राजधानी देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने भगवानपुर स्थित उस सेंट्रल गोदाम का औचक निरीक्षण किया, जहाँ से प्रदेश के विभिन्न जिलों के आंगनबाड़ी केंद्रों को राशन और पोषण सामग्री की आपूर्ति की जाती है। निरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि राज्य के बच्चों और गर्भवती व धात्री महिलाओं को मिलने वाला पोषण आहार मानकों के अनुरूप है या नहीं। डीएम ने गोदाम में रखी सामग्रियों का बारीकी से मुआयना किया और साफ-सफाई से लेकर भंडारण की व्यवस्था तक की जांच की।
मौके पर सैंपलिंग: अंडे, केले और खजूर की गुणवत्ता जांची
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने केवल कागजों की जांच नहीं की, बल्कि धरातल पर सामग्री की गुणवत्ता परखने के लिए तत्काल सैंपलिंग के निर्देश दिए।
- खाद्य सामग्री की जांच: गोदाम से आपूर्ति किए जाने वाले अंडे, खजूर और केले के सैंपल लिए गए। इन सैंपलों को जांच के लिए लैब भेजा जा रहा है।
- सप्लाई चैन पर सख्ती: डीएम ने गोदाम से टिहरी, उत्तरकाशी और डोईवाला के लिए रवाना हो रहे वाहनों को बीच रास्ते में ही रुकवा दिया और उनमें लदी सामग्री की भी रैंडम सैंपलिंग कराई।
निरीक्षण के मुख्य बिंदु
| श्रेणी | विवरण |
| स्थान | सेंट्रल गोदाम, भगवानपुर (देहरादून) |
| निरीक्षण कर्ता | सविन बंसल (जिलाधिकारी, देहरादून) |
| सैंपल ली गई सामग्री | अंडे, खजूर, केले और अन्य पोषण सामग्री |
| निर्देशित क्षेत्र | टिहरी, उत्तरकाशी और डोईवाला सप्लाई चैन |
| मुख्य प्राथमिकता | बाल स्वास्थ्य और धात्री महिलाओं का पोषण |
डीएम की चेतावनी: "स्वास्थ्य से समझौता बर्दाश्त नहीं"
जिलाधिकारी सविन बंसल ने गोदाम संचालकों और विभागीय अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि गोदाम का संचालन पूर्णतः मानकों के अनुसार ही होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
"राज्य के नौनिहालों और धात्री महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। यदि जांच रिपोर्ट में सामग्री की गुणवत्ता खराब पाई जाती है, तो संबंधित आपूर्तिकर्ता और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।"
भविष्य की रणनीति: निरंतर जारी रहेगा औचक निरीक्षण
इस निरीक्षण के बाद डीएम ने संबंधित विभाग को निर्देश दिए कि भविष्य में भी इसी तरह की आकस्मिक जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि पोषण सामग्री का वितरण समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ होना चाहिए। इस कार्रवाई से यह संदेश गया है कि प्रशासन अब सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुँचने वाली सामग्री की शुद्धता को लेकर पूरी तरह सजग है।

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