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SGRR मेडिकल कॉलेज में हड़कंप: MS की छात्रा तन्वी की संदिग्ध मौत; परिजनों का HOD पर उत्पीड़न का आरोप, 'सुसाइड के लिए उकसाने' का मुकदमा दर्ज!

देहरादून (पटेल नगर), 26 मार्च 2026: देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून एक बार फिर एक होनहार छात्रा की संदिग्ध मौत से दहल उठी है। प्रतिष्ठित श्री गुरु राम राय (SGRR) मेडिकल कॉलेज में एमएस (MS) की द्वितीय वर्ष की छात्रा तन्वी की मौत ने न केवल कॉलेज प्रशासन, बल्कि पूरे चिकित्सा जगत में हड़कंप मचा दिया है। अंबाला निवासी इस छात्रा का शव जिस तरह संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी अपनी कार से बरामद हुआ, वह कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गया है।


परिजनों द्वारा विभाग की विभागाध्यक्ष (HOD) पर लगाए गए मानसिक उत्पीड़न (Mental Harassment) और दबाव के आरोपों ने इस मामले को एक 'क्राइम थ्रिलर' में बदल दिया है। देहरादून की पटेल नगर पुलिस ने इस मामले में 'अबेटमेंट ऑफ सुसाइड' (आत्महत्या के लिए उकसाने) की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर अपनी जांच के पहिये घुमा दिए हैं।

 केस फाइल: घटनाक्रम और महत्वपूर्ण साक्ष्य (Case Investigation Data)

विवरण बिन्दु (Points)विस्तृत जानकारी (Full Details)
मृतक छात्रा का परिचयतन्वी, पुत्री ललित मोहन, निवासी- अंबाला (हरियाणा), छात्रा- MS (SGRR Medical College)
घटना का स्थानकाली माता मंदिर के पास, पटेल नगर, देहरादून (कार के भीतर)
मुख्य आरोपी और आरोपविभाग की एचओडी (HOD); मानसिक प्रताड़ना और अत्यधिक कार्य दबाव का आरोप
कानूनी स्थिति (FIR)धारा 306/अबेटमेंट ऑफ सुसाइड (BNS) के तहत मुकदमा पंजीकृत
बरामद भौतिक साक्ष्यसंदिग्ध दवाइयां, प्रयुक्त कैनुला (Cannula), छात्रा का मोबाइल और कार
जांच का मुख्य आधारफॉरेंसिक विसरा रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और सहपाठियों के बयान

1. रहस्यमयी गुमशुदगी और कार के भीतर 'खौफनाक' अंत

तन्वी की मौत की कहानी बुधवार रात से शुरू होती है जब वह कॉलेज परिसर या अपने आवास से अचानक गायब हो गई। सहपाठियों और परिजनों द्वारा बार-बार संपर्क करने के बावजूद जब उसका फोन नहीं उठा, तो चिंता बढ़ने लगी।

  • सघन तलाशी अभियान: तन्वी के गायब होने की सूचना मिलते ही कॉलेज के कुछ साथी और स्थानीय पुलिस हरकत में आई। मोबाइल लोकेशन और रूट की जांच के बाद पुलिस की एक टीम पटेल नगर के काली माता मंदिर के पास पहुँची।
  • संदिग्ध अवस्था में कार: वहां सड़क किनारे तन्वी की कार संदिग्ध अवस्था में खड़ी मिली। कार के सभी शीशे और दरवाजे अंदर से लॉक (Lock) थे। टॉर्च की रोशनी में अंदर झांकने पर तन्वी पिछली सीट पर अचेत अवस्था में पड़ी दिखी।
  • शीशा तोड़कर निकाला बाहर: पुलिस ने बिना देरी किए कार का पिछला शीशा तोड़ा और तन्वी को बाहर निकाला। उसे तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के बाद उसे 'ब्रॉट डेड' (मृत अवस्था में लाया गया) घोषित कर दिया।
  • हृदय विदारक दृश्य: घटनास्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार, कार के भीतर का दृश्य काफी विचलित करने वाला था। एक डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली छात्रा खुद डॉक्टरी उपकरणों और दवाइयों के बीच बेसुध पड़ी थी।

