श्रीनगर गढ़वाल: कविता और सेवा का संगम—डॉ. डी.के. टम्टा का अभिनंदन


Aapki Media AI


श्रीनगर गढ़वाल :  उत्तराखंड का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र, इस बार एक विशेष आयोजन का गवाह बना। युवा कवि सतपाल और उनकी पत्नी प्रियंका ने अपने अद्वितीय अंदाज में चिकित्सा क्षेत्र के मर्मज्ञ प्रोफेसर डॉ. डी.के. टम्टा और उनकी पूरी ऑर्थो विभागीय टीम को सम्मानित किया। यह कार्यक्रम न केवल चिकित्सा क्षेत्र की उत्कृष्टता को रेखांकित करता है, बल्कि समाज और संस्कृति के बीच एक अनूठा संबंध भी स्थापित करता है।

युवा कवि सतपाल डॉ. डी.के. टम्टा जी को सम्मानित करते हुए


आधुनिक चिकित्सा में योगदान और कविता का सम्मान

डॉ. डी.के. टम्टा, वीसीएसजी मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर गढ़वाल के ऑर्थो विभाग के प्रमुख, अपनी चिकित्सा सेवाओं और समाजसेवा के लिए जाने जाते हैं। चाहे जटिल ऑपरेशन हों, मरीज़ों के साथ गहरा व्यक्तिगत संबंध हो, या ग्रामीण क्षेत्रों में मुफ्त चिकित्सा शिविरों का आयोजन—डॉ. टम्टा की निस्वार्थ सेवा का हर पहलू प्रेरणादायक है।

युवा कवि सतपाल डॉ. डी.के. टम्टा जी को सम्मानित करते हुए
युवा कवि सतपाल डॉ. डी.के. टम्टा जी को सम्मानित करते हुए 

उनके इसी योगदान को रेखांकित करते हुए, युवा कवि सतपाल ने उन्हें कविता पोस्टर और सम्मान पत्र भेंट किया। सतपाल की कविताएं समाज और व्यक्ति के संघर्ष, उनकी सफलता और सेवा को शब्दों में पिरोती हैं। प्रियंका ने इस आयोजन को और भी गरिमा प्रदान की, जब उन्होंने टीम के प्रत्येक सदस्य को फूल-मालाओं से सम्मानित किया।

डॉ. डी.के. टम्टा: एक प्रेरक व्यक्तित्व

डॉ. टम्टा का व्यक्तित्व न केवल चिकित्सा जगत में अद्वितीय है, बल्कि उनके मानवीय मूल्यों ने उन्हें समाज के हर वर्ग का प्रिय बना दिया है। मेडिकल कॉलेज में उन्होंने न केवल शिक्षण में उत्कृष्टता दिखाई है, बल्कि छात्रों को सामाजिक सेवा का पाठ भी पढ़ाया है। उनके निर्देशन में कई छात्रों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ख्याति अर्जित की है। कविता और चिकित्सा का यह संगम समाज को एक नया संदेश देता है। यह सम्मान मेरे लिए नहीं, बल्कि उन सभी चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए है, जो दिन-रात सेवा में जुटे रहते हैं।"

सतपाल और प्रियंका: नई सोच के युवा कवि

सतपाल और प्रियंका जैसे युवा कवि अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को जागरूक कर रहे हैं। उनकी कविताओं में न केवल सामाजिक मुद्दों का उल्लेख होता है, बल्कि मानवता के प्रति कृतज्ञता भी झलकती है। इस सम्मान समारोह में सतपाल ने अपनी कविता "हाथ जोड़े हैं तेरा ईश्वर भी, जब इंसान का दर्द तूने बांटा है" सुनाई, जिसे सुनकर सभी की आंखें नम हो गईं। प्रियंका, जो स्वयं भी शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं, ने इस कार्यक्रम में कहा,

"डॉ. टम्टा और उनकी टीम जैसे चिकित्सक हमारे समाज के असली हीरो हैं। उन्हें सम्मानित करना हमारे लिए गर्व की बात है।"

पूरी टीम का अभिनंदन

इस आयोजन में सिर्फ डॉ. टम्टा को ही नहीं, बल्कि उनकी पूरी टीम को भी सम्मानित किया गया। टीम के सदस्यों ने बताया कि डॉ. टम्टा के नेतृत्व में काम करना उनके लिए गर्व की बात है।

कविता पोस्टर: एक अनूठा विचार

कविता पोस्टर, सतपाल और प्रियंका की एक अनूठी पहल है। यह समाज के उन व्यक्तियों के लिए समर्पित होता है, जो अपने कार्यों से दूसरों को प्रेरणा देते हैं। इस बार का पोस्टर डॉ. टम्टा की सेवा भावना और उनकी टीम की कड़ी मेहनत को समर्पित था। पोस्टर पर लिखी पंक्तियां थीं:

कविता पोस्टर: एक अनूठा विचार
कविता पोस्टर

सामाजिक और सांस्कृतिक प्रेरणा

इस आयोजन ने यह दिखा दिया कि समाज के हर क्षेत्र में योगदान करने वालों को पहचानने और सम्मानित करने की परंपरा कितनी महत्वपूर्ण है। चिकित्सा, साहित्य, और समाज सेवा का यह संगम युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

आगे का संदेश

इस सम्मान समारोह का उद्देश्य केवल डॉ. टम्टा और उनकी टीम को सम्मानित करना नहीं था, बल्कि यह दिखाना था कि जब समाज के विभिन्न क्षेत्र आपस में मिलते हैं, तो वह समाज के विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं। युवा कवि सतपाल और प्रियंका की यह पहल आने वाले समय में समाज और संस्कृति के बीच संबंध को और प्रगाढ़ बनाएगी।

"जहां सेवा है, वहां कविता है, और जहां कविता है, वहां समाज का उद्धार है।"

इस आयोजन के साथ यह संदेश और भी प्रबल होता है। श्रीनगर गढ़वाल जैसे पहाड़ी क्षेत्र में यह कार्यक्रम आने वाले समय में कई नई परंपराओं की नींव रखेगा।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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