देहरादून (29 मार्च 2026): राजधानी पुलिस ने 'ऑपरेशन क्रैकडाउन' के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। रायपुर थाना पुलिस ने फर्जी भारतीय दस्तावेजों (आधार और पैन कार्ड) के सहारे अवैध रूप से रह रही तीन विदेशी महिलाओं को गिरफ्तार किया है। पकड़ी गई महिलाओं में एक किर्गिस्तान और दो उज्बेकिस्तान की मूल निवासी हैं।
साईं कॉम्प्लेक्स में छापेमारी, खुले कई राज
एसएसपी देहरादून के निर्देश पर बाहरी व्यक्तियों के सत्यापन के दौरान रायपुर पुलिस ने साईं कॉम्प्लेक्स के एक फ्लैट में दबिश दी। वहां रह रही तीन महिलाएं भारत में रहने के वैध दस्तावेज पेश नहीं कर पाईं। पूछताछ में पता चला कि ये महिलाएं पिछले 6-7 महीनों से देहरादून के अलग-अलग इलाकों में ठिकाने बदल-बदल कर रह रही थीं।
गिरफ्तार विदेशी महिलाओं का विवरण:
- ईरीका (29 वर्ष): मूल निवासी किर्गिस्तान। यह 2023 में एक साल के वीजा पर आई थी, लेकिन वीजा खत्म होने के बाद वापस नहीं गई।
- करीना (30 वर्ष): मूल निवासी उज्बेकिस्तान। यह नेपाल बॉर्डर के रास्ते अवैध रूप से भारत में घुसी थी।
- निगोरा नीम (32 वर्ष): मूल निवासी उज्बेकिस्तान। इसे पहले बिहार पुलिस ने भी फर्जी दस्तावेजों के मामले में जेल भेजा था, लेकिन जमानत पर बाहर आने के बाद यह फिर से अवैध रूप से रहने लगी।
फर्जी आधार कार्ड और विदेशी मुद्रा बरामद
पुलिस ने इनके कब्जे से भारी मात्रा में संदिग्ध सामान बरामद किया है, जो इनके अवैध नेटवर्क की ओर इशारा करता है:
- दस्तावेज: 01 पासपोर्ट, 03 फर्जी आधार कार्ड, 02 पैन कार्ड और एसबीआई बैंक की पासबुक।
- गैजेट्स: 07 मोबाइल फोन।
- करेंसी: 05 विदेशी मुद्रा के नोट और किर्गिस्तान का नागरिकता कार्ड।
नेपाल के रास्ते एंट्री और दिल्ली में बना 'सिंडिकेट'
पूछताछ में खुलासा हुआ कि इन महिलाओं की मुलाकात दिल्ली में हुई थी। इन्होंने अपने परिचितों के माध्यम से फर्जी भारतीय पहचान पत्र तैयार करवाए थे। पुलिस अब उन लोगों की तलाश कर रही है जिन्होंने इन विदेशी नागरिकों को फर्जी दस्तावेज बनाने और देहरादून में शरण दिलाने में मदद की।
रायपुर पुलिस ने इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और The Immigration & Foreigners Act 2025 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
