग कार्य के दौरान लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम को लेकर पुलिस की व्यावहारिक दिक्कतों से अवगत कराया। इसके अलावा अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) के.के. मिश्रा, पुलिस अधीक्षक (यातायात) लोकेश सिंह, उप जिलाधिकारी (एसडीएम सदर) अपूर्वा सिंह, और लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता (EE) ओपी सिंह सहित यूपीसीएल और गेल के कई वरिष्ठ अभियंता और तकनीकी स्टाफ उपस्थित रहा। जिलाधिकारी ने इन सभी अधिकारियों को आपसी तालमेल के साथ क्षेत्र में यातायात और नागरिक सुविधाओं को प्रभावित न होने देने के सख्त निर्देश दिए।
जवाबदेह सुशासन और नागरिक केंद्रित प्रशासन का उदाहरण
देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान द्वारा यूपीसीएल के अधीक्षण अभियंता का वेतन रोकने और कार्यों को 5 दिन में पूरा करने का अल्टीमेटम देना उत्तराखंड की प्रशासनिक व्यवस्था में एक स्वागत योग्य और अनुकरणीय कदम है। अक्सर देखा जाता है कि विकास और आधुनिकीकरण के नाम पर सरकारी एजेंसियां सड़कों को खोदकर हफ्तों तक गायब हो जाती हैं, जिसका खामियाजा टैक्स भरने वाली आम जनता और स्थानीय व्यापारियों को भुगतना पड़ता है। जीएमएस रोड और कांवली रोड देहरादून के बेहद व्यस्त व्यापारिक केंद्र हैं, जहां मलबे का बिखरना और कार्यों का लटकना सीधे तौर पर आर्थिक और नागरिक जीवन को पंगु बनाता है।
डीएम की इस त्वरित और कड़क कार्रवाई ने यह साबित किया है कि अब एयर-कंडीशंड कमरों से फाइलें चलाने के बजाय धरातल पर जाकर काम की गुणवत्ता और गति को देखना सुशासन (Good Governance) का मूल मंत्र बन चुका है। मानसून सिर पर है, और ऐसे में सड़कों की यह स्थिति किसी बड़े संकट को न्यौता दे सकती थी। उम्मीद की जानी चाहिए कि जिलाधिकारी के इस हंटर के बाद यूपीसीएल और लोनिवि के अधिकारी नींद से जागेंगे और निर्धारित 5 दिनों के भीतर इस कार्य को पूरा कर राजधानी वासियों को एक सुरक्षित, मलबामुक्त और सुगम यातायात व्यवस्था सौंपेंगे।
