देहरादून, 19 मार्च 2026: राजधानी देहरादून की सड़कों पर दौड़ने वाले ऑटो रिक्शा चालकों की मनमानी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर परिवहन विभाग ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। आरटीओ (प्रशासन) संदीप सैनी ने घरेलू गैस सिलेंडर का अवैध रूप से व्यावसायिक इस्तेमाल करने वाले ऑटो चालकों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए सख्त निर्देश जारी किए हैं।
पेट्रोल मोड में चलें वाहन: आरटीओ का निर्देश
आरटीओ प्रशासन संदीप सैनी के अनुसार, देहरादून में कई ऑटो रिक्शा डुअल मोड (एलपीजी और पेट्रोल) पर पंजीकृत हैं। विभाग ने एक आधिकारिक पत्र जारी कर ऐसे सभी चालकों को निर्देशित किया है कि वर्तमान स्थितियों को देखते हुए वे अपने वाहनों को केवल पेट्रोल मोड में ही संचालित करें।
क्यों हुई यह सख्ती? (प्रमुख कारण)
परिवहन विभाग की जांच में कुछ गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक हैं:
| उल्लंघन के प्रकार | विभाग की कार्रवाई |
| घरेलू सिलेंडर का उपयोग | व्यावसायिक एलपीजी के बजाय सस्ते घरेलू सिलेंडर का अवैध इस्तेमाल। |
| सुरक्षा जोखिम | घरेलू सिलेंडर से गैस रिफिलिंग के दौरान आग लगने और विस्फोट का खतरा। |
| राजस्व की हानि | व्यावसायिक गैस की जगह घरेलू रियायती गैस का दुरुपयोग। |
| नियमों की अनदेखी | एलपीजी मोड में पंजीकृत होने के बावजूद मानकों का पालन न करना। |
"नियम तोड़ा तो वाहन होगा सीज": संदीप सैनी
आरटीओ प्रशासन संदीप सैनी ने बाइट देते हुए स्पष्ट किया कि प्रवर्तन (Enforcement) टीमों को सड़कों पर सघन चेकिंग के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी:
"यदि कोई ऑटो चालक एलपीजी मोड में वाहन चलाते समय घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग करता पाया गया, तो उस पर केवल जुर्माना नहीं लगेगा, बल्कि वाहन को तत्काल जब्त (Seize) कर लिया जाएगा। हमारा उद्देश्य सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना और अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाना है।"
विशेष चेकिंग अभियान की शुरुआत
परिवहन विभाग की टीमें अब शहर के मुख्य चौराहों और ऑटो स्टैंडों पर औचक निरीक्षण करेंगी। विशेष रूप से उन ऑटो की जांच की जाएगी जिनके पीछे गैस किट लगी है। विभाग का मानना है कि इस कदम से न केवल घरेलू गैस की कालाबाजारी रुकेगी, बल्कि सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों की सुरक्षा भी पुख्ता होगी।
सुरक्षा और पारदर्शिता पर जोर
देहरादून प्रशासन की यह सख्ती शहर के यातायात को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऑटो चालकों को अब अपनी गाड़ियों के कागजात दुरुस्त रखने के साथ-साथ ईंधन के मानकों का भी कड़ाई से पालन करना होगा, वरना उन्हें भारी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
