देहरादून, 12 फरवरी 2026: उत्तराखंड के विद्यालयी शिक्षा विभाग में अब बड़े प्रशासनिक और ढांचागत सुधार होने जा रहे हैं। सूबे के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को 'केंद्रीय विद्यालयों' की तर्ज पर आधुनिक और व्यवस्थित बनाने के लिए त्रि-स्तरीय ढांचे (Three-Tier Structure) के गठन का ऐलान किया है। इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही विभाग में रिक्त पदों पर स्थाई नियुक्तियों और छात्र-छात्राओं को समय पर किताबें उपलब्ध कराने के लिए भी कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
1. केंद्रीय विद्यालयों की तर्ज पर बनेगा त्रि-स्तरीय ढांचा
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अपने शासकीय आवास पर शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान विभागीय अधिकारियों को कड़े लहजे में निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिक्षकों के त्रि-स्तरीय ढांचे के गठन में हो रही देरी स्वीकार्य नहीं है।
क्या है त्रि-स्तरीय ढांचा? इस नए ढांचे के तहत शिक्षकों के संवर्ग को तीन अलग-अलग स्तरों पर विभाजित किया जाएगा, जिससे पदोन्नति, स्थानांतरण और कार्यक्षमता में सुधार होगा। इसका प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट में लाया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों के स्तर को केंद्रीय विद्यालयों (KV) के समकक्ष लाना है।
2. डायट (DIET) में 222 पदों पर होगी सीधी भर्ती
शिक्षा विभाग में गुणवत्ता सुधारने के लिए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIET) को मजबूत किया जा रहा है।
- रिक्त पदों का अधियाचन: मंत्री ने डायटों में रिक्त चल रहे प्रवक्ता संवर्ग के 222 पदों को भरने के लिए अधियाचन तत्काल राज्य लोक सेवा आयोग (UKPSC) को भेजने के निर्देश दिए हैं।
- प्रतिनियुक्ति का अंत: वर्तमान में कई शिक्षक डायटों में प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं। स्थाई नियुक्ति होने के बाद इन शिक्षकों को वापस उनके मूल विद्यालयों में भेजा जाएगा, जिससे स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होगी।
3. नए सत्र से पहले मिलेंगी निःशुल्क पुस्तकें
अक्सर देखा जाता है कि नया शिक्षण सत्र शुरू होने के महीनों बाद तक छात्रों को किताबें नहीं मिल पातीं। इस बार डॉ. धन सिंह रावत ने इसे लेकर सख्त चेतावनी दी है:
- डेडलाइन: नया सत्र शुरू होने से पहले सभी विद्यालयों में निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें अनिवार्य रूप से पहुँच जानी चाहिए।
- अधिकारियों पर कार्रवाई: यदि किसी विद्यालय में पुस्तकों की कमी पाई गई, तो संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी और जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
4. भूमि दानदाताओं को सरकारी नौकरी में वरीयता
बैठक में एक और महत्वपूर्ण मानवीय और सामाजिक निर्णय लिया गया। उत्तराखंड में कई विद्यालय दान में दी गई भूमि पर बने हैं। डॉ. रावत ने निर्देश दिए कि:
- भर्ती में प्राथमिकता: जिन परिवारों ने स्कूल-कॉलेजों की स्थापना के लिए अपनी भूमि दान की है, उनके परिवार के सदस्यों को चतुर्थ श्रेणी एवं अन्य भर्ती प्रक्रियाओं में वरीयता (Preference) दी जाएगी।
- चतुर्थ श्रेणी नियुक्तियां: विभाग में चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों की नियुक्ति प्रक्रिया को भी तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
5. विधानसभा क्षेत्रों में स्कूलों का उच्चीकरण (Upgrade)
पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार के लिए सरकार ने विधायकों की राय को प्राथमिकता दी है:
- प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में दो-दो विद्यालयों के उच्चीकरण (Upgrade) का प्रस्ताव मांगा गया है।
- विधायकों से प्रस्ताव प्राप्त कर शीघ्र ही शासन को उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों को घर के पास ही उच्च शिक्षा मिल सके।
6. SCERT और नियमावली में सुधार
मंत्री ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के ढांचे और इसकी नियमावली बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक विभागीय नियमावली पारदर्शी नहीं होगी, तब तक शैक्षणिक सुधारों का लाभ धरातल पर नहीं दिखेगा।
बैठक में मौजूद रहे मुख्य अधिकारी
समीक्षा बैठक में सचिव शिक्षा रविनाथ रमन, अपर सचिव एम.एम. सेमवाल, निदेशक प्राथमिक शिक्षा अजय कुमार नौडियाल, निदेशक माध्यमिक शिक्षा डॉ. मुकुल सती समेत विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
