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देहरादून, 05 जून, 2026: उत्तराखंड सरकार प्रदेश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक बेहतर, सुलभ और मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए अपने प्रयासों को और तेज कर रही है। प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने देहरादून में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) की एक महत्वपूर्ण अनुवर्ती (Follow-up) समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने विभागीय अधिकारियों और राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ राज्य के प्रत्येक पात्र नागरिक तक बिना किसी बाधा के प्रभावी रूप से पहुंचना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं के सरलीकरण और आमजन को राहत देने के मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
"गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं हर जरूरतमंद का अधिकार": स्वास्थ्य मंत्री
समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने आयुष्मान भारत योजना के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह योजना देश और राज्य के गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है, जिसने गंभीर बीमारियों के इलाज में होने वाले भारी-भरकम खर्च से जनता को मुक्ति दिलाई है।
कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के कड़े निर्देश:
"आयुष्मान भारत योजना केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह देश की सबसे संवेदनशील और महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य पहलों में से एक है। इसका मूल उद्देश्य प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति को बिना किसी वित्तीय बोझ के गुणवत्तापूर्ण एवं निःशुल्क चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है। योजना के क्रियान्वयन और संचालन में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या तकनीकी लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि पात्र लाभार्थियों को समयबद्ध, पारदर्शी और सुगम तरीके से इलाज मिले।"
आयुष्मान भारत योजना समीक्षा बैठक: मुख्य निर्णय एवं रणनीतिक विज़न
इस उच्च स्तरीय बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णयों, विभागीय प्राथमिकताओं और तकनीकी सुधारों को इस तालिका के माध्यम से विस्तृत रूप से समझा जा सकता है:
| समीक्षा बैठक के मुख्य बिंदु (Core Focus) | मंत्री द्वारा दिए गए प्रशासनिक निर्देश (Directives) | जिम्मेदार विंग एवं अधिकारी (Accountability) |
| जन-जागरूकता का प्रसार | सभी सरकारी एवं सूचीबद्ध (Empaneled) अस्पतालों में अनिवार्य रूप से विस्तृत डिस्प्ले बोर्ड स्थापित किए जाएं। | राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण एवं चिकित्साधीक्षक। |
| रेफरल व्यवस्था का सुधार | अस्पतालों में अनावश्यक रेफर किए जाने की शिकायतों की गंभीरता से जांच कर त्वरित दंडात्मक कार्रवाई हो। | मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) एवं स्वास्थ्य निदेशालय। |
| वित्तीय चुनौतियों का समाधान | राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना (SGHS) के अंतर्गत बजट संबंधी दिक्कतों के लिए संसाधनों के नए विकल्प तलाशना। | वित्त विंग और अपर सचिव स्वास्थ्य। |
| सेवाओं की गुणवत्ता | सूचीबद्ध चिकित्सालयों की नियमित और सतत मॉनिटरिंग (Continuous Monitoring) सुनिश्चित की जाए। | राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (SHA)। |
अस्पतालों में अनिवार्य होंगे डिस्प्ले बोर्ड; हेल्पलाइन नंबरों का होगा व्यापक प्रचार
बैठक में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि कई बार सटीक जानकारी न होने के कारण पात्र नागरिक भी योजना के लाभ से वंचित रह जाते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए स्वास्थ्य मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने प्रदेश के सभी सरकारी और आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध (Empaneled) निजी अस्पतालों के लिए एक नया विधिक आदेश जारी किया है।
इसके तहत अब सभी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना से संबंधित आवश्यक जानकारी, पात्रता के नियम, योजना के अंतर्गत मिलने वाली पैकेजेस/सुविधाएं और आधिकारिक हेल्पलाइन नंबरों से युक्त बड़े और स्पष्ट डिस्प्ले बोर्ड (सूचना पट्ट) अनिवार्य रूप से लगाने होंगे। मंत्री ने कहा कि आम जनता को योजना के बारे में जागरूक करना उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि उन्हें अस्पताल के भीतर वास्तविक उपचार उपलब्ध कराना।
