देहरादून निदेशालय कांड: बीएनएस की धाराओं में क्रॉस केस दर्ज, निदेशक ने लगाया बलवा और तोड़फोड़ का आरोप, विधायक के गनर ने भी दर्ज कराई FIR

शिक्षा निदेशालय में हुए बवाल के बाद प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल ने रायपुर थाने में लिखित तहरीर देकर कानूनी मोर्चा खोल दिया है। निदेशक ने आरोप लगाया है कि जब वे कार्यालय में अन्य व्यक्तियों से वार्ता कर रहे थे, उसी दौरान कुछ लोगों ने अचानक अराजकता फैलाना शुरू कर दिया। इस दौरान न केवल कार्यालय की कुर्सियां और अन्य सरकारी संपत्तियों को तोड़कर इधर-उधर फेंका गया, बल्कि वहां मौजूद कर्मचारियों के साथ मारपीट भी की गई। निदेशक द्वारा सौंपी गई मेडिकल रिपोर्ट और तहरीर के आधार पर पुलिस ने लोक सेवक के कार्य में बाधा डालने, चोट पहुँचाने, बलवा करने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और जान से मारने की धमकी देने जैसी बीएनएस की संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।


विधायक पक्ष की ओर से भी दर्ज हुआ मुकदमा

इस हाई-प्रोफाइल मामले में दूसरा मोड़ तब आया जब विधायक उमेश शर्मा काऊ की सुरक्षा में तैनात कांस्टेबल सुशील रमोला ने भी पुलिस को तहरीर सौंपी। कांस्टेबल की शिकायत के आधार पर पुलिस ने दूसरे पक्ष के खिलाफ भी चोट पहुँचाने, बंधक बनाने (परिरोध), हमला करने और गाली-गलौज कर अपमानित करने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत केस दर्ज किया है। विधायक पक्ष का दावा है कि विवाद के दौरान उनके साथ भी अभद्रता और धक्का-मुक्की की गई। इस क्रॉस एफआईआर (Cross FIR) के बाद अब पुलिस के लिए यह गुत्थी सुलझाना एक बड़ी चुनौती बन गया है कि हिंसा की शुरुआत किस पक्ष ने की थी।

निदेशालय में दहशत का माहौल और जांच की दिशा

निदेशक कार्यालय में हुई इस तोड़फोड़ और मारपीट की घटना से विभागीय कर्मचारियों में गहरा रोष और दहशत व्याप्त है। पुलिस ने घटना स्थल से साक्ष्य जुटाने के साथ ही उन सभी लोगों को चिन्हित करना शुरू कर दिया है, जो हंगामे के दौरान सक्रिय रूप से हिंसा में शामिल थे। बीएनएस (BNS) की धाराओं के तहत दर्ज इन मुकदमों में अब पुलिस सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयानों को मुख्य आधार बना रही है। एसएसपी देहरादून ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्यालय की गरिमा को ठेस पहुँचाने और लोक सेवकों के साथ हिंसा करने वालों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

सत्ता और प्रशासन के बीच तनावपूर्ण स्थिति

एक तरफ शिक्षा विभाग के आला अधिकारी अपनी सुरक्षा और सम्मान की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विधायक पक्ष ने भी खुद को पीड़ित बताते हुए कानूनी सुरक्षा की गुहार लगाई है। इस घटना ने राजधानी के प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। चूंकि मामला सीधे तौर पर एक विधायक और विभाग के सर्वोच्च अधिकारी से जुड़ा है, इसलिए जांच की निष्पक्षता पर सबकी नजरें टिकी हैं। फिलहाल, रायपुर थाना पुलिस दोनों ओर से दर्ज मुकदमों की विवेचना कर रही है और जल्द ही इसमें शामिल दोषियों की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है।

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