कांग्रेस का 'वार': प्रीतम सिंह और काजी निजामुद्दीन ने धामी सरकार को 10 मुद्दों पर घेरा; बोले- "उत्तराखंड में विकास नहीं, भ्रष्टाचार और पलायन चरम पर"


Aapki Media AI


देहरादून, 23 मार्च 2026: एक ओर जहाँ उत्तराखंड की भाजपा सरकार अपने चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर 'बेमिसाल' उत्सव मना रही है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने आंकड़ों के जरिए सरकार के दावों की हवा निकालने की कोशिश की है। कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) के सदस्य प्रीतम सिंह और मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर राज्य सरकार पर विफलता के गंभीर आरोप लगाए।


1. आर्थिक संकट: 16वें वित्त आयोग पर चिंता

नेताओं ने कहा कि 15वें वित्त आयोग में राज्य को 28 हजार करोड़ रुपये मिले थे, जिसकी अवधि अब समाप्त हो चुकी है। लेकिन 16वें वित्त आयोग में राज्य को अपेक्षित धनराशि न मिलने की खबरें चिंताजनक हैं, जिससे उत्तराखंड का विकास मॉडल पटरी से उतर सकता है।

2. गिरता स्वास्थ्य और पोषण स्तर

प्रेस वार्ता में चौंकाने वाला आंकड़ा पेश करते हुए बताया गया कि राज्य में मातृशक्ति का पोषण स्तर गिरकर 56% तक पहुंच गया है। नेताओं ने तंज कसा कि 'बेमिसाल' के दावों के बीच राज्य की महिलाओं का स्वास्थ्य रसातल में जा रहा है।

3. 'बेरोजगारी का पहाड़' और कृषि की बदहाली

क्षेत्रकांग्रेस के आरोप और आंकड़े
रोजगारसरकार 30 हजार नौकरियों का दावा कर रही है, जबकि 10 लाख बेरोजगार पंजीकृत हैं।
कृषि विकासकृषि क्षेत्र की ग्रोथ रेट में 4% की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
खाद संकटयूरिया का बैग 50 किलो से घटाकर 40 किलो कर दिया गया और कीमतें बढ़ा दी गईं।

4. पलायन और बंद होते स्कूल

कांग्रेस ने राज्य की सबसे बड़ी समस्या 'पलायन' पर सरकार को आड़े हाथों लिया।

  • भूतहा गांव: राज्य के 1726 गांवों से पूर्णतः पलायन हो चुका है।
  • शिक्षा का संकट: पलायन और कुप्रबंधन के कारण प्रदेश में लगभग 1700 सरकारी स्कूल बंद हो गए हैं।

5. भ्रष्टाचार और माफियाराज के आरोप

  • नमामि गंगे: नेताओं ने दावा किया कि CAG (सीएजी) की रिपोर्ट में नमामि गंगे योजना में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार उजागर हुआ है।
  • संरक्षण: सरकार पर खनन माफिया, आबकारी (शराब) माफिया और भू-माफियाओं को खुला संरक्षण देने का आरोप लगाया गया।

6. लचर स्वास्थ्य और वन्यजीव संघर्ष

प्रीतम सिंह ने कहा कि प्रदेश के सरकारी अस्पताल केवल 'रेफरल सेंटर' बनकर रह गए हैं। वहीं, पहाड़ों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने में सरकार पूरी तरह विफल रही है, जिससे ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल है।

उत्सव नहीं, माफी मांगे सरकार

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राज्य की जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए त्रस्त है और सरकार जश्न मनाने में व्यस्त है। उन्होंने मांग की कि सरकार विज्ञापनों पर पैसा खर्च करने के बजाय श्वेत पत्र जारी कर इन 10 सवालों का जवाब दे।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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