विश्वभर में फैले तिब्बती समुदाय के लिए आज का दिन विशेष उत्साह और नई आशाओं का संदेश लेकर आया है। सरोवर नगरी नैनीताल में भी तिब्बती समुदाय ने अपने पारंपरिक नववर्ष यानी 'लोसर' का जश्न बेहद धूमधाम से मनाया। नैनीताल के सुख निवास स्थित बौद्ध मठ में आयोजित इस उत्सव के दौरान समुदाय के लोगों ने सुबह से ही एकत्रित होकर विशेष पूजा-अर्चना की। तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव के अंतिम चरण में आज मठ के भीतर आध्यात्मिक शांति का माहौल रहा, जहाँ लोगों ने एक-दूसरे को 'ताशी देलेक' (नववर्ष की शुभकामनाएं) कहकर गले लगाया। इस पावन अवसर पर तिब्बती समाज ने विश्व शांति के साथ-साथ अपने सर्वोच्च धर्मगुरु दलाई लामा की लंबी आयु के लिए प्रार्थना की।
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| नैनीताल में तिब्बती नववर्ष 'लोसर' की धूम |
रंग-बिरंगे प्रार्थना ध्वजों से सजा आकाश
लोसर पर्व का एक सबसे महत्वपूर्ण और आकर्षक पहलू मठों और घरों पर लगाए जाने वाले पांच रंगों के विशेष झंडे हैं। आज के दिन तिब्बती समुदाय द्वारा लगाए गए ये ध्वज केवल सजावट नहीं, बल्कि प्रकृति के पांच तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन झंडों में हरे रंग को हरियाली, लाल को अग्नि, सफेद को शांति, नीले को जल और पीले रंग को पृथ्वी का प्रतीक माना जाता है। इन झंडों पर पवित्र बौद्ध मंत्र अंकित होते हैं। समुदाय की मान्यता है कि पहाड़ों की ठंडी हवा के झोंकों से ये झंडे जितनी बार लहराते हैं, उन पर लिखे मंत्रों की सकारात्मक ऊर्जा उतनी ही तेजी से पूरे ब्रह्मांड में फैलती है और विश्व में शांति व खुशहाली लाती है।
पारंपरिक संस्कृति और मंगल गीतों की गूंज
लोसर के मौके पर नैनीताल का बौद्ध मठ तिब्बती संस्कृति के जीवंत रंगों में सराबोर नजर आया। समुदाय की महिलाओं और पुरुषों ने अपने विशेष पारंपरिक परिधान पहनकर उत्सव की शोभा बढ़ाई। मठ के प्रांगण में महिलाओं ने मधुर स्वर में मंगल गीत गाए और पारंपरिक नृत्य के जरिए अपनी खुशियों का इजहार किया। तिब्बती समुदाय के अध्यक्ष यशी थोपतेन ने बताया कि यह पर्व उनके लिए अपनी जड़ों से जुड़ने और आने वाले साल के लिए नई ऊर्जा संचय करने का समय होता है। वहीं समुदाय के सदस्यों ने बताया कि नैनीताल में यह पर्व वर्षों से इसी तरह भाईचारे के साथ मनाया जाता रहा है, जो स्थानीय पर्यटन और सांस्कृतिक विविधता को भी नई मजबूती देता है।
