देहरादून के कुख्यात बिल्डर पुनीत अग्रवाल पर जिला मजिस्ट्रेट का बड़ा एक्शन; गुंडा एक्ट में 6 महीने के लिए किया 'जिला बदर', DRDO वैज्ञानिक से मारपीट और पिस्टल लहराने के बाद खुली पोल


Aapki Media AI


देहरादून, 19 मई, 2026: राजधानी देहरादून में कानून व्यवस्था और आम जनता, विशेषकर महिलाओं, बच्चों व देश के वैज्ञानिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन ने एक बहुत बड़ी और नजीर बनने वाली दंडात्मक कार्रवाई की है। शहर के वीआईपी इलाके सहस्त्रधारा रोड स्थित एटीएस (ATS) कॉलोनी में लंबे समय से अपनी दबंगई, गुंडागर्दी और रसूख के दम पर आतंक का पर्याय बने विवादित बिल्डर पुनीत अग्रवाल के खिलाफ जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है।

देहरादून में जिला मजिस्ट्रेट का महा-एक्शन: कुख्यात बिल्डर पुनीत अग्रवाल घोषित हुआ 'गुंडा', 6 महीने के लिए किया जिला बदर!
देहरादून में जिला मजिस्ट्रेट का महा-एक्शन: कुख्यात बिल्डर पुनीत अग्रवाल घोषित हुआ 'गुंडा', 6 महीने के लिए किया जिला बदर!

जिला मजिस्ट्रेट (DM) सविन बंसल ने मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड गुंडा नियंत्रण अधिनियम-1970 की धारा 3(3) के अंतर्गत पुनीत अग्रवाल को 'गुंडा' घोषित कर दिया है। कोर्ट ने उसे तत्काल प्रभाव से 06 महीने के लिए जनपद देहरादून की सीमा से बाहर (जिला बदर) रहने के कड़े आदेश जारी किए हैं। इस आदेश के बाद रायपुर थाना पुलिस को आरोपी को 24 घंटे के भीतर जिले से बाहर खदेड़ने के निर्देश दिए गए हैं।

पूरी घटना: नगर निगम/MDDA की जमीन पर कब्जा और DRDO वैज्ञानिक पर जानलेवा हमला

इस पूरे मामले की शुरुआत सहस्त्रधारा रोड स्थित एटीएस कॉलोनी में हुई। बिल्डर पुनीत अग्रवाल द्वारा कथित रूप से नगर निगम और मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) की बेशकीमती सरकारी जमीन पर अवैध रूप से दीवार का निर्माण कराया जा रहा था। इस निर्माण कार्य का भारी मलबा पास में ही रहने वाले एक स्थानीय निवासी के घर की तरफ गिर रहा था।

  • वैज्ञानिक से अभद्रता: जब घर के सदस्यों और डीआरडीओ (DRDO) में तैनात वरिष्ठ वैज्ञानिक अनिरुद्ध शर्मा ने इस अवैध निर्माण और मलबे का शांतिपूर्ण विरोध किया, तो अपनी धुन में चूर बिल्डर पुनीत अग्रवाल अपनी सीमाएं लांघ गया।
  • कान का पर्दा फाड़ा: विवाद बढ़ने पर बिल्डर और उसके गुर्गों ने वैज्ञानिक अनिरुद्ध शर्मा पर आक्रामक और जानलेवा हमला कर दिया। इस बर्बर मारपीट में वैज्ञानिक शर्मा को गंभीर चोटें आईं और उनके कान का पर्दा तक फट गया। इसके साथ ही आरोपी ने घर की महिलाओं और बुजुर्गों के साथ सरेआम अभद्रता और अश्लील गाली-गलौज की।

एसडीएम मसूरी की गोपनीय जांच में खुला 'आतंक का कच्चा चिट्ठा'