2. परिजनों का 'आक्रोश': सीधे HOD पर साधा निशाना

जैसे ही तन्वी की मौत की खबर उसके गृह नगर अंबाला पहुँची, परिवार में कोहराम मच गया। तन्वी के पिता ललित मोहन और अन्य परिजन रात में ही देहरादून पहुँच गए। उन्होंने जो आरोप लगाए, उन्होंने कॉलेज की आंतरिक राजनीति की कलई खोलकर रख दी।

  • असहनीय मानसिक दबाव: परिजनों का आरोप है कि तन्वी पिछले कई महीनों से अपनी विभागाध्यक्ष (HOD) के व्यवहार से परेशान थी। एचओडी उसे छोटी-छोटी बातों पर प्रताड़ित करती थीं और उस पर पढ़ाई और ड्यूटी का ऐसा दबाव बनाया गया था जिसे वह झेल नहीं पा रही थी।
  • सिस्टमेटिक टॉर्चर: पिता ललित मोहन ने पुलिस को बताया कि तन्वी ने कई बार फोन पर रोते हुए अपनी एचओडी की सख्ती और अपमानजनक व्यवहार का जिक्र किया था। उसने बताया था कि उसे जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है।
  • आत्महत्या के लिए उकसाना: परिजनों का स्पष्ट कहना है कि तन्वी एक बहादुर लड़की थी और वह खुदकुशी नहीं कर सकती थी। उसे इस स्थिति तक पहुँचाने के लिए कॉलेज की एचओडी पूरी तरह जिम्मेदार हैं।

3. पुलिस की तफ्तीश: कैनुला और संदिग्ध दवाइयों का राज

पटेल नगर पुलिस और सीओ अंकित कंडारी के नेतृत्व में जांच टीम ने घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण किया है। कार के भीतर से मिले साक्ष्य इस गुत्थी को सुलझाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • कैनुला (Cannula) की मौजूदगी: छात्रा के हाथ में या कार में कैनुला लगा होना या पड़ा होना इस बात की ओर इशारा करता है कि उसे किसी प्रकार की ड्रिप या इंजेक्शन के माध्यम से दवा दी गई थी। सवाल यह है कि क्या उसने खुद यह इंजेक्शन लगाया या किसी और ने?
  • फॉरेंसिक लैब (FSL) को भेजे नमूने: कार से बरामद दवाइयों के रैपर और शीशियों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या ये दवाइयां केवल मेडिकल कॉलेज के भीतर ही उपलब्ध थीं।
  • मोबाइल डेटा का विश्लेषण: तन्वी के मोबाइल फोन को कब्जे में ले लिया गया है। पुलिस उसके अंतिम कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) और व्हाट्सएप चैट्स खंगाल रही है ताकि यह पता चल सके कि अपनी मौत से कुछ घंटे पहले उसने किससे और क्या बात की थी।

4.आगे की राह: क्या मिलेगा तन्वी को न्याय?

पटेल नगर थाना पुलिस अब आरोपी एचओडी को पूछताछ के लिए नोटिस भेजने की तैयारी कर रही है। कानून के जानकारों का मानना है कि यदि मोबाइल चैट्स या सहपाठियों के बयानों में 'प्रताड़ना' की पुष्टि होती है, तो आरोपी डॉक्टर की गिरफ्तारी भी संभव है।

  1. विसरा रिपोर्ट का इंतजार: पोस्टमार्टम के बाद तन्वी के विसरा को सुरक्षित रख लिया गया है। इसकी रिपोर्ट ही यह स्पष्ट करेगी कि मौत का कारण दवाओं का ओवरडोज था या कोई और जहरीला पदार्थ।
  2. छात्रों में भारी रोष: SGRR मेडिकल कॉलेज के अन्य छात्र भी डरे हुए हैं और अंदरूनी तौर पर तन्वी के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। इस घटना ने पूरे कैंपस में डर और तनाव का माहौल पैदा कर दिया है।
  3. एसएसपी देहरादून की निगरानी: वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) खुद इस मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं ताकि जांच में कोई राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव न आए।

सुलगते सवाल और जिम्मेदार कौन?

तन्वी की मौत ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं जिनका जवाब देना कॉलेज प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए आसान नहीं होगा। क्या वाकई एक डॉक्टर ने दूसरे भविष्य के डॉक्टर की जान ले ली? क्या मेडिकल कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कोई ठोस नीति बनेगी? तन्वी के परिजनों की सिसकियां और देहरादून पुलिस की फाइलें अब केवल एक ही चीज की तलाश में हैं— सच्चाई और न्याय।

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