देहरादून, 26 मार्च 2026: राजधानी देहरादून के निजी स्कूलों द्वारा सत्र शुरू होते ही की जा रही मनमानी फीस वृद्धि और महंगी किताबों के बोझ के खिलाफ उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। गुरुवार को महानगर अध्यक्ष प्रवीण चंद रमोला के नेतृत्व में यूकेडी कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन इतना उग्र था कि कार्यकर्ताओं ने पुलिस के घेरे को दरकिनार करते हुए कार्यालय के दोनों गेट तोड़ दिए, जिससे परिसर में हड़कंप मच गया।
प्रदर्शन की मुख्य झलकियां: क्या हुआ DM कार्यालय में?
| घटनाक्रम | विवरण (Details) |
| नेतृत्व | प्रवीण चंद रमोला (महानगर अध्यक्ष, UKD) |
| विवाद का केंद्र | निजी स्कूलों की मनमानी फीस, महंगी किताबें और ड्रेस। |
| उग्र प्रदर्शन | प्रदर्शनकारियों ने DM कार्यालय के गेट तोड़े; सुरक्षा बलों से धक्का-मुक्की। |
| प्रशासनिक प्रतिक्रिया | सिटी मजिस्ट्रेट के साथ कार्यकर्ताओं की तीखी झड़प और नोकझोंक। |
| मुख्य मांग | स्कूलों की जांच और मनमानी वसूली पर तत्काल रोक। |
1. "शिक्षा नहीं, व्यापार कर रहे हैं निजी स्कूल" - यूकेडी
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि देहरादून के अधिकांश नामी निजी विद्यालय शिक्षा के नाम पर 'लूट' का अड्डा बन गए हैं।
- मनमानी फीस: हर साल बिना किसी मानक के 10% से 20% तक फीस बढ़ा दी जाती है।
- अतिरिक्त शुल्क: डेवलपमेंट चार्ज, एनुअल फंक्शन और अन्य कई छद्म नामों से मध्यमवर्गीय परिवारों की जेब काटी जा रही है।
- सिंडिकेट का खेल: अभिभावकों को विशेष दुकानों से ही महंगी किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे स्कूल प्रबंधन को भारी कमीशन मिलता है।
2. सिटी मजिस्ट्रेट से तीखी झड़प: "कब जागेगा प्रशासन?"
जब प्रदर्शनकारी डीएम कार्यालय के भीतर घुसने की कोशिश कर रहे थे, तब मौके पर मौजूद सिटी मजिस्ट्रेट के साथ उनकी जमकर बहस हुई। कार्यकर्ताओं ने प्रशासन पर स्कूलों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया।
"जब हर साल शिकायतें की जाती हैं, तो शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन केवल खानापूर्ति क्यों करता है? आज आम आदमी का बच्चा पढ़ाना दूभर हो गया है और प्रशासन तमाशबीन बना है।" — प्रवीण चंद रमोला, महानगर अध्यक्ष (UKD)
3. उत्तराखंड क्रांति दल की 5 प्रमुख मांगें (Charter of Demands)
यूकेडी ने सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से शासन को ज्ञापन सौंपा, जिसमें निम्नलिखित मांगें प्रमुख हैं:
- फीस नियंत्रण: निजी स्कूलों के लिए तत्काल 'फीस रेगुलेटरी एक्ट' के तहत सख्त नियम लागू हों।
- NCERT अनिवार्य हो: निजी स्कूलों में निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों की जगह केवल NCERT पुस्तकें लागू की जाएं।
- बाध्यता खत्म हो: एक ही दुकान से ड्रेस या किताबें खरीदने की बाध्यता को तत्काल समाप्त किया जाए।
- RTE का पालन: शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत गरीब बच्चों के लिए 25% आरक्षण का सख्ती से पालन हो।
- सख्त ऑडिट: स्कूलों के खातों का सरकारी ऑडिट हो और अवैध वसूली करने वालों पर FIR दर्ज हो।
4. अभिभावकों का बढ़ता आक्रोश
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ऐसे अभिभावक भी शामिल हुए जो स्कूलों की भारी भरकम डिमांड से परेशान हैं। नया सत्र शुरू होने से पहले इस तरह के उग्र प्रदर्शन ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। यूकेडी ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे पूरे शहर में चक्का जाम करेंगे।
सुलगता शिक्षा का मुद्दा
देहरादून में शिक्षा अब एक गंभीर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका है। यूकेडी के इस उग्र प्रदर्शन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब जनता निजी स्कूलों की मनमानी को और अधिक बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इन 'लूट' की दुकानों पर नकेल कसता है या नहीं।