घटना के बाद 25 अप्रैल 2026 को एटीएस कॉलोनी की निवासी एवं डीआरडीओ वैज्ञानिक हेम शिखा सहित बड़ी संख्या में डरे-सहमे सोसायटी के लोग जिलाधिकारी सविन बंसल के पास पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिलाधिकारी ने तुरंत उप जिलाधिकारी (SDM) मसूरी को इस मामले की गोपनीय जांच सौंप दी।

जांच के मुख्य निष्कर्ष:

एसडीएम मसूरी की गोपनीय जांच रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए, उसने कलेक्टेयट को भी चौंका दिया। स्थानीय निवासियों ने बंद कमरों में जांच अधिकारी को बताया कि पुनीत अग्रवाल का व्यवहार पूरी कॉलोनी के लिए नासूर बन चुका था। वह आए दिन शराब के नशे में धुत होकर आरडब्ल्यूए (RWA) के पदाधिकारियों को धमकाता था। इस मामले में डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं निदेशक मनोज कुमार ढाका ने भी शासन स्तर पर अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद प्रशासन ने इस अभ्यस्त अपराधी पर शिकंजा कसने का मन बना लिया।

बिल्डर पुनीत अग्रवाल की आपराधिक कुंडली और दर्ज मामले 

बिल्डर के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर और गैर-जमानती धाराओं के तहत कुल 05 मुकदमे दर्ज हैं, जिनका विवरण नीचे तालिका में दिया गया है:

एफआईआर / धाराएं (BNS)अपराध की प्रकृति और विवरण
धारा 115 (2)स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना (वैज्ञानिक का कान का पर्दा फाड़ना)।
धारा 351 (2) व 352आपराधिक धमकी देना और शांति भंग करने के इरादे से अपमानित करना।
धारा 74महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग।
धारा 126 (2) व 324 (4)गलत तरीके से बंधक बनाना और खतरनाक हथियारों से चोट पहुंचाना।
धारा 447आपराधिक अतिचार (क्रिमिनल ट्रेसपास) और अवैध रूप से भूमि पर कब्जा।

दीपावली पर बच्चों पर तानी थी पिस्टल; पहले ही सस्पेंड हो चुका है लाइसेंस

बिल्डर पुनीत अग्रवाल का विवादों और अपराधों से पुराना नाता रहा है। जिला मजिस्ट्रेट की अदालत में अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि यह कोई पहली घटना नहीं थी, बल्कि आरोपी आदतन और अभ्यस्त अपराधी (Habitual Offender) है।

  • मासूमों पर पिस्टल: पिछले साल दीपावली के त्योहार के दौरान मामूली बात पर इस सनकी बिल्डर ने कॉलोनी के छोटे और नाबालिग बच्चों पर अपनी लाइसेंसी पिस्टल तान दी थी और सरेआम हथियार लहराया था।
  • डीएम का पिछला एक्शन: उस समय भी जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस लापरवाही और जनसुरक्षा के खतरे का स्वतः संज्ञान लेते हुए आरोपी का शस्त्र तुरंत जब्त करवाकर उसका हथियार लाइसेंस निलंबित (Suspend) कर दिया था। इसके बावजूद आरोपी के व्यवहार में कोई सुधार नहीं आया और वह लगातार क्षेत्र में अशांति फैलाता रहा।

बिल्डर पुनीत अग्रवाल के काले कारनामों की लंबी सूची

स्थानीय निवासियों, थाना रायपुर की पुलिस रिपोर्ट और सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो क्लिप्स के आधार पर कोर्ट ने बिल्डर की निम्नलिखित गुंडागर्दी को रिकॉर्ड पर लिया:

