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देहरादून: UKD कार्यकर्ताओं पर FIR से उबाल; रमोला बोले- "दमनकारी नीति बर्दाश्त नहीं"

देहरादून, 28 मार्च 2026: राजधानी देहरादून में निजी स्कूलों की फीस वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के कार्यकर्ताओं पर पुलिस कार्रवाई के बाद मामला गरमा गया है। जिला प्रशासन द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर को यूकेडी ने 'झूठा और दमनकारी' करार दिया है। इसके विरोध में अब दल की केंद्रीय महामंत्री राजेश्वरी रावत ने जिलाधिकारी कार्यालय के सुरक्षा अधिकारी के खिलाफ ही कोतवाली में जवाबी तहरीर दे दी है।


यूकेडी का आरोप है कि प्रशासन शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध को कुचलने की कोशिश कर रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।


 विवाद का सारांश: UKD बनाम जिला प्रशासन

मुख्य बिंदुघटनाक्रम और पक्ष (Details)
विरोध का कारण25 मार्च को हुए प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं पर दर्ज FIR
UKD का आरोपसुरक्षा अधिकारी ने धक्का-मुक्की की और गेट बंद किया
प्रशासनिक रुखसुरक्षा अधिकारी द्वारा कार्यकर्ताओं के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई
मुख्य चेतावनीमुकदमे वापस न होने पर प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन की घोषणा
प्रमुख नेतृत्वराजेश्वरी रावत (केंद्रीय महामंत्री) एवं प्रबीन चन्द रमोला (महानगर अध्यक्ष)

झूठे मुकदमे और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन

  • सुरक्षा अधिकारी पर गंभीर आरोप: केंद्रीय महामंत्री राजेश्वरी रावत ने स्पष्ट किया कि दल के कार्यकर्ता शांतिपूर्ण ढंग से ज्ञापन सौंपने गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मौके पर तैनात सुरक्षा अधिकारी ने न केवल गेट बंद किया, बल्कि कार्यकर्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार और धक्का-मुक्की भी की। जबकि सूचना इकाई (LIU) और महानगर इकाई द्वारा प्रदर्शन की जानकारी पहले ही लिखित में दी जा चुकी थी।
  • महानगर अध्यक्ष की चेतावनी: महानगर अध्यक्ष प्रबीन चन्द रमोला ने जिलाधिकारी देहरादून को पत्र लिखकर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि यदि कार्यकर्ताओं पर दर्ज झूठे मुकदमे तुरंत वापस नहीं लिए गए, तो प्रशासन को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यूकेडी का मानना है कि जिला प्रशासन को दमनात्मक कार्रवाई के बजाय जनसमस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
  • पुलिस एक्ट और जवाबी FIR: राजेश्वरी रावत ने कोतवाली में तहरीर देकर सुरक्षा अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब आंदोलन जनहित में था, तो उसे अपराध की श्रेणी में खड़ा करना गलत है। दल अब इस कानूनी लड़ाई को सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ने की तैयारी कर रहा है।
  • व्यापक आंदोलन की रूपरेखा: केंद्रीय मीडिया प्रभारी अनिल थपलियाल ने बताया कि यदि जिला प्रशासन का रुख सकारात्मक नहीं रहा, तो पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा। कार्यकर्ताओं का कहना है कि फीस वृद्धि जैसे संवेदनशील मुद्दे पर आवाज उठाने वालों को जेल का डर दिखाकर चुप नहीं कराया जा सकता।
  • प्रशासनिक घेराबंदी: आने वाले दिनों में यूकेडी इस मुद्दे पर अन्य सामाजिक संगठनों को भी साथ लेने की योजना बना रहा है। शहर के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि प्रशासन और क्षेत्रीय दल के बीच यह टकराव आने वाले स्थानीय चुनावों पर भी असर डाल सकता है।

टकराव की राह पर देहरादून का सियासी माहौल

शिक्षा और फीस जैसे आम आदमी से जुड़े मुद्दों पर शुरू हुआ यह विवाद अब 'मुकदमों की राजनीति' में तब्दील हो गया है। एक तरफ प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था का हवाला दे रहा है, तो दूसरी तरफ उत्तराखंड क्रांति दल इसे अस्तित्व की लड़ाई मान रहा है। अब गेंद जिलाधिकारी के पाले में है कि वे इस संवेदनशील मामले को कैसे सुलझाते हैं।

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