देहरादून, 30 मार्च 2026: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के 'स्वस्थ उत्तराखंड' के विजन को धरातल पर उतारते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। जिले के शहरी अस्पतालों से लेकर दुर्गम क्षेत्र त्यूणी और चकराता तक मैनपावर की कमी को दूर करने के लिए डीएम ने अपने स्तर से बजट स्वीकृत कर 34 आउटसोर्स कार्मिकों की तैनाती कर दी है।
जिलाधिकारी के इस प्रयास से अब सरकारी अस्पतालों में लैब टेक्नीशियन, डाटा एंट्री ऑपरेटर और वार्ड बॉय जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रिक्तियां भर दी गई हैं, जिससे आमजन को बेहतर और त्वरित उपचार मिल सकेगा।
स्वास्थ्य सुदृढ़ीकरण: चिकित्सालयवार नई नियुक्तियां
| चिकित्सालय/केंद्र | नए तैनात कार्मिक (Outsource Staff) | मुख्य भूमिका/पद |
| मॉडल टीकाकरण केंद्र (जिला अस्पताल) | 07 कार्मिक | DEO, कक्ष सेविका, पर्यावरण मित्र |
| उप जिला चिकित्सालय, ऋषिकेश | 13 कार्मिक | लैब टेक्नीशियन, कक्ष सेवक व अन्य |
| उप जिला चिकित्सालय, मसूरी | 07 कार्मिक | स्वयंसेवक एवं पर्यावरण मित्र |
| SNCU (कोरोनेशन अस्पताल) | 02 कार्मिक | वाहन चालक (एम्बुलेंस हेतु) |
| PHC त्यूणी और CHC चकराता | 04 कार्मिक | कक्ष सेविका एवं पर्यावरण मित्र |
| शव विच्छेदन गृह (मोर्चरी) | 01 कार्मिक | सहायक कर्मचारी |
दुर्गम क्षेत्रों तक 'स्वास्थ्य मंदिर' बनाने की प्रतिबद्धता
- डीएम के औचक निरीक्षण का असर: जिलाधिकारी सविन बंसल ने पिछले दिनों त्यूणी, चकराता और मसूरी के अस्पतालों का स्थलीय निरीक्षण किया था। इस दौरान मैनपावर की भारी कमी पाई गई थी, जिससे मरीजों को असुविधा हो रही थी। डीएम ने तत्काल जिला योजना से बजट स्वीकृत कर इन पदों को भरने के निर्देश दिए।
- 2027 तक सेवा विस्तार: जिलाधिकारी ने न केवल नई भर्तियां की हैं, बल्कि वर्तमान में उपनल, पीआरडी और नियत वेतन पर कार्यरत कार्मिकों की सेवाओं को मार्च 2027 तक विस्तार देने की भी स्वीकृति प्रदान कर दी है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतरता बनी रहेगी।
- लैब और इमरजेंसी सेवाओं में सुधार: ऋषिकेश और मसूरी जैसे पर्यटन केंद्रों पर लैब टेक्नीशियनों की तैनाती से अब मरीजों को पैथोलॉजी जांच के लिए निजी लैब्स के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। साथ ही कोरोनेशन के SNCU में वाहन चालकों की तैनाती से आपातकालीन सेवाएं और बेहतर होंगी।
- मॉडल टीकाकरण केंद्र: राज्य के पहले मॉडल टीकाकरण केंद्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए डाटा एंट्री ऑपरेटर और अनुसेवकों की टीम तैनात की गई है, जिससे वैक्सीनेशन की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और व्यवस्थित होगी।
- जिला योजना से वित्तीय सहयोग: इन सभी 34 कार्मिकों के वेतन और अन्य खर्चों की जिम्मेदारी जिला प्रशासन ने जिला योजना बजट से उठाई है। डीएम ने स्पष्ट किया कि संसाधनों और मैनपावर की कमी के कारण किसी भी गरीब मरीज का इलाज नहीं रुकना चाहिए।
जवाबदेह प्रशासन और सुलभ स्वास्थ्य सेवा
जिलाधिकारी सविन बंसल की यह पहल दर्शाती है कि यदि प्रशासनिक नेतृत्व संवेदनशील हो, तो दुर्गम से दुर्गम क्षेत्रों में भी सरकारी सेवाएं बेहतर की जा सकती हैं। त्यूणी और चकराता जैसे क्षेत्रों में कार्मिकों की तैनाती वहां के स्थानीय निवासियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।