रुद्रप्रयाग जनपद के ऊखीमठ विकासखंड की ग्राम पंचायत तुलंगा में सामाजिक परिवर्तन की एक बड़ी लहर देखी गई है। गाँव की महिलाओं और ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से बाबा केदारनाथ, मां राजराजेश्वरी और इष्टदेव जाखराजा की सौगंध खाकर यह प्रण लिया कि अब गाँव के किसी भी सार्वजनिक या मांगलिक कार्यक्रम (शादी-ब्याह आदि) में शराब या किसी भी प्रकार का नशा नहीं परोसा जाएगा।
नियम तोड़ने पर लगेगा भारी जुर्माना
ग्रामसभा में सर्वसम्मति से यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया कि यदि कोई भी व्यक्ति इस सामाजिक संकल्प का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उससे भारी जुर्माना वसूला जाएगा। ग्रामीणों का स्पष्ट संदेश है: "शराब छोड़ो, जीवन जोड़ो"। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को नशे की गर्त से बचाना और गाँव की सामाजिक मर्यादा को सुदृढ़ करना है।
तुलंगा गाँव: सैनिकों की धरती पर नशे को 'नो'
| विशेषता | विवरण |
| गाँव की पहचान | सैन्य बहुल गाँव (85 युवा सेना, पुलिस व अर्धसैनिक बलों में)। |
| मुख्य नारा | "नशा नहीं रोजगार दो, शराब छोड़ो जीवन जोड़ो"। |
| नेतृत्व | महिला मंगल दल, ग्राम प्रधान और युवक मंगल दल। |
| जुर्माना प्रावधान | नियम उल्लंघन करने पर आर्थिक दंड की व्यवस्था। |
| विशेष अवसर | अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) की पूर्व संध्या पर पहल। |
सैनिकों के गाँव ने पेश की मिसाल
तुलंगा गाँव अपनी देशभक्ति के लिए जाना जाता है, जहाँ के लगभग 85 युवा वर्तमान में देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि जिस गाँव के बेटे देश की सुरक्षा में तैनात हों, वहाँ नशे जैसी सामाजिक बुराई के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
इस मुहिम के सारथी:
इस सामाजिक बदलाव में महिला मंगल दल अध्यक्ष रचना देवी, ग्राम प्रधान सरिता देवी, युवक मंगल दल अध्यक्ष सुनील राणा और क्षेत्र पंचायत सदस्य बीरेंद्र नेगी ने अग्रणी भूमिका निभाई। साथ ही डॉ. चरण सिंह केदारखंडी, ओंकार सिंह धीरवान और अन्य प्रबुद्ध जनों ने इस निर्णय को अपना पूर्ण समर्थन दिया।
महिला शक्ति का सशक्त संदेश
8 मार्च को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से ठीक पहले केदारघाटी की महिलाओं द्वारा उठाया गया यह कदम पूरे उत्तराखंड में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह न केवल सामाजिक जागरूकता का प्रतीक है, बल्कि देवभूमि की सांस्कृतिक परंपराओं को बचाने की दिशा में एक सशक्त हुंकार भी है।
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