अस्पतालों की नियमित मॉनिटरिंग पर बल; गलत रेफरल प्रणाली पर कड़ा रुख
राज्य के पर्वतीय और दूरदराज के क्षेत्रों से मरीजों को बिना ठोस चिकित्सा कारणों के उच्च केंद्रों (Higher Centers) के लिए रेफर किए जाने की प्रवृत्ति पर मंत्री ने गहरा असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने सरकारी अस्पतालों की रेफरल व्यवस्था को लेकर हाल ही में प्राप्त हुईं विभिन्न जन-शिकायतों का कड़ा संज्ञान लिया।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सरकारी अस्पतालों से होने वाले रेफरल मामलों का एक रीयल-टाइम ऑडिट (Audit) किया जाए। यदि किसी अस्पताल में बुनियादी सुविधाएं होने के बावजूद मरीज को जबरन या लापरवाही के चलते हायर सेंटर रेफर किया जाता है, तो संबंधित डॉक्टरों और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवाओं के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए अस्पतालों की निरंतर और औचक निगरानी (Surprise Inspection) बहुत जरूरी है।
आयुष्मान भारत योजना के सुदृढ़ीकरण हेतु 4 सूत्रीय कार्ययोजना
प्रदेश में आयुष्मान योजना को शत-प्रतिशत पारदर्शी और जनहितकारी बनाने के लिए बैठक में निम्नलिखित चार प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी है:
- समन्वित प्रयास (Coordinated Efforts): आयुष्मान भारत योजना को राज्य के सुदूरवर्ती गांवों तक पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज, महिला कल्याण एवं बाल विकास और स्थानीय निकायों को एक टीम के रूप में मिलकर काम करना होगा।
- संसाधनों की उपलब्धता: राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना (SGHS) के अंतर्गत बजट और वित्तीय चुनौतियों का जो मामला उठाया गया, उस पर मंत्री ने आश्वस्त किया कि प्रदेशवासियों की सेहत के लिए बजट की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और सभी संभावित वित्तीय उपाय किए जाएंगे।
- पारदर्शिता और डिजिटलाइजेशन: योजना के क्लेम सेटलमेंट (Claim Settlement) और अस्पतालों के भुगतान की प्रक्रिया को और अधिक डिजिटल तथा समयबद्ध बनाया जाएगा ताकि निजी अस्पतालों को भी समय पर भुगतान हो सके और वे मरीजों के इलाज में आनाकानी न करें।
- मरीजों की फीडबैक प्रणाली: अस्पतालों में आयुष्मान मित्रों (Ayushman Mitras) की जवाबदेही तय की जाएगी, जो मरीजों को दाखिले से लेकर डिस्चार्ज होने तक सहायता प्रदान करेंगे और उनका फीडबैक सीधे राज्य मुख्यालय को भेजेंगे।
शीर्ष नौकरशाही और स्वास्थ्य विंग के अधिकारी रहे मौजूद
सचिवालय में आयोजित इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उत्तराखंड के स्वास्थ्य ढांचे से जुड़े शीर्ष नीति-निर्माता और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। इनमें मुख्य रूप से राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (State Health Authority) के अध्यक्ष वरिष्ठ आईएएस श्री अरविन्द सिंह ह्यांकी, अपर सचिव स्वास्थ्य श्री सौरभ गहरवार सहित स्वास्थ्य महानिदेशालय और चिकित्सा शिक्षा विभाग के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल रहे। सभी अधिकारियों ने स्वास्थ्य मंत्री के निर्देशों को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारने का संकल्प व्यक्त किया।
प्रो-पीपल सुशासन और मजबूत स्वास्थ्य ढांचे की ओर कदम
स्वास्थ्य मंत्री श्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में संपन्न हुई यह समीक्षा बैठक दर्शाती है कि उत्तराखंड सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और जनहितकारी (Pro-People) बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। भौगोलिक रूप से विषम परिस्थितियों वाले इस पर्वतीय राज्य में आयुष्मान भारत योजना वास्तव में गरीबों के लिए जीवनदायिनी सिद्ध हुई है।
अस्पतालों में अनिवार्य डिस्प्ले बोर्ड लगाने और गलत तरीके से मरीजों को रेफर करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के निर्देश सीधे तौर पर आम जनता को राहत पहुंचाने वाले कदम हैं। यदि विभाग द्वारा बजट संबंधी चुनौतियों का समय पर निस्तारण कर लिया जाता है और अस्पतालों की कठोर मॉनिटरिंग की जाती है, तो उत्तराखंड स्वास्थ्य सुशासन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी स्थिति को और अधिक मजबूत कर सकेगा।
