राजकीय दून मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय की प्राचार्या डॉ. गीता जैन ने अस्पताल में संचालित हाइपरबैरिक ऑक्सीजन थेरेपी (HBOT) यूनिट का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने यूनिट में स्थापित अत्याधुनिक उपकरणों की कार्यक्षमता, उपचार की वर्तमान प्रक्रियाओं और वहां भर्ती मरीजों को दी जा रही सुविधाओं की गहन समीक्षा की।

दून मेडिकल कॉलेज में HBOT यूनिट
SOP से मिलेगी उपचार को नई रफ्तार
प्राचार्या डॉ. गीता जैन ने बताया कि एचबीओटी यूनिट के बेहतर और व्यवस्थित संचालन के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जा रही है।
- उद्देश्य: इस SOP का मुख्य उद्देश्य उपचार प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना है।
- वर्तमान स्थिति: अस्पताल में फिलहाल प्रतिदिन औसतन तीन मरीजों को यह थेरेपी दी जा रही है।
HBOT यूनिट: एक नजर में
क्या है HBOT और किन मरीजों को मिलता है लाभ?
हाइपरबैरिक ऑक्सीजन थेरेपी (HBOT) एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है जिसमें मरीज को सामान्य वायुमंडलीय दबाव से अधिक दबाव पर 100% शुद्ध ऑक्सीजन दी जाती है।
- बर्न केस: आग से झुलसे मरीजों के घाव भरने में यह थेरेपी क्रांतिकारी साबित होती है।
- सर्जरी रिकवरी: हेड और नेक (सिर एवं गर्दन) की जटिल सर्जरी के बाद ऊतकों (tissues) को तेजी से ठीक करने में यह सहायक है।
- गैंग्रीन और डायबिटिक घाव: यह उन घावों को भी ठीक करने में मदद करती है जो सामान्य उपचार से नहीं भरते।
सुरक्षा मानकों पर विशेष जोर
प्राचार्या ने यूनिट के चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ को सख्त निर्देश दिए कि मरीजों के उपचार के दौरान सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि दून अस्पताल प्रदेश का प्रमुख चिकित्सा केंद्र है, इसलिए यहाँ आने वाले मरीजों को आधुनिकतम और सुरक्षित तकनीक का लाभ मिलना अनिवार्य है।