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पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में गुलदार (लेपर्ड) का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा मामला पौड़ी जिले के कोट ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले बलमणा गांव से सामने आया है, जहाँ सोमवार देर शाम एक गुलदार ने 45 वर्षीय व्यक्ति पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत और वन विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है।
सड़क से घसीटकर ले गया शव
मृतक की पहचान गांव के ही प्रकाश लाल (45 वर्ष) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, सोमवार देर शाम जब प्रकाश लाल अपने रास्ते से जा रहे थे, तभी घात लगाकर बैठे गुलदार ने उन पर हमला कर दिया। हमला इतना भीषण था कि गुलदार शव को सड़क से नीचे झाड़ियों में घसीटकर ले गया। घटना का पता मंगलवार सुबह चला जब ग्रामीणों ने झाड़ियों में क्षत-विक्षत शव देखा।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: अधिकारियों को किया कमरे में कैद
घटना की सूचना मिलते ही जब वन विभाग और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची, तो उन्हें ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। आक्रोशित ग्रामीणों ने वन कर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों को एक कमरे में बंद कर दिया और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग को बार-बार सूचना देने के बावजूद क्षेत्र में सक्रिय गुलदार को पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
घटना का विवरण: एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
| स्थान | बलमणा गांव, कोट ब्लॉक, पौड़ी |
| मृतक का नाम | प्रकाश लाल (45 वर्ष) |
| घटना का समय | सोमवार देर शाम (9 मार्च 2026) |
| ग्रामीणों की मांग | क्षेत्र में तुरंत शूटर की तैनाती और गुलदार को मार गिराना |
| प्रशासनिक प्रतिक्रिया | डीएफओ महातिम यादव मौके पर मौजूद, जांच जारी |
दहशत के साये में बचपन और ग्रामीण
गुलदार के लगातार हमलों से ग्रामीणों का जीवन दुश्वार हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब वे शाम ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं। सबसे बड़ी चिंता बच्चों की सुरक्षा को लेकर है, जिनका स्कूल जाना अब जोखिम भरा हो गया है। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक क्षेत्र में आधिकारिक रूप से शूटर तैनात नहीं किया जाता और गुलदार को नरभक्षी घोषित कर कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे।
पुरानी घटनाओं ने बढ़ाया रोष (मुख्य बिंदु)
- जनवरी 2026: इसी क्षेत्र के बाड़ा गांव में गुलदार ने एक नेपाली मूल के व्यक्ति को अपना शिकार बनाया था।
- सक्रियता: गजल्ड और आसपास के गांवों में लगातार लेपर्ड की सक्रियता देखी जा रही है।
- विगत कार्रवाई: इससे पहले भी एक लेपर्ड को शूट किया गया था, लेकिन नए गुलदार की आमद ने फिर से खतरा पैदा कर दिया है।
- वन विभाग का तर्क: डीएफओ पौड़ी महातिम यादव ने बताया कि टीम साक्ष्य जुटा रही है और ग्रामीणों की मांगों पर उच्चाधिकारियों से वार्ता की जा रही है।
कब थमेगा इंसानी बस्तियों में गुलदार का दखल?
उत्तराखंड के गांवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक बड़ी त्रासदी बनता जा रहा है। पौड़ी की यह घटना वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों की मांग है कि सरकार केवल मुआवजे तक सीमित न रहे, बल्कि वन्यजीवों के आतंक से निजात दिलाने के लिए धरातल पर सख्त कदम उठाए।