शिक्षा निदेशक कार्यालय में 'दंगल': विधायक और समर्थकों के हंगामे पर पुलिस का बड़ा एक्शन, दोनों पक्षों पर मुकदमा दर्ज

देहरादून स्थित प्राथमिक शिक्षा परिषद के निदेशक कार्यालय में एक स्कूल की मान्यता और नाम परिवर्तन से जुड़ी फाइल को लेकर शुरू हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। जानकारी के अनुसार, खानपुर विधायक उमेश शर्मा अपने समर्थकों के साथ कार्यालय पहुँचे थे, जहाँ विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ उनकी तीखी बहस हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि कार्यालय परिसर में मारपीट और तोड़फोड़ की नौबत आ गई। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें विधायक समर्थक और कार्यालय स्टाफ आपस में उलझते और हंगामा करते नजर आ रहे हैं। इस घटना ने सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा और जनप्रतिनिधियों के आचरण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिक्षा निदेशक कार्यालय में 'दंगल'

पुलिस की त्वरित कार्रवाई और गिरफ्तारियां

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और सरकारी कार्य में बाधा डालने की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया। एसएसपी देहरादून प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त निर्देश जारी किए। पुलिस ने वीडियो साक्ष्यों के आधार पर बलवा, सरकारी कार्य में व्यवधान और मारपीट जैसी विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। एसएसपी ने बताया कि वीडियो में जो लोग प्रमुख रूप से मारपीट और तोड़फोड़ करते दिखाई दे रहे हैं, उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से स्पष्ट संदेश दिया गया है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने या सरकारी मर्यादा भंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

दोनों पक्षों की ओर से क्रॉस मुकदमा दर्ज

इस मामले में राजनीति भी गर्मा गई है। एक ओर जहाँ सरकारी कर्मचारी संघों ने विभागीय अधिकारियों के साथ अभद्रता का विरोध किया है, वहीं दूसरी ओर विधायक उमेश शर्मा ने भी पुलिस को तहरीर दी है। विधायक का आरोप है कि कार्यालय के भीतर उनके साथ और उनके समर्थकों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने पुष्टि की कि विधायक की ओर से मिली तहरीर पर भी मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब दोनों पक्षों के दावों की बारीकी से जांच कर रही है। सीसीटीवी फुटेज और मौके पर मौजूद गवाहों के बयानों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि विवाद की शुरुआत किसने की और हिंसा के लिए असल जिम्मेदार कौन है।

निष्पक्ष जांच और आगे की रणनीति

देहरादून पुलिस ने साफ कर दिया है कि यह मामला एक उच्च स्तरीय प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद है, इसलिए इसकी विवेचना पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाएगी। एसएसपी ने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, चाहे वह किसी भी पक्ष के हों, उनके आधार पर बिना किसी दबाव के आगे की वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस घटना के बाद शिक्षा निदेशालय में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और कर्मचारियों में व्याप्त रोष को देखते हुए पुलिस सतर्कता बरत रही है। अब सबकी नजरें पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस 'ऑफिस दंगल' की पूरी सच्चाई सामने लाएगी।

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