कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और विधायक काजी निजामुद्दीन ने देहरादून में आयोजित प्रेसवार्ता में सरकार की आर्थिक नीतियों को राज्य विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि "डबल इंजन" का दावा करने वाली भाजपा सरकार की नीतियां उत्तराखंड के हितों पर चोट कर रही हैं।
- बजट में कटौती: निजामुद्दीन ने आरोप लगाया कि भारत सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure), पेयजल योजनाओं और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के बजट में लगातार कटौती की जा रही है।
- वित्त आयोग की चिंता: उन्होंने आशंका जताई कि 16वें वित्त आयोग की संभावित सिफारिशें उत्तराखंड जैसी भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं, जिससे मिलने वाली ग्रांट में भारी कमी आएगी।
बजट खर्च और शिक्षा व्यवस्था पर घेरा
विधायक निजामुद्दीन ने राज्य सरकार के आंतरिक प्रबंधन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक तरफ राज्य विकास की बात करता है, तो दूसरी तरफ कई सरकारी विभाग आवंटित बजट का पूरा उपयोग तक नहीं कर पा रहे हैं।
- स्कूलों पर ताले: शिक्षा के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में राज्य में लगभग दो हजार (2,000) सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं।
- बेरोजगारी का मुद्दा: उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के अपने वादों में पूरी तरह विफल रही है और प्रदेश का युवा आज सड़कों पर है।
कांग्रेस के प्रमुख आरोप: एक नजर में
| मुद्दा | काजी निजामुद्दीन का पक्ष |
| केंद्रीय बजट | पेयजल और सड़क योजनाओं के बजट में कटौती। |
| शिक्षा | पिछले दशक में 2,000 सरकारी स्कूलों का बंद होना। |
| प्रशासनिक विफलता | विभागों द्वारा बजट का पूर्ण उपयोग न कर पाना। |
| विधानसभा सत्र | सत्र की अवधि को छोटा करना (लोकतंत्र का गला घोंटना)। |
विधानसभा सत्र: "4 दिन का सत्र केवल खानापूर्ति"
आगामी विधानसभा सत्र को लेकर भी काजी निजामुद्दीन ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि उत्तराखंड की जनसमस्याओं पर चर्चा के लिए विधानसभा सत्र कम से कम 15 दिनों का होना चाहिए।
"सरकार केवल चार दिनों में सत्र समाप्त करने की तैयारी कर रही है। यह विपक्ष की आवाज दबाने और प्रदेश के महत्वपूर्ण मुद्दों से भागने की कोशिश है।" - काजी निजामुद्दीन
आगामी चुनावों से पहले गरमाई राजनीति
काजी निजामुद्दीन की इस प्रेसवार्ता ने राज्य में राजनीतिक पारा बढ़ा दिया है। विशेषकर बजट कटौती और बंद होते स्कूलों के आंकड़ों ने सरकार के सामने नई चुनौतियां पेश कर दी हैं। कांग्रेस अब इन मुद्दों को लेकर सदन से लेकर सड़क तक सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है।