  1. वैज्ञानिकों का उत्पीड़न: देश के प्रतिष्ठित रक्षा अनुसंधान संगठन (DRDO) के वैज्ञानिकों और उनके परिवारों को टारगेट करना और उनके साथ मारपीट करना।
  2. RWA अध्यक्ष की पिटाई: शराब के नशे में धुत होकर एटीएस रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के अध्यक्ष और सदस्यों के साथ मारपीट और गाली-गलौज।
  3. गाड़ी से कुचलने का प्रयास: कॉलोनी के बच्चों को डराने के लिए अपनी तेज रफ्तार गाड़ी से उन्हें टक्कर मारने का प्रयास करना।
  4. विधवा महिला की जमीन पर कब्जा: कूट रचित (फर्जी) रजिस्ट्री और दस्तावेजों के आधार पर एक असहाय विधवा महिला की कीमती भूमि पर अनाधिकृत कब्जा करना।
  5. झूठे मुकदमों की धमकी: जो भी निवासी उसकी अवैध गतिविधियों का विरोध करता था, उसे अपने पैसों के रसूख के दम पर जानबूझकर झूठे और मनगढ़ंत मुकदमों में फंसाकर प्रताड़ित करना।

विपक्ष का तर्क खारिज: आपसी रंजिश नहीं, यह समाज के लिए खतरा

सुनवाई के दौरान आरोपी बिल्डर के वकीलों (विपक्षी पक्ष) ने दलील दी कि यह कोई गुंडागर्दी का मामला नहीं है, बल्कि यह दो पक्षों के बीच का आपसी सिविल भूमि विवाद और रंजिश है। इसलिए इस पर गुंडा एक्ट लगाना गलत है।

परंतु, जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों, 5 थानों की एफआईआर, गोपनीय खुफिया रिपोर्ट और सोशल मीडिया पर मौजूद पुनीत अग्रवाल की दबंगई के वीडियो साक्ष्यों के आधार पर इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि आरोपी का खुले में घूमना समाज, महिलाओं और बच्चों की मानसिक व शारीरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है।

जिला बदर के कड़े नियम: उल्लंघन पर होगी जेल

जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट रूप से निम्नलिखित शर्तें तय की गई हैं:

  • सीमा में प्रवेश वर्जित: पुनीत अग्रवाल अगले 06 महीने तक जिला देहरादून की भौगोलिक सीमा के भीतर बिना अदालत की पूर्वानुमति के कदम भी नहीं रख सकेगा।
  • उल्लंघन पर कठोर सजा: यदि आरोपी इस अवधि के दौरान गुपचुप तरीके से देहरादून में पाया जाता है या आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर कठोर सश्रम कारावास और भारी जुर्माने की कार्रवाई का सामना करना होगा।
  • पुलिस को निर्देश: थाना रायपुर पुलिस को इस आदेश की तत्काल तामील (Execution) कराते हुए आरोपी को 24 घंटे के भीतर जिले की सीमा से बाहर खदेड़ने और उसकी दैनिक उपस्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

अपराधियों में कानून का खौफ, जनता में बढ़ा विश्वास

देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल का यह कड़ा फैसला उत्तराखंड के उन सभी भू-माफियाओं, विवादित बिल्डरों और रसूखदार गुंडों के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी है जो पैसे और सत्ता के बल पर आम जनता को कीड़े-मकौड़े समझते हैं। एक देश के वैज्ञानिक का कान का पर्दा फाड़ देना और बच्चों पर पिस्टल तानना किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

जिला प्रशासन की इस त्वरित और 'स्वतः संज्ञान' लेकर की गई ऐतिहासिक कार्रवाई से न केवल एटीएस कॉलोनी के पीड़ित निवासियों ने राहत की सांस ली है, बल्कि पूरे देहरादून की जनता के बीच यह संदेश गया है कि कानून सबके लिए बराबर है। चाहे कोई कितना भी बड़ा करोड़पति बिल्डर क्यों न हो, यदि वह जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ करेगा, तो उसे जेल के पीछे या जिले के बाहर ही अपनी रातें काटनी होंगी।




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Krishna Kumar
लेखक के बारे में

कृष्ण कुमार

कृष्ण कुमार को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 6+ साल पहले 'आपकी मीडिया' जैसे बहुआयामी संस्थान... और पढ़ें